10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Ramadan 2026 : डिजिटल युग में कैसे बदल रहा है रमजान मनाने का अंदाज

Importance of Ramadan in Islam : डिजिटल युग में रमजान 2026 की इबादत, रोज़ा, ज़कात और सामाजिक जुड़ाव कैसे बदल रहा है, जानिए इस खास रिपोर्ट में।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Manoj Vashisth

image

Anshika Kasana

Feb 10, 2026

Ramadan 2026

Ramadan 2026 : सहरी से इफ्तार तक: डिजिटल युग में कैसे बदल रहा है रमजान मनाने का अंदाज (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Ramadan 2026 Start Date : इस्लाम धर्म में इबादत के महीने रमजान की शुरूआत होने वाली है। रमजान इस्लाम धर्म में इबादत और सब्र का पाक महीना है। इस साल रमजान की शुरूआत 19 फरवरी से होगी। हर साल रमजान की तारीखें चांद की दिशा को देखते हुए ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से तय की जाती हैं। रमजान का महीना मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद खास होता है, क्योंकि यह केवल रोजा रखने का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सब्र और अल्लाह से नजदीकी का अवसर भी होता है। आधुनिक डिजिटल युग में रमजान की तैयारियां, इबादत के तरीके और सामाजिक जुड़ाव के स्वरूप में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

रमजान का धार्मिक महत्व

रमजान इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। इस महीने में मुसलमान सुबह फजर से लेकर शाम मगरिब तक रोजा रखते हैं। माना जाता है कि इसी पवित्र महीने में कुरान शरीफ नाजिल हुआ था। इसलिए रमजान को कुरान से जुड़ने, इबादत बढ़ाने और अपने व्यवहार को बेहतर बनाने का महीना कहा जाता है। यह समय इंसान को अपने भीतर झांकने, गलतियों से सीखने और अच्छाइयों को अपनाने की प्रेरणा देता है।

रमजान की तैयारियां

रमजान के आगमन से पहले घरों, मस्जिदों और बाजारों में अलग रौनक देखने को मिलती है। लोग नमाज, कुरान की तिलावत और तरावीह की तैयारी करते हैं। सहरी और इफ्तार के लिए खास इंतजाम किए जाते हैं। साथ ही जकात और सदके को लेकर भी लोग पहले से योजना बनाते हैं ताकि जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जा सके।

डिजिटल युग में रमजान

आज का दौर डिजिटल तकनीक का है और रमजान भी इससे अछूता नहीं है। मोबाइल ऐप्स के जरिए नमाज के समय, कुरान की तिलावत और इस्लामिक जानकारी अब आसानी से उपलब्ध हो जाती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धार्मिक कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण, इस्लामिक लेक्चर और रमजान से जुड़ी जानकारियां लोगों को घर बैठे मिल रही हैं। डिजिटल माध्यमों ने दूर रह रहे परिवारजनों और समुदाय को भी रमजान के दौरान आपस में जोड़े रखा है।

ऑनलाइन इबादत और सामाजिक जुड़ाव

कई लोग ऑनलाइन कुरान क्लासेस, वर्चुअल तरावीह और डिजिटल इस्लामिक सेशंस से जुड़ रहे हैं। इसके अलावा ऑनलाइन ज़कात और दान की सुविधा ने जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने की प्रक्रिया को और सरल बनाया है। सोशल मीडिया पर रमजान से जुड़े संदेश, दुआएं और शुभकामनाएं साझा कर लोग एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय युवा पीढ़ी के लिए रमजान को समझने और अपनाने के नए तरीके सामने आए हैं। इस्लामिक कंटेंट, ऑनलाइन चर्चाओं और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से युवा वर्ग रमजान की शिक्षाओं से जुड़ रहा है। यह बदलाव दर्शाता है कि परंपरा और आधुनिकता साथ साथ चल सकती हैं।

रमजान केवल धर्म का महीना नहीं, बल्कि आत्मिक विकास और सामाजिक संवेदनशीलता का मौका भी देता है। डिजिटल युग में इसके स्वरूप में कुछ बदलाव जरूर आए हैं, लेकिन रमजान का मूल संदेश आज भी वही है संयम, इबादत और इंसानियत। जैसे-जैसे रमजान की शुरुआत नजदीक आ रही है, यह महीना लोगों को एक बार फिर सादगी और आपसी भाईचारे की ओर लौटने का संदेश देता है।