2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बजट से सरकार की उम्मीदें: महंगाई से राहत, गरीब और छोटे व्यापार को टैक्स से मिले राहत

राजसमंद. राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर राजसमंद जिले में अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। जानकारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह बजट केवल आय-व्यय का औपचारिक दस्तावेज़ न होकर यह तय करने वाला होना चाहिए कि राज्य की आर्थिक वृद्धि का वास्तविक लाभ राजसमंद के […]

3 min read
Google source verification
Rajsasthan Budget 2026

Rajsasthan Budget 2026

राजसमंद. राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर राजसमंद जिले में अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। जानकारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह बजट केवल आय-व्यय का औपचारिक दस्तावेज़ न होकर यह तय करने वाला होना चाहिए कि राज्य की आर्थिक वृद्धि का वास्तविक लाभ राजसमंद के गरीब, किसान और निम्न-मध्यम वर्ग तक कैसे पहुंचे। वर्तमान हालात में भले ही अर्थव्यवस्था स्थिर दिखाई दे रही हो, लेकिन महंगाई, बिजली दरें, स्वास्थ्य और शिक्षा खर्च ने राजसमंद के आम परिवार का बजट बिगाड़ रखा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि बजट की दिशा टैक्स कलेक्शन से आगे बढ़कर खर्च कम करके कर राहत की नीति बननी होनी चाहिए।

रोजमर्रा के खर्च में छिपा टैक्स, गरीब पर सबसे बड़ा असर

अर्थशास्त्रियों के अनुसार राज्य के पास प्रत्यक्ष करों की सीमाएँ जरूर हैं, लेकिन अप्रत्यक्ष करों और सरकारी सेवाओं की लागत का सीधा असर आम नागरिक पर पड़ता है। राजसमंद जैसे ग्रामीण और अर्ध-शहरी जिले में यह बोझ और अधिक महसूस किया जाता है।

इनको मिले निशुल्क बिजली

बजट 2026-27 में सरकार से मांग की जा रही है कि 200 यूनिट तक लक्षित निःशुल्क बिजली का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवारों को दिया जाए। इसे सब्सिडी नहीं, बल्कि डिस्पोज़ेबल इनकम बढ़ाने का प्रभावी उपाय बताया जा रहा है, जिससे परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर अधिक खर्च कर सकें।

छोटे व्यापार और एमएसएमई सेक्टर के लिए राहत जरूरी

राजसमंद जिले की अर्थव्यवस्था में मार्बल उद्योग, किराना व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट और अन्य छोटे व्यवसायों की अहम भूमिका है। ये सेक्टर जिले में सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराते हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है:-

  • लाइसेंस फीस की समीक्षा हो,
  • नवीनीकरण शुल्क पर ध्यान दिया जाए ,
  • स्थानीय करों को सरल बनाया जाए।

इन नियमों को सरल और युक्तिसंगत बनाया जाना चाहिए। इससे एमएसएमई सेक्टर को राहत मिलेगी और कर अनुपालन भी बढ़ेगा।

स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश भी टैक्स राहत के समान

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि करों में सीधी छूट संभव न हो, तो स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की लागत कम करना भी अप्रत्यक्ष टैक्स राहत के समान है। राजसमंद में ब्लॉक-स्तरीय अस्पतालों, उप-स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता सुधार से गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव कम हो सकता है। नीति आयोग के अनुसार, स्वास्थ्य पर किया गया हर एक रुपये का निवेश भविष्य में तीन से चार रुपये की सामाजिक बचत देता है। इसी आधार पर बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता देने की मांग उठ रही है।

गरीबों के लिए राहत: सब्सिडी नहीं, आर्थिक स्थिरता

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 38 और 39 राज्य को सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं। इसी भावना के अनुरूप बजट में:-

  • पेंशन योजनाओं को महंगाई से जोड़ने,
  • डीबीटी आधारित योजनाओं का समयबद्ध भुगतान,
  • किसानों के लिए फसल-हानि और आपदा राहत का त्वरित निष्पादन

जैसे कदम उठाने की आवश्यकता बताई जा रही है। इससे राजसमंद के गरीब और किसान वर्ग को आश्रित नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

ऐसा बजट, जो राजसमंद महसूस कर सके

जिले के जानकारों का कहना है कि बजट 2026-27 को राहत-आधारित, प्रभाव-केंद्रित और गरीब-अनुकूल बनाना समय की सबसे बड़ी मांग है। क्योंकि सबसे सफल बजट वही होगा, जिसका असर राजसमंद के आम नागरिक की रोजमर्रा की ज़िंदगी में साफ दिखाई दे।

इनका कहना है

छोटे व्यापारियों पर राज्य-स्तरीय शुल्क की समीक्षा की जानी चाहिए। इसमें लाइसेंस फीस, नवीनीकरण शुल्क और स्थानीय करों को सरल व युक्तिसंगत बनाकर एमएसएमई सेक्टर को राहत प्रदान की जा सकती है। जो रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है। इसके अलावा स्वास्थ्य व शिक्षा खर्च घटाकर अप्रत्यक्ष टैक्स में राहत दी जाए। यदि कर में सीधी छूट संभव न हो, तो सेवाओं की लागत कम करना भी टैक्स राहत के समान प्रभाव दे सकता है। पेंशन योजनाओं को महंगाई से जोड़ा जाए और डीबीटी आधारित लाभों का समयबद्ध भुगतान किए जाने के प्रावधान किए जाएं।

देवेन्द्र हिंगड़, सीए, राजमसंद

टैक्स की दरें जितनी कम होगी एवं टैक्स रिटर्न फाइल करने में जितनी सरलता लाई जाएगी उसका सकारात्मक प्रभाव बहुत अधिक पड़ता है। व्यापारियों की ईमानदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से टैक्स की दरें न्यूनतम होनी चाहिए। टैक्स दर जितनी कम होगी, राजस्व आय उससे कई ज्यादा बढ़ेगी। वित्त मंत्री को चाहिए कि व्यापारियों को राहत प्रदान करते हुए विभागीय प्रक्रिया का सरलीकरण करें, ऐसी योजनाओं पर क्रियान्वयन हो जिससे पुराने कर विवाद मामलों को एक निश्चित तारीख तक पूर्ण रूप से समाप्त करवाया जा सके। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

आशीष राजकुमार दक. सीए, राजसमंद

Story Loader