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गांव के स्कूल से एनआईटी तक, फिर यूपीएससी फतह… छोटे गांव के लड़के ने एआईआर 452 लाकर रचा इतिहास

UPSC Success Story: रायगढ़ जिले के छोटे से गांव संबलपुरी के किसान पुत्र अजय गुप्ता ने यूपीएससी में एआईआर 452 हासिल कर अपने गांव, परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

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रायपुर

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Khyati Parihar

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ताबीर हुसैन

Mar 13, 2026

किसान पुत्र अजय गुप्ता (फोटो सोर्स- पत्रिका)

किसान पुत्र अजय गुप्ता (फोटो सोर्स- पत्रिका)

UPSC Success Story: रायपुर @ताबीर हुसैन। रायगढ़ जिले के छोटे से गांव संबलपुरी के किसान पुत्र अजय गुप्ता ने यूपीएससी में एआईआर 452 हासिल कर अपने गांव, परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले अजय ने आगे चलकर एनआईटी रायपुर से इंजीनियरिंग की और फिर लंबे संघर्ष, अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर यूपीएससी में सफलता हासिल की। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके संकल्प और निरंतर प्रयास ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादे हों तो छोटे गांव से निकलकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

एनआईटी से पढ़ाई के बाद सिविल सर्विस की तैयारी का फैसला कैसे लिया?

कॉलेज के समय हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए नौकरी करना जरूरी था। लेकिन मन में यह भी था कि सिविल सर्विस में जाना है। इसलिए मैंने पहले एक एनजीओ जॉइन किया, जिससे आर्थिक सहारा भी मिला और समाज के बीच काम करने का अनुभव भी। उसी दौरान तैयारी भी जारी रखी।

इस सफलता के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा किससे मिली?

प्रेरणा मुझे अपने दादाजी से मिली। उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि अगर भगवान ने आपको कोई क्षमता दी है तो उसका उपयोग सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी करना चाहिए।

यूपीएससी की तैयारी के दौरान रोज कितने घंटे पढ़ाई करते थे?

यह एक-दो साल की तैयारी नहीं थी, मैं करीब पांच साल से लगा हुआ था। अलग-अलग समय पर पढ़ाई का समय अलग रहा, लेकिन औसतन आठ से दस घंटे रोज पढ़ाई करता था।

मोबाइल और सोशल मीडिया से कितना दूर रहते थे?

तैयारी के दौरान ज्यादातर समय सोशल मीडिया से दूर रहा। फेसबुक पर मेरी आखिरी पोस्ट भी कई साल पहले की थी। बीच-बीच में जरूरत के हिसाब से मोबाइल का उपयोग करता था, लेकिन पढ़ाई ही प्राथमिकता थी।

जिन युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होती, उन्हें आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

अगर आप मेहनत कर रहे हैं और अपनी पढ़ाई के प्रति ईमानदार हैं, तो रास्ते में बहुत से लोग मदद के लिए सामने आते हैं। स्कूल, कॉलेज और तैयारी के दौरान मुझे भी कई लोगों का आर्थिक और नैतिक सहयोग मिला।