
Maharashtra Politics:महाराष्ट्र में हुए महानगरपालिका चुनाव के परिणाम के बाद असुदद्दीन ओवैसी की AIMIM पहले की अपेक्षा और मजबूत होती दिखाई दी है। दरअसल, मुंबई बीएमसी चुनावों के साथ 29 महानगरपालिका चुनावों में ओवैसी की पार्टी को 126 सीटों पर जीत हासिल हुई है। वहीं, इस चुनाव में समाजवादी पार्टी की स्थिति उतनी अच्छी नहीं रही जितनी उम्मीद थी।
पार्टी ने 13 नगर निगमों के 125 वार्डों में जीत हासिल की है, जो पिछले नगर निगम चुनावों में जीते गए 56 वार्डों से काफी ज्यादा है। यह महाराष्ट्र में हैदराबाद स्थित इस पार्टी का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। कई नगर निकायों में एआईएमआईएम ने समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी बड़ी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया। 15 जनवरी को हुए चुनावों में पार्टी ने 29 में से 24 नगर निगमों में अपने उम्मीदवार उतारे थे।
दूसरी ओर, महाराष्ट्र खासकर मुंबई में दशकों पहले मजबूत पकड़ बनाने वाली समाजवादी पार्टी की स्थिति अब कमजोर होती नजर आ रही है। बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) ने 1990 के दशक की शुरुआत में मुंबई और महाराष्ट्र में सक्रिय रूप से कदम रखा था। 1992–93 के मुंबई में दंगा होने के बाद मुस्लिमों के हित की बात करने वाली पहली पार्टी मिली और मुस्लिमों ने सपा पर भरोसा जताया और उस वक्त सपा को मुंबई की राजनीति में एक पहचान मिल गई थी। लेकिन हाल ही में संपन्न हुए 2026 महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनावों (जिसमें मुंबई नगर निगम भी शामिल है) में समाजवादी पार्टी (सपा) को सिर्फ 2 सीटें मिली हैं। यह आंकड़ा बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) समेत पूरे परिणाम के आधार पर सामने आया है।
मालेगांव नासिक जिले का एक शहर है, जहां 78 प्रतिशत से ज्यादा आबादी मुस्लिम है। इस बार के महानगरपालिका चुनाव नतीजों ने खुद को सेक्युलर कहने वाली पार्टियों को भी चौंका दिया है। चुनाव में नई बनी इस्लाम पार्टी ने 35 सीटें जीतीं, उसके साथ गठबंधन में उतरी समाजवादी पार्टी को 5 सीटें मिलीं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने 21 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) को 18, भाजपा को 2 और कांग्रेस को सिर्फ 3 सीटें हासिल हुईं।
सियासी पंडितों का कहना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में सपा के कमजोर पड़ने की एक बड़ी वजह पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच विवाद है। दरअसल, महाराष्ट्र अध्यक्ष अबु आसिम आजमी और पार्टी नेता रईस शेख के बीच नोकझोंक देखने को मिली थी। दोनों के बीच उम्मीदवारों के टिकट और सपा की चुनावी रणनीति को लेकर असंतोष पैदा हो गया था। रईस शेख ने पार्टी अध्यक्ष के फैसलों पर नाराजगी जताई, खासकर उन जगहों पर जहां टिकट बांटे गए थे। कुछ इलाकों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर मतभेद रहे, जिससे सपा को अपने पारंपरिक क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ा। इसी असहमति ने पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह को जन्म दिया।
Updated on:
24 Jan 2026 05:19 pm
Published on:
24 Jan 2026 04:41 pm
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