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बुजुर्गों पर खर्च नहीं, भविष्य में निवेश, मांग रहे समाधान, राजस्थान बजट से बड़ी उम्मीदें

राजसमंद. राजस्थान का बजट केवल आंकड़ों और योजनाओं की सूची नहीं होता, बल्कि यह तय करता है कि राज्य अपने कर्मचारियों, पेंशनरों और बुजुर्गों को किस नज़रिए से देखता है-सम्मान के साथ या केवल औपचारिक दायित्व के रूप में। वर्षों तक सेवा देने के बाद मिलने वाली पेंशन कोई रियायत नहीं, बल्कि अर्जित अधिकार है, […]

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Rajasthan Budget 2026

Rajasthan Budget 2026

राजसमंद. राजस्थान का बजट केवल आंकड़ों और योजनाओं की सूची नहीं होता, बल्कि यह तय करता है कि राज्य अपने कर्मचारियों, पेंशनरों और बुजुर्गों को किस नज़रिए से देखता है-सम्मान के साथ या केवल औपचारिक दायित्व के रूप में। वर्षों तक सेवा देने के बाद मिलने वाली पेंशन कोई रियायत नहीं, बल्कि अर्जित अधिकार है, लेकिन हर बजट के साथ यह सवाल फिर खड़ा हो जाता है कि क्या राज्य इस अधिकार को गरिमा के साथ निभा रहा है? महंगाई लगातार बढ़ रही है। दवाइयों की कीमतें, इलाज का खर्च, बिजली-पानी के बिल और रोज़मर्रा की जरूरतें आम आदमी ही नहीं, बल्कि पेंशनरों के लिए भी चुनौती बन चुकी हैं। इसके बावजूद पेंशन और महंगाई राहत में बढ़ोतरी उसी अनुपात में नहीं हो पा रही। राजसमंद जिले सहित प्रदेशभर में बड़ी संख्या में ऐसे पेंशनर हैं, जिनकी पूरी आर्थिक सुरक्षा केवल पेंशन पर निर्भर है। ऐसे में बजट से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि पेंशन को न्यूनतम गरिमापूर्ण जीवन-यापन से जोड़ा जाए।

पेंशनरों की अपेक्षाएं: स्पष्ट, लेकिन अनसुनी

पेंशनरों की प्रमुख मांगें नई नहीं हैं, लेकिन वर्षों से लंबित हैं।

  • पेंशन और महंगाई राहत की समय पर और वास्तविक वृद्धि हो।
  • चिकित्सा सुविधाओं का सरलीकरण और मानवीयकरण किया जाए।
  • राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम जैसी योजनाओं को कागजों तक सीमित न रखकर ज़मीनी स्तर पर पेंशनर-फ्रेंडली बनाया जाए।
  • कैशलेस इलाज में आने वाली बाधाओं को हटाना और निजी अस्पतालों की उपलब्धता बढ़ाई जाए।
  • पेंशन विसंगतियों का शीघ्र समाधान किया जाए।
  • पेंशन में असमानता की खाई दूर की जाए।
  • 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनरों के लिए अतिरिक्त सहायता, स्वास्थ्य निगरानी और होम-केयर जैसी सुविधा हो।

पेंशन: जीवनरेखा या नाममात्र की सहायता?

वर्तमान पेंशन राशि बढ़ती महँगाई के सामने लगभग अप्रासंगिक होती जा रही है। दवा, भोजन, बिजली, पानी- हर चीज़ महंगी हो चुकी है, लेकिन पेंशन में बढ़ोतरी नाममात्र है। कई बुजुर्गों को समय पर पेंशन तक नहीं मिल पाती। तकनीकी और बैंकिंग प्रक्रियाएं उनके लिए एक नई परेशानी बन गई हैं। बजट से अपेक्षा है कि पेंशन को कल्याण योजना की तरह नहीं, बल्कि सम्मानजनक न्यूनतम जीवन-यापन की गारंटी के रूप में देखा जाए।

हेल्थ केयर: अस्पताल हैं, पर समाधान अधूरे

राजसमंद सहित प्रदेश के कई जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर चिंताजनक है।

  • विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
  • लंबी कतारें और रेफरल सिस्टम की मजबूरी
  • आयुष्मान और चिरंजीवी जैसी योजनाओं की जमीनी जटिलताएं

बुजुर्गों के लिए विशेष जेरियाट्रिक ओपीडी, मोबाइल हेल्थ यूनिट और गांव-स्तर पर नियमित स्वास्थ्य जांच आज भी अपेक्षा भर हैं। बजट में केवल इमारतें नहीं, बल्कि बुजुर्ग-अनुकूल हेल्थ सिस्टम की जरूरत है।

टैक्स राहत नहीं, असली ज़रूरत सुरक्षा की

टैक्स छूट और ब्याज में रियायतें सुनने में भले ही राहत देती हों, लेकिन अधिकांश बुजुर्गों की असली समस्या टैक्स नहीं है। उनकी चिंता है:-

  • महंगी दवाइयां
  • इलाज पर बढ़ता खर्च
  • सामाजिक और मानसिक असुरक्षा

इसलिए बजट से अपेक्षा है कि टैक्स राहत के साथ-साथ दवाइयों पर सब्सिडी, मुफ्त डायग्नोस्टिक सेवाएं और होम-केयर सपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं की जाएं।

होम केयर जैसी सुविधाएं दें सरकार

80 वर्ष से ऊपर के वरिष्ठ पेंशनरों के लिए अतिरिक्त सहायता और होम-केयर जैसी सुविधाएं दी जानी चाहिए। जो लोग वर्षों तक राज्य की सेवा कर चुके हैं, उनके लिए स्थायित्व और भरोसे की कमी दिखाई देती है। आरजीएचएस जैसी योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर पेंशनर-फ्रेंडली बनाया जाए। महंगाई राहत में वृ़दि्ध की जाए, ताकि पेंशनरों को सम्मान मिल सके।

प्रभु गिरि गोस्वामी, सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, राजसमंद

रेफरल सिस्टम पर लगाई जाए पाबंदी

अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की है। जिसे पूरा किया जाए। अस्पतालों में लंबी कतारों को खत्म करने की दिशा में काम किया जाए। रेफरल सिस्टम पर पाबंदी लगाई जाए। आयुष्मान और चिरंजीवी योजनाओं की जमीनी जटिलताओं को समाप्त कर इसे सरल बनाया जाए। बुजुर्गों के लिए विशेष जेरियाट्रिक ओपीडी, मोबाइल हेल्थ यूनिट की सुविधा शुरू की जाए।

डॉ. रमेश कुमार मेनारिया, रिटायर्ड प्रोफेसर

बुजुर्गों के उपचार की अलग से हो व्यवस्था

अस्पतालों में वरिष्ठजनों के लिए उपचार की अलग से व्यवस्था हो। कतार की बजाय, इनके बैठने की अलग से व्यवस्था की जाए। बुजुर्गों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में अलग से प्रावधान किए जाएं। पेंशन विसंगतियों का शीघ्र समाधान किया जाए। वहीं पेंशन में असमानता की खाई दूर की जाए। कैशलेस इलाज में आने वाली बाधाओं को हटाया जाए।

घनश्याम जोशी, शिक्षाविद्, राजसमंद

आय के मानदंडों में दी जाए ढील

सेवानिवृत कर्मचारियों की कम्यूटेशन रिकवरी के लिए 15 वर्ष क अवधि को घटाकर 12 वर्ष किए जाने का प्रावधान बजट में होना चाहिए। पारिवारिक पेंशन के लिए आय के मानदंडों में ढील देने और प्रक्रिया को सरल बनाए जाने की घोषणा सरकार को करनी चाहिए। इसके अलावा पेंशनरों को केन्द्र के समा भत्ता देने की घोषणा भी इस बजट में करनी चाहिए।

त्रिलोकी मोहन पुरोहित, सेवानिवृत प्रधानाचार्य, राजसमंद