
Maharashtra politics: महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के बाद सभी पार्टियों में तनातनी का माहौल देखने को मिल रहा है। यहां तक कि पहले से गठबंधन बनाकर सरकार चलाने वाली पार्टियों में भी अनबन चल रही है। इसी बीच भाजपा नेता और राज्य मंत्री गणेश नाइक ने ऐसा बयान दिया है, जिसको लेकर और सियासी माहौल गरमा गया है। दरअसल, सोमवार को उन्होंने डिप्टी सीएम एकनाथ का बिना नाम लिए चेतावनी दी कि पार्टी ने रोक रखी है, नहीं तो उनका राजनीति से नामो-निशान खत्म हो जाता।
आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के नेता गणेश नाइक और एकनाथ शिंदे के बीच मुंबई महानगर क्षेत्र, खासकर नवी मुंबई, ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में लंबे समय से राजनीतिक टकराव रहा है। भाजपा और शिंदे की नेतृत्व वाली शिवसेना के महाराष्ट्र और केंद्र में गठबंधन के बावजूद यह विवाद खत्म नहीं हुआ है। हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद नाइक ने महायुति की चुनावी रणनीति पर असंतोष जताया। ठाणे में एक गणेश मंडल का दौरा करते हुए, जिसे शिंदे का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, नाइक ने चेतावनी दी, “अगर भाजपा इजाजत दे दे, तो उनका नाम और अस्तित्व मिट जाएगा। मैं आज इसे दोहरा रहा हूं।” उन्होंने नाम तो नहीं लिया लेकिन संकेत करते हुए कहा कि फिलहाल पार्टी के दबाव हैं क्योंकि अभी पार्टी खुलकर काम नहीं करने दे रही है, अगर पार्टी अनुमति दे दे, तो शिवसेना प्रमुख का राजनीतिक अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
नाइक ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक अनुशासित पार्टी है। “पार्टी की तरफ से जो कहा जाता है, कार्यकर्ताओं को उसे मानना पड़ता है। कई बार पार्टी का फैसला कार्यकर्ताओं के मन मुताबिक नहीं होता है, फिर भी पार्टी की मर्यादा और अनुशासन के लिए चुप रहना पड़ता है।” इसके साथ ही उन्होंने यह कहा कि कोई भी इलाका किसी निजी किला नहीं होता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब वे दूसरी पार्टी में थे, तब नवी मुंबई और मीरा-भायंदर में उनके मेयर थे और ठाणे थोड़े अंतर से हाथ से निकल गया था, लेकिन जिला बैंक और जिला परिषद उनके कब्जे में रहे।
नाइक ने हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों को लेकर महायुति की रणनीति पर असंतोष जताया। उनका कहना था कि सांसद और विधायक नेताओं के होते हैं, लेकिन नगर निगम और परिषदें कार्यकर्ताओं की होती हैं, इसलिए हर पार्टी को अलग-अलग चुनाव लड़ना चाहिए और नतीजों के बाद ज्यादा पार्षद वाली पार्टी को मेयर पद मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि नवी मुंबई में जब सीटों का बंटवारा हो रहा था तो शिवसेना की तरफ से 57 सीटों की मांग की गई थी, लेकिन भाजपा उतनी सीट देने के लिए सहमत नहीं थी और 20-22 सीट देने के लिए तैयार थी। दोनों तरफ से बैठक की गई और उचित निष्कर्ष निकाला गया। भाजपा नेता ने बताया कि अपनी राय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचाई थी, लेकिन उनकी तरफ से उस पर कोई फैसला नहीं किया गया था।
Published on:
26 Jan 2026 07:07 pm
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