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Dungarpur News: सागवाड़ा। सागवाड़ा की स्थानीय राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर से निलंबन पर स्थगन आदेश मिलने के बाद नरेंद्र खोड़निया ने पुनः नगरपालिका अध्यक्ष की कुर्सी संभाली।
न्यायालय के इस फैसले से कांग्रेस खेमे में उत्साह देखा गया और कार्यकर्ताओं ने इसे 'सत्य की जीत' करार दिया। वहीं मौजूदा भाजपा के नपाध्यक्ष आशिष गांधी ने बिना मंजूरी के नपाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने को कानूनन गलत बताया।
सोमवार को हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद, बुधवार सुबह करीब 10 बजे नरेंद्र खोड़निया बड़ी संख्या में समर्थकों और पार्षदों के साथ नगरपालिका कार्यालय पहुंचे। समर्थकों ने खोड़निया का स्वागत किया और मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया।
पदभार ग्रहण करने की औपचारिक कार्रवाई के दौरान खोड़निया ने संबंधित पत्रों पर हस्ताक्षर किए, जिन्हें तुरंत निदेशालय, जिला कलक्टर और अन्य संबंधित विभागों को ईमेल के जरिए भेजा गया। उल्लेखनीय है कि इस दौरान राज्य सरकार द्वारा मनोनीत अध्यक्ष आशीष गांधी वहां मौजूद नहीं थे।
कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए खोड़निया ने कहा मेरे खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित थे। मुझे और मेरी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से यह साजिश रची गई थी, लेकिन न्यायालय ने सच्चाई को सामने ला दिया है। उन्होंने शहर की स्वच्छता, नागरिक सुविधाओं के विस्तार और प्रशासन में पारदर्शिता लाने का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर भरत भट्ट, कांग्रेस नगर अध्यक्ष ललित पंचाल, ब्लॉक अध्यक्ष धीरज मेहता, कैलाश रोत, नानुभाई मकवाना, राजुभाई घांची, पार्षद भरत जोशी, वन्दना शाह, सुमन गुप्ता, डायालाल पाटीदार, इस्माइल बिल्ला, शायर घांची, अशोक रोत, गटा भागरिया, जवाहर, लादू गवारिया, दिनेश गुप्ता, गौतम पण्ड्या, लोकेश पाठक, बदामीलाल खोड़निया, संतोष, हिरेन, आदिश खोड़निया, धनपाल भूता, जाकिर , सुरेश जोशी, आकाश शाह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि खोड़निया पर लगाए गए आरोपों में विश्वसनीयता की कमी है। कोर्ट ने माना कि वे गवाहों या रिकॉर्ड को प्रभावित करने की स्थिति में नहीं हैं। इसी के साथ कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे निलंबन रद्द करने के उनके अभ्यावेदन पर निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ तरीके से विचार करें।
हाईकोर्ट ने नरेन्द्र खोड़निया के निलंबन पर रोक लगाई है। उन्हें सीधे ही नगरपालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर न बैठकर राज्य सरकार से आदेश लेते तो अच्छा रहता। बिना स्वीकृति के कुर्सी पर बैठना कानूनन गलत है। नगरपालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का आदेश नहीं मिला है। खोड़निया के अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठना सागवाड़ा की सुन्दरता एवं विकास को नुकसान पहुंचेगा।
खोड़निया ने हाईकोर्ट से निलंबन पर स्थगन के आदेश की प्रति दी। स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया है। जो भी मार्गदर्शन मिलेगा उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
14 Jan 2026 07:30 pm
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