भारत, Jun 06, 2026

जानिए कैसे आपके पसंदीदा स्नैक्स चुपके से बढ़ा रहे हैं मोटापा.(AI Generated)
इस रफ्तार भरी जिंदगी में हम अपनी सेहत को लेकर जितने सजग दिखते हैं, असलियत में उतने हो नहीं पाते। वजन कम करना हो या फिट रहना, हमारा पूरा ध्यान इस बात निर्भर करता है कि हम सुबह के नाश्ते, दोपहर के लंच या रात के डिनर में क्या खा रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन मुख्य मील्स (Meals) के बीच में जो छोटा-मोटा सुधार या 'चटपटी बाइट' हम लेते हैं, वह हमारी पूरी फिटनेस जर्नी को बर्बाद कर सकती है?
स्वास्थ्य और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में हममें से अधिकांश लोग अपनी दैनिक कैलोरी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा (25%) सिर्फ स्नैक्स से प्राप्त करते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन कैलोरीज का एक बड़ा हिस्सा 'हिडन कैलोरीज' (Hidden Calories) होता है यानी वह ऊर्जा जो हमारे शरीर में चली तो जाती है, लेकिन हमें उसका अहसास तक नहीं होता।
आइए इस डॉ. सोनल ढेमला (डायटिशियन) से विस्तार समझते हैं कि यह हिडन कैलोरीज का खेल क्या है, यह हमारी सेहत को कैसे नुकसान पहुंचा रहा है और कैसे हम कुछ छोटे बदलावों से 'स्मार्ट स्नैकिंग' की तरफ बढ़ सकते हैं।
सरल शब्दों में कहें तो वह अनचाही और छिपी हुई कैलोरीज हैं जो उन खाद्य पदार्थों या पेय पदार्थों के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करती हैं, जिन्हें हम आमतौर पर 'हल्का' या 'हेल्दी' समझ लेते हैं। जब हम एक भारी समोसा या पिज्जा खाते हैं, तो हमारा दिमाग सचेत रहता है कि हम कुछ हाई-कैलोरी खा रहे हैं। लेकिन जब हम काम करते समय बिस्कुट का एक छोटा पैकेट, फ्लेवर्ड योगर्ट (दही), डाइट नमकीन या फिर पैकेज्ड फ्रूट जूस पीते हैं, तो हमारा दिमाग इसे एक 'हल्की फुल्की' चीज मानकर छोड़ देता है। यही वह जगह है जहां हम धोखा खा जाते हैं। पैकेज्ड फूड्स को स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उनमें भारी मात्रा में छिपी हुई चीनी (Hidden Sugar), सोडियम और अनहेल्दी फैट्स मिलाए जाते हैं।
सवाल- बाजार में मिलने वाले 'डाइट नमकीन', 'बेक्ड चिप्स' और 'शुगर-फ्री' बिस्कुट के पीछे का सच क्या है? क्या ये वाकई वजन घटाने में मदद करते हैं?
डॉक्टर का जवाब- बाजार में मिलने वाले 'डाइट नमकीन', 'बेक्ड चिप्स' और 'शुगर-फ्री' बिस्कुट का सच अक्सर सिर्फ एक मार्केटिंग खेल है। जब कंपनियां किसी फूड से फैट हटाती हैं या उसे बेक करती हैं, तो उसका स्वाद बनाए रखने के लिए उसमें छिपी हुई चीनी (Hidden Sugar), सोडियम (नमक) और रिफाइंड कार्ब्स (मैदा) की मात्रा बढ़ा देती हैं। नतीजा, इनका कैलोरी काउंट सामान्य स्नैक्स के लगभग बराबर ही रहता है। 'शुगर-फ्री' बिस्कुट में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स होते हैं, जो भूख बढ़ाते हैं। इसलिए, ये वजन घटाने में बिल्कुल मदद नहीं करते, बल्कि 'हेल्दी' समझकर इन्हें ज्यादा खाने से वजन और बढ़ जाता है।
सवाल- 100% नेचुरल फ्रूट जूस के डिब्बे और असली फल खाने में कैलोरी और पोषण के लिहाज से कितना बड़ा अंतर होता है?
डॉक्टर का जवाब- डिब्बाबंद "100% नेचुरल जूस" और असली फल में कैलोरी और पोषण का जमीन-आसमान का अंतर है। जब फल का जूस निकाला जाता है, तो उसका सबसे जरूरी तत्व यानी फाइबर पूरी तरह खत्म हो जाता है। हमेशा जूस पीने के बजाय साबुत फल (Whole Fruit) खाने को प्राथमिकता दें, क्योंकि जूस निकालते समय फलों का सबसे जरूरी हिस्सा यानी 'फाइबर' और कई महत्वपूर्ण विटामिन्स नष्ट हो जाते हैं। फाइबर न होने से जूस की नेचुरल शुगर शरीर में बहुत तेजी से एब्जॉर्ब होती है, जिससे ब्लड शुगर स्पाइक करता है और कैलोरी सीधे फैट में बदलती है। साथ ही, एक गिलास जूस बनाने में 3-4 फल लग जाते हैं, जिससे आप अनजाने में दोगुनी-तिगुनी कैलोरी पी जाते हैं। इसके अलावा मधुमेह (Diabetes) के मरीजों के लिए तो पैकेट बंद या बिना फाइबर वाला जूस कभी भी सुरक्षित नहीं माना जाता। इसलिए जूस के बजाय हमेशा ताजे, प्राकृतिक और मौसमी फलों (Seasonal Fruits) को चबाकर खाने की आदत डालें।
सवाल- क्या पारंपरिक भारतीय खाना (जैसे दाल-चावल-सब्जी-रोटी) वजन घटाने के लिए पर्याप्त है, या इसके साथ सप्लीमेंट्स की भी जरूरत होती है?
डॉक्टर का जवाब- पारंपरिक भारतीय खाना (दाल-चावल, सब्जी-रोटी) वजन घटाने के लिए पूरी तरह पर्याप्त और संतुलित है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर और विटामिन्स का बेहतरीन मिश्रण होता है। वजन घटाने का असली फॉर्मूला 'पोर्शन कंट्रोल' (Portion Control) और पकाने का तरीका है। यदि आप रोटी-चावल की मात्रा नियंत्रित रखें, हरी सब्जियां और दालें (प्रोटीन) ज्यादा लें और तेल-घी का सीमित इस्तेमाल करें, तो किसी सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ती। सप्लीमेंट्स की आवश्यकता केवल तब होती है जब मेडिकल टेस्ट में विटामिन B12, D3 या आयरन जैसी किसी खास माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी (Deficiency) पाई जाए। फिट रहने के लिए घर का खाना ही सर्वश्रेष्ठ है।
सवाल- भारतीय घरों में शाम की चाय के साथ कुछ न कुछ स्नैक्स (मठरी, बिस्कुट, मिक्चर) खाने की आदत है। इस आदत को बदले बिना हम इसे 'हेल्दी स्वाप' कैसे दे सकते हैं?
डॉक्टर का जवाब- भारतीय घरों में शाम की चाय का वक्त बेहद खास होता है, लेकिन इसके साथ परोसे जाने वाले बिस्कुट और मठरी सेहत के सही नहीं हैं, जिनमें भारी मात्रा में कैलोरी और मैदा होता है। अगर आप वजन और सेहत को लेकर सजग हैं, तो चाय की इस आदत को बदले बिना बस इनके अस्वस्थ विकल्पों से बदलें।
सवाल- रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोगों (नाइट शिफ्ट एम्प्लॉइज) का डाइट चार्ट कैसा होना चाहिए, क्योंकि उनका स्लीपिंग पैटर्न अलग होता है?
डॉक्टर का जवाब- नाइट शिफ्ट एम्प्लॉइज़ का डाइट चार्ट हल्का और गैस्ट्रिक समस्याओं से बचाने वाला होना चाहिए, क्योंकि रात में हमारा मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।
सवाल- 'माइंडलेस ईटिंग' (स्क्रीन देखते हुए खाना) से बचने के लिए आप क्या मनोवैज्ञानिक टिप्स देंगे?
डॉक्टर का जवाब-
सवाल- आजकल 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' (Intermittent Fasting) और 'कीटो डाइट' बहुत ट्रेंड में हैं। क्या ये हर किसी के लिए सुरक्षित हैं?
डॉक्टर का जवाब- किसी भी डाइट प्लान को शुरू करने से पहले, सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि आप किस तरह की डाइट फॉलो करना चाहते हैं। 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' और 'कीटो डाइट' हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं हैं। यह एक 'क्रैश लाइफस्टाइल' है, जो हर शरीर पर अलग असर करती है। कीटो डाइट में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम और फैट ज्यादा होता है, जिससे किडनी, लिवर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या वाले लोगों को नुकसान हो सकता है। वहीं, इंटरमिटेंट फास्टिंग में लंबे समय तक भूखा रहना पड़ता है, जो एसिडिटी, टाइप-1 डायबिटीज और ईटिंग डिसऑर्डर के मरीजों के लिए खतरनाक है। यह डाइट गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए बिल्कुल नहीं है। इसे बिना डॉक्टरी सलाह के कभी शुरू नहीं करना चाहिए।
सवाल- आजकल बच्चों में मोटापा (Childhood Obesity) बढ़ रहा है। माताओं के लिए बच्चों की टिफिन और शाम के नाश्ते को 'नो-फायर, नो-नाइफ' और हेल्दी बनाने के क्या विकल्प हैं?
डॉक्टर का जवाब- आजकल बच्चों में बढ़ते मोटापे का एक बड़ा कारण घटती शारीरिक सक्रियता (Physical Activity) और बढ़ता स्क्रीन टाइम है, जो उन्हें 'माइंडलेस ओवरईटिंग' की तरफ धकेलता है। हम जाने-अनजाने बच्चों को चॉकलेट, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड सौंप रहे हैं। ये अनहेल्दी स्नैक्स कैलोरी में तो बहुत हाई होते हैं, लेकिन इनमें पोषण शून्य होता है। समस्या तब और बढ़ जाती है जब बच्चे शाम को ये भारी स्नैक्स खा लेते हैं और फिर रात को घर का बना हेल्दी डिनर नहीं खा पाते । यह बच्चों के लिए 'डबल लॉस' (दोहरा नुकसान) है। माताओं को चाहिए कि वे बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें, उन्हें अनहेल्दी स्नैक्स देना बंद करें और शाम के वक्त पैकेट बंद चीजों की जगह हेल्दी चीला या हल्के रोस्टेड नट्स जैसे पौष्टिक विकल्प दें।
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Published on: 06 Jun 2026 06:08 pm

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