
एमबीए किसान आकाश हींगड़, पत्रिका फोटो
Inspirational story: राजसमंद। समय के साथ-साथ कृषि और किसानी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक दौर में खेती केवल परंपरागत साधनों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि नवीन तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से यह आयवर्धन और संसाधन संरक्षण का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। कृषि क्षेत्र में हो रहे ये नवाचार न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि पानी, उर्वरक और ऊर्जा जैसे सीमित संसाधनों के संतुलित और प्रभावी उपयोग को भी सुनिश्चित कर रहे हैं।
इसी बदलते कृषि परिदृश्य में राजसमंद जिले के अग्रणी किसान आकाश हींगड़ एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आए हैं। आकाश हींगड़, अशोक हींगड़ के पुत्र हैं, जिनका प्रारंभिक जीवन कृषि से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा नहीं रहा। उन्होंने ग्रामीण विकास में एमबीए की शिक्षा प्राप्त करने के बाद एचडीएफसी बैंक मुंबई में सीनियर मैनेजर के पद पर सेवाएं दीं। बावजूद इसके, शुरुआत से ही उनका झुकाव कृषि और ग्रामीण विकास की ओर रहा।
इसी रुझान के चलते आकाश हींगड़ ने बैंक की सुरक्षित नौकरी छोड़कर खेती को ही अपना मुख्य व्यवसाय बनाने का दृढ़ संकल्प लिया। उन्होंने कुरज क्षेत्र में 32 एकड़ भूमि पर आधुनिक कृषि की शुरुआत की। आज वे जिले में एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) का एक व्यापक और सफल मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं।
उनके कृषि मॉडल में 12 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में पॉलीहाउस, विभिन्न फलदार बाग, जैविक पद्धतियों से फसल एवं सब्जी उत्पादन, सोलर पंप, गोबर गैस इकाई, पशुपालन तथा आधुनिक कृषि उपकरणों का समन्वित उपयोग शामिल है। इनमें सबसे प्रमुख है लेजर लैंड लेवलर, जिसकी लागत लगभग 3.50 लाख रुपये है और जिसका वे अत्यंत कुशलता से उपयोग कर रहे हैं।
लेजर लैंड लेवलर को लेजर समतलीकरण मशीन भी कहा जाता है। यह एक अत्याधुनिक और सटीक तकनीक है, जिसमें लेजर सेंसर की सहायता से ट्रैक्टर के पीछे लगे बकेट को स्वतः नियंत्रित किया जाता है, जिससे खेत को पूर्णतः समतल किया जा सकता है। इस तकनीक से खेत की सतह एक समान हो जाती है, जिससे सिंचाई और बुवाई दोनों अधिक प्रभावी बनती हैं।
लेजर लैंड लेवलर के उपयोग से 20 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत, 15 से 25 प्रतिशत तक पैदावार में वृद्धि तथा 3 से 4 प्रतिशत अतिरिक्त कृषि योग्य भूमि प्राप्त होती है। यह मशीन 0.01 से 15 प्रतिशत तक की ढाल वाले खेतों को भी समतल करने में सक्षम है। परिणामस्वरूप सिंचाई में लगने वाला समय, जल की मात्रा तथा ऊर्जा (डीजल या बिजली) की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है।
पूरे खेत के एक समान समतलीकरण से बुवाई की गहराई समान रहती है, जिससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और उत्पादन में प्रत्यक्ष वृद्धि देखने को मिलती है। समतल खेत होने से खरपतवार की समस्या भी कम होती है और उनका नियंत्रण आसान हो जाता है। साथ ही, उर्वरकों का समान वितरण होने से उनकी उपयोग दक्षता बढ़ती है और कुल उर्वरक मात्रा में भी बचत संभव होती है।
आज अधिकांश किसानों के पास खेती योग्य भूमि सीमित है। ऐसे में लेजर लैंड लेवलर जैसी तकनीक अपनाकर किसान न केवल पानी, उर्वरक और ईंधन जैसे संसाधनों की बचत कर सकते हैं, बल्कि भूमि की उत्पादकता बढ़ाकर कम लागत में अधिक पैदावार भी प्राप्त कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों को 2 से 3 वर्ष में एक बार अपने खेतों में लेजर लैंड लेवलर चलवाकर खेत का समतलीकरण अवश्य करवाना चाहिए।
राजसमंद जिले में आकाश हींगड़ द्वारा अपनाया गया यह आधुनिक कृषि मॉडल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत है, जो यह सिद्ध करता है कि तकनीक, सोच और संकल्प के समन्वय से खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
कल्प वर्मा, उप निदेशक उद्यान, राजसमंद
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Published on:
24 Jan 2026 02:01 pm
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