
Husband-Wife Conflict Solution: पति-पत्नी के झगड़ों का समाधान शास्त्रों से समझें। (छविः एआई)
PATI ke Kartavya PATNI ke liye: हिंदू शास्त्रों के अनुसार गृहस्थाश्रम में पति की भूमिका बहुत अहम होती है। मनुस्मृति और वेदों में पति के पांच मुख्य कर्तव्य तय किए गए हैं। इन कर्तव्यों का पालन न करने पर पति-पत्नी में कलह होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है, कि हसबैंड-वाइफ के झगड़ों का मूल कारण और समाधान क्या है?
पति-पत्नी के बीच झगड़ा न हो, इसलिए कई बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। शांत रहना, गहरी सांस लेना, विषय बदलना, प्यार से बात करना और माफी मांगना बहुत जरूरी है। साथ ही एक-दूसरे को समझना, साथ में समय बिताना, और समस्याओं पर सोचने के बजाय एकजुट होकर काम करना रिश्ते को मजबूत बनाता है। यदि स्थिति गंभीर हो तो, एक्सपर्ट की मदद लेने में संकोच नहीं करें। एक्सपर्ट्स के अनुसार, थोड़ा-सा झुकने, अपनी गलती मानने और माफी मांगने से मसले सुलझ जाते हैं।
शास्त्रों ने गृहस्थाश्रम में पति और पत्नी को एक इकाई के दो अभिन्न अंग माना है। पत्नी को अर्धांगिनी (आधा अंग) और गृहलक्ष्मी बताया गया है। वहीं पति के लिए भी बेहद जरूरी और गंभीर कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं।
मनुस्मृति (9.95) के अनुसार, पति अपनी पत्नी का भरण-पोषण हर स्थिति में करें। पति का पहला कर्तव्य पत्नी और परिवार को भोजन, वस्त्र, और आवास के साथ अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध करवाना है।
मनुस्मृति (9.12) में कहा गया है, पति को अपनी पत्नी की रक्षा हर हाल में करनी चाहिए। पत्नी की रक्षा करके ही वह अपनी संतान, चरित्र, कुल और स्वयं की रक्षा करता है।
शास्त्रों का मत है कि जिस घर में स्त्रियां दुखी रहती हैं, वह कुल शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।
मनुस्मृति (3.56):यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ॥ अर्थात् जहां नारियों की पूजा और सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं। जहां स्त्रियों का सम्मान नहीं होता, वहां किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती।
पति के लिए 'एकपत्नी व्रत' का पालन करना आदर्श माना गया है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन से यही मिसाल दी।
विवाह के समय पति संकल्प लेता है कि वह धर्म, अर्थ और काम के मामलों में अपनी पत्नी को साथ रखेगा।
| कर्तव्य | विवरण |
| भरण-पोषण | भोजन, वस्त्र और सुख-सुविधाओं की व्यवस्था करना। |
| सुरक्षा | शारीरिक रक्षा के साथ-साथ पत्नी के मान-सम्मान की रक्षा करना। |
| समानता | पत्नी को घर की 'सम्राज्ञी' (महारानी) के रूप में सम्मान देना। |
| पारदर्शिता | अथर्ववेद (2.30.4) के अनुसार, पति को अपनी पत्नी से कुछ भी छिपाना नहीं चाहिए। |
| संयम | क्रोध का त्याग करना और मधुर व्यवहार करना। |
Published on:
12 Jan 2026 04:56 pm
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