3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हाईकोर्ट पहुंचा अनुज चौधरी FIR केस, जज के सामने वकील ने कही ये बात, अगली तारीख 9 फरवरी तय

संभल में नवंबर 2024 की हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग में घायल युवक के मामले में कोर्ट के FIR आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

2 min read
Google source verification
20 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश को दी गई चुनौती

20 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश को दी गई चुनौती

Anuj Chaudhary FIR Case Hearing in High Court: संभल में 2024 में हुई हिंसा का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी गई है। मंगलवार को हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई हुई।

क्या है पुरा मामला?

नवंबर 2024 में संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पुलिस फायरिंग में कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत हो गई। एक युवक मोहम्मद आलम को गोली लगी थी। आलम के पिता यामीन ने संभल कोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके बेटे पर गोली चलाई। यामीन ने तत्कालीन सीओ अनुज कुमार चौधरी (अब SSp), पूर्व एसएचओ अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

संभल कोर्ट का आदेश

9 जनवरी 2026 को संभल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की ओर से दी गई रिपोर्ट संदिग्ध है और मेडिकल सबूतों से गोली लगने की पुष्टि होती है। जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आए।

हाईकोर्ट में चुनौती

इस आदेश के खिलाफ अनुज चौधरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। वे चाहते हैं कि CJM के आदेश को रद्द किया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस आदेश को चुनौती दी है। मंगलवार को जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई की। शिकायतकर्ता यामीन की तरफ से वकील ने वकालतनामा दाखिल किया और कोर्ट से ज्यादा समय मांगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 9 फरवरी की तारीख तय कर दी।

क्यों चर्चा में बना यह मामला?

यह मामला संभल हिंसा से जुड़ा है, जिसमें पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। एक तरफ पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस अधिकारी आदेश को रद्द करवाना चाहते हैं। हाईकोर्ट का फैसला इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। आगे की सुनवाई में और सबूतों पर चर्चा होगी। लोग इस मामले को लेकर काफी चर्चा कर रहे हैं।

Story Loader