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प्रदेश में हिंदी से एमबीबीएस की परीक्षा देने वाला इकलौता छात्र, विद्या परिषद से छात्र को हिंदी-अंग्रेजी में उत्तर लिखने की अनुमति मिली

रायपुर।छात्र फर्स्ट ईयर का छात्र है और एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। विद्या परिषद ने यह अनुमति गाइडलाइन फॉर कंपेंटेंसी बेस्ट मेडिकल एजुकेशन (सीबीएमई) के आधार पर दी है।

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CG News: एमबीबीएस-बीडीएस प्रवेश के लिए पहले दिन 400 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन, 8 अगस्त को आएगी पहली सूची

एमबीबीएस-बीडीएस प्रवेश के लिए पहले दिन 400 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन (Photo Patrika)

रायपुर। प्रदेश सरकार ने हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई की घोषणा तो कर दी, लेकिन छात्राें की इसमें खास रुचि नहीं नहीं है। यही कारण है कि 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 1400 से ज्यादा छात्रों में केवल एक छात्र ने हिंदी माध्यम में उत्तर लिखने की अनुमति मांगी है। पं. दीनदयाल उपाध्याय हैल्थ साइंस एंड आयुष विवि के विद्या परिषद से छात्र को हिंदी-अंग्रेजी में उत्तर लिखने की अनुमति भी दे दी है।

छात्र फर्स्ट ईयर का छात्र है और एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। विद्या परिषद ने यह अनुमति गाइडलाइन फॉर कंपेंटेंसी बेस्ट मेडिकल एजुकेशन (सीबीएमई) के आधार पर दी है। विवि के रजिस्ट्रार डॉ. दिनेश सिन्हा के आदेश के अनुसार छात्र नवीन गुप्ता हाेने वाली वार्षिक परीक्षा में उत्तर हिंदी में भी लिख सकेंगे।अलग क्लास की व्यवस्था नहींप्रदेश सरकार ने हिंदी दिवस पर 14 सितंबर 2024 को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई की घोषणा की थी।

हालांकि किसी भी मेडिकल कॉलेज के इक्के-दुक्के छात्रों ने इस पर रचि दिखाई, लेकिन उनके लिए अलग से क्लास की व्यवस्था नहीं की जा सकी। दरअसल एक-दो छात्र के लिए अलग से क्लास या फैकल्टी की व्यवस्था करना संभव नहीं है। हालांकि किसी छात्र ने पहली बार वार्षिक परीक्षा में हिंदी माध्यम में उत्तर लिखने की अनुमति मांगी है। इससे पहले किसी कॉलेज के छात्र ने ऐसा कोई निवेदन नहीं किया था।

इस पर पत्रिका पहले ही समाचार प्रकाशित कर चुका है।लाइब्रेरी में किताबें गिनती कीअसल में गिनती की चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा था कि हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए कॉलेजों में किताबें पर्याप्त है। उनकी तैयारी भी पूरी है। हालांकि छात्रों की अरुचि के कारण सरकार की तैयारी धरी की धरी रह गई। लाइब्रेरी में गिनती की किताबें हैं। दूसरी ओर नेशनल मेडिकल कमीशन ने एमबीबीएस छात्र छत्तीसगढ़ी बोल सके, जिसके लिए 8 साल पहले स्थानीय बोली की जानकारी छात्रों को सिखाने का आदेश दिया था।

ताकि दूसरे राज्यों से आने वाले छात्र मरीजों की बोली आसानी समझ सके। इससे इलाज में मदद मिलेगी। यही नहीं मरीजों व डॉक्टरों के बीच अच्छी बांडिंग भी होती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।....हिंदी माध्यम से पढ़ाई में ये दिक्कतें- किताबें गिनती की, जो ज्यादा उपयोगी नहीं।- पीजी कोर्स में पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में ही।- देश-दुनिया में ज्यादातर मेडिकल लिटरेचर अंग्रेजी में।- परीक्षा संचालन में भी समस्या, फैकल्टी नहीं हिंदी के।(जैसाकि रिटायर्ड डीन डॉ. सीके शुक्ला व सीनियर फैकल्टी डॉ. मानिक चटर्जी ने बताया।)टाॅपिक एक्सपर्ट अगर छात्र हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई करता है तो पीजी की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से ही करनी पड़ेगी।

देश-दुनिया में पीजी में कहीं भी हिंदी माध्यम में पढ़ाई नहीं होती। इसलिए छात्र भी हिंदी माध्यम की पढ़ाई में रूचि नहीं ले रहे हैं। मेडिकल लिटरेचर की संख्या भी गिनती में है।डॉ. विष्णु दत्त, रिटायर्ड डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन....