भारत, Jun 06, 2026

प्रवासी मछलियों पर सबसे बड़ा संकट (photo,AI)
Migratory Species: आसमान में हजारों किलोमीटर उड़ने वाले पक्षी गायब हो रहे हैं। समुद्रों में लंबी यात्राएं करने वाली व्हेल और कछुए कम होने लगें और नदियों में लौटने वाली मछलियां का रास्ता ही बदल रहा है। दुनिया के सामने बहुत बड़ा संकट है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज (CMS) की वैश्विक रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि पृथ्वी की कई प्रवासी प्रजातियां तेजी से विलुप्ति की ओर बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 1,189 सूचीबद्ध प्रवासी प्रजातियों में से 260 अब अस्तित्व के संकट में हैं। मछलियों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बन चुकी है। अभी बड़े कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर केवल वन्यजीवों पर नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, कृषि और पूरी पारिस्थितिकी व्यवस्था पर पड़ेगा।
हर साल भोजन और प्रजनन की तलाश में अरबों जीव महाद्वीपों और महासागरों को पार करते हुए हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं, जिससे प्रकृति के अलग-अलग हिस्से आपस में जुड़े रहते हैं और पर्यावरण का संतुलन बना रहता है। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रवासी जीवों का भविष्य अब गंभीर खतरे में है। हर पांच में से एक प्रवासी प्रजाति अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।
1,189 प्रवासी प्रजातियों में से 260 प्रजातियां सीधे तौर पर विलुप्ति की कगार पर हैं, जिनमें से 68 प्रजातियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered), 78 प्रजातियां संकटग्रस्त (Endangered) और 114 प्रजातियां असुरक्षित (Vulnerable) श्रेणी में शामिल हैं। इसके अलावा 98 अन्य प्रजातियां भी ऐसी हैं जो निकट भविष्य में खतरे की श्रेणी में पहुंच सकती हैं। 44% प्रजातियों की आबादी में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 1,189 प्रवासी प्रजातियों में से 520 प्रजातियों की आबादी लगातार घट रही है। केवल 154 प्रजातियों की संख्या बढ़ रही हैं। वहीं 380 प्रजातियों की आबादी फिलहाल स्थिर बनी हुई है। इसके अलावा करीब 150 प्रजातियों के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। किसी प्रजाति की संख्या में लंबे समय तक गिरावट जारी रहने पर उसके विलुप्त होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
प्रवासी मछलियों एक जगह से दूसरी जगह जाने वाली मछलियां की हालत सबसे ज्यादा खराब है और इनमें से करीब 97% मछलियां खत्म होने की कगार पर हैं। स्टर्जन, शार्क, रे और सॉ-फिश जैसी कई प्रजातियों की संख्या बहुत तेजी से घट रही है, जिनमें से 28 प्रजातियां तो बेहद गंभीर संकट में हैं। इन बेजुबान जीवों की इस हालत के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार हम इंसान ही हैं, क्योंकि नदियों पर बनने वाले बांध, बढ़ता जल प्रदूषण, जरूरत से ज्यादा मछलियां पकड़ना और समुद्री व्यापार इनके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट (CMS Appendix-I) के मुताबिक, जिन जीवों को सबसे ज्यादा बचाने की जरूरत है। इस सूची में शामिल हर 10 में से 8 प्रजातियों लगभग 82% पर पूरी तरह से विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। 76% जीवों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। केवल 12% जीव ही ऐसे हैं, जिनकी आबादी में थोड़ा सुधार हुआ है। आंकड़े बताते है कि दुनिया भर में जीवों को बचाने की तमाम कोशिशों के बाद भी हालात बहुत गंभीर बने हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 1988 से 2020 के बीच के आंकड़े पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए काफी चिंताजनक हैं। इस दौरान जहां सिर्फ 14 प्रजातियों की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ, वहीं 70 प्रजातियां और ज्यादा खतरे में आ गईं। इसका मतलब यह है कि जितने जीवों को बचाने में हमें कामयाबी मिली, उससे पांच गुना ज्यादा जीव लुप्त होने की कगार पर पहुंच गए, जो प्रकृति के बिगड़ते संतुलन को दिखाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1970 से 2017 के बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में प्रवासी जीवों एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले जीव-जंतुओं की संख्या में काफी बदलाव आया है। इनमें सबसे बुरी स्थिति एशिया की रही, जहां उनकी आबादी में 66% की भारी गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण तेजी से बढ़ता शहरीकरण, कंस्ट्रक्शन के काम और जलवायु परिवर्तन हैं। इसके अलावा ओशिनिया में 37% और अफ्रीका में 27% की कमी दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, कुछ इलाकों में इनकी संख्या बढ़ी भी है, जैसे दक्षिण अमेरिका में 90% और यूरोप में 62% की बढ़ोतरी देखी गई, और उत्तरी अमेरिका में 13% के मामूली सुधार के साथ स्थिति लगभग सामान्य रही।
एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करने वाले जीवों के रहने और रुकने की जगहें भारी संकट में हैं। इन जीवों के लिए जरूरी 58% इलाकों पर इंसानी गतिविधियों का बुरा असर पड़ रहा है इनमें से केवल 49% क्षेत्रों को ही कानूनी सुरक्षा या संरक्षण मिला हुआ है और हजारों जरुरी इलाके आज भी पूरी तरह असुरक्षित हैं। इन बेजुबान जीवों के लिए सिर्फ उनकी मंजिल ही नहीं, बल्कि सफर का पूरा रास्ता खतरनाक और असुरक्षित है।
प्रवासी जीवों के गायब होने से इंसानों का भविष्य पूरी तरह खतरे में पड़ जाएगा। जीव सिर्फ धरती की खूबसूरती नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण को जिंदा रखने वाली रीढ़ की हड्डी हैं। अगर ये खत्म हो गए, तो महाद्वीपों और समुद्रों के बीच जरूरी पोषक तत्वों का आना-जाना बंद हो जाएगा, जिससे जमीन बंजर होने लगेगी। पक्षियों और जानवरों के न रहने से बीजों का फैलना रुक जाएगा, जिससे नए जंगल और वनस्पतियां उगना बंद हो जाएंगी। साथ ही, फसलों को बर्बाद करने वाले कीड़ों को खाने वाला कोई नहीं बचेगा, जिससे पूरी दुनिया में अकाल और भुखमरी फैल जाएगी और इको-टूरिज्म खत्म होने से करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। इन बेजुबान जीवों का अंत सीधे तौर पर मानव सभ्यता के विनाश का कारण बनेगा।
भारत दुनिया के उन प्रमुख रास्तों में से एक है, जहां से हर साल सर्दियों में साइबेरिया, मंगोलिया और मध्य एशिया के बर्फीले इलाकों से लाखों प्रवासी पक्षी आते हैं। पक्षी हमारे देश के तालाबों, झीलों और गीली जमीनों को अपना अस्थाई घर बनाते हैं। लेकिन आज हमारे यहां तेजी से सूखते तालाब, नदियों का बढ़ता प्रदूषण और शहरों का फैलाव इन बेजुबान मेहमानों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। दुनिया के इन खूबसूरत जीवों को सुरक्षित करना और पर्यावरण को बचाना भारत की एक बहुत बड़ी वैश्विक जिम्मेदारी है।
विकास परियोजनाओं और इंसानी तरक्की के कारण वन्यजीवों का जीवन भारी खतरे में है। जंगलों की कटाई, शहरीकरण और खेती के विस्तार से जानवरों के रहने के ठिकाने उजड़ रहे हैं और उनका अत्यधिक शिकार भी हो रहा है। इसके अलावा, सीमाओं पर लगी बाड़ और दीवारें उनके प्राकृतिक रास्तों को रोकती हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाले हाईवे और रेलवे ट्रैक पर गाड़ियों की चपेट में आकर हर साल हजारों बेजुबान जान गंवाते हैं। शहरों का प्रकाश प्रदूषण रात में उड़ने वाले प्रवासी पक्षियों को भ्रमित कर देता है, जिससे वे रास्ता भटककर इमारतों से टकरा जाते हैं और अपनी जान खो देते हैं।
दुनिया भर में करोड़ों सालों से लंबी यात्राएं करने वाले प्रवासी जीव और मछलियां आज भारी संकट में हैं। एशिया सहित पूरी दुनिया में इनकी आबादी तेजी से घट रही है, जो इंसानों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। ये जीव केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने वाली अहम कड़ी हैं। हमने इन्हें बचाने के लिए अभी कोई कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले संकट से निकलना मुस्किल हो जायेगा।
Updated on: 05 Jun 2026 06:09 pm

कोई कमेंट नहीं है।
पहले कमेंट करने वाले बनें।