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जब दुनिया में बढ़ रही दूरियां, गजल के सुरों से मोहब्बत का संदेश दे रहे हुसैन ब्रदर्स… पिता और गुरु से मिली सीख

Raipur News: दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, नफरत और बंटवारे की खबरों के बीच मशहूर गजल गायकी की जोड़ी उस्ताद अहमद हुसैन और उस्ताद मोहम्मद हुसैन का मानना है कि इंसानियत की असली पहचान मोहब्बत और तहजीब में है।

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रायपुर

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Khyati Parihar

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ताबीर हुसैन

Mar 13, 2026

जंग और नफरत के दौर में सुर का पैगाम (फोटो सोर्स- पत्रिका)

जंग और नफरत के दौर में सुर का पैगाम (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: रायपुर @ताबीर हुसैन। दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, नफरत और बंटवारे की खबरों के बीच मशहूर गजल गायकी की जोड़ी उस्ताद अहमद हुसैन और उस्ताद मोहम्मद हुसैन का मानना है कि इंसानियत की असली पहचान मोहब्बत और तहजीब में है। रायपुर प्रवास के दौरान पत्रिका से बातचीत में दोनों उस्तादों ने कहा कि संगीत का मकसद केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि दिलों को जोडऩा है। उनके अनुसार जब समाज में दूरियां बढऩे लगें तब कला और सुर इंसान को इंसान से मिलाने का काम करते हैं।

दशकों से गजल गायकी की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाली यह जोड़ी मंच पर जितनी मशहूर है उतनी ही सादगी और आपसी समझ उनके निजी जीवन में भी दिखाई देती है। दोनों उस्ताद बताते हैं कि मंच से दूर जब खामोशी का वक्त मिलता है तब भी उनकी बातचीत का केंद्र संगीत ही रहता है। उस समय वे नई शायरी चुनते हैं, उसे पढ़ते हैं और फिर उसकी धुन और कंपोजीशन पर आपस में मशवरा करते हैं।

CG News: असली कला वही है जो सीधे दिल तक पहुंचे

हुसैन ब्रदर्स ने कहा कि कोई भी गजल या धुन तब तक मुकम्मल नहीं होती जब तक उस पर आपसी चर्चा और समझदारी से काम न किया जाए। एक-दूसरे के सुझाव से ही रचना आगे बढ़ती है और उसी से उसकी खूबसूरती भी निखरती है। संगीत और शायरी के रिश्ते पर बात करते हुए दोनों उस्ताद कहते हैं कि शायरी के भीतर भी एक धुन छुपी होती है। अगर सुर न भी हों, तब भी शायरी की अपनी लय होती है जो आगे चलकर गायकी का रूप ले लेती है। उनके मुताबिक असली कला वही है जो सीधे दिल तक पहुंचे और लोगों के दिलों को आपस में जोड़े।

बदलाव स्वाभाविक लेकिन विरासत को संभालना जरूरी

जयपुर घराने से ताल्लुक रखने वाले दोनों कलाकारों ने पुरानी तहजीब और संस्कृति के बदलते स्वरूप पर भी अपने विचार रखे। उनका कहना है कि पहले त्योहारों और शादियों का अंदाज अलग हुआ करता था। लोग कई दिनों पहले से एक-दूसरे के घर आते-जाते, गाते-बजाते और खुशियां साझा करते थे। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में वह अपनापन कम नजर आता है। उन्होंने कहा कि शहरों का बदलना स्वाभाविक है, लेकिन पुरानी विरासत और संस्कृति को संभालकर रखना भी जरूरी है। जयपुर की पुरानी हवेलियां, गलियां और पिंक सिटी की पहचान केवल इमारतें नहीं बल्कि एक तहजीब का हिस्सा थीं, जिन्हें याद करना आज भी सुकून देता है।

पिता और गुरु से मिली सीख

अपने वालिद और उस्ताद अफजल हुसैन से मिली सीख को याद करते हुए दोनों बताते हैं कि उन्होंने जिंदगी में अनुशासन और तहजीब को सबसे अहम माना। बड़ों का सम्मान, समय की पाबंदी और परिवार के प्रति जिम्मेदारी जैसी बातें उन्होंने अपने घर से ही सीखी हैं। दोनों उस्तादों का मानना है कि अगर समाज में फिर से तहजीब, मोहब्बत और इंसानियत को अहमियत दी जाए तो बहुत सी दूरियां अपने आप खत्म हो सकती हैं। उनके मुताबिक संगीत की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह बिना किसी भाषा और सरहद के सीधे दिलों को जोड़ देता है।