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भारत, Jun 04, 2026

Tyler Andrews : 6 साल की उम्र में कैंसर, अब 36 की उम्र में माउंट एवरेस्ट पर रचा इतिहास; और भी 6 रिकॉर्ड हैं दर्ज

Tyler Andrews Everest Record: अमेरिका के पर्वतारोही टायलर एंड्रयूज ने माउंट एवरेस्ट पर सबसे तेज चढ़ाई का नया विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया। इससे पहले भी कई रिकॉर्ड बना चुके हैं। आइए, पूरी कहानी पढ़ते हैं।

Tyler Andrews Everest Record, Mount Everest Speed Climbing Record

दुनिया की सबसे तेज एवरेस्ट चढ़ाई (instagram, टायलर एंड्रयूज )

Tyler Andrews Everest Record: बचपन में अस्पताल के बिस्तर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जिंदगी की जंग लड़ने वाले एक बच्चे ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर नया इतिहास रच दिया है। अमेरिका के 36 वर्षीय एंड्योरेंस एथलीट और मशहूर पर्वतारोही टायलर एंड्रयूज (Tyler Andrews) ने माउंट एवरेस्ट पर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। टायलर ने नेपाल के दक्षिणी बेस कैंप से एवरेस्ट के शिखर तक की खड़ी चढ़ाई केवल 9 घंटे 55 मिनट में पूरी करके 23 साल पुराना विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। गंभीर बीमारी को मात देकर कामयाबी के इस शिखर तक पहुंचने का उनका यह सफर सिर्फ रिकॉर्ड मात्र नहीं है, बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए कभी न हार मानने वाले हौसले और अटूट इच्छाशक्ति की सबसे बड़ी मिसाल बन गया है।

कैंसर को हराकर एवरेस्ट पर जीत

अमेरिका के रहने वाले एंड्योरेंस एथलीट टायलर एंड्रयूज ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट 8,848.86 मीटर पर सबसे तेजी से चढ़ने का एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। जहां हवा में ऑक्सीजन सिर्फ 30% बचती है। टायलर एंड्रयूज ने नेपाल की तरफ बने दक्षिणी बेस कैंप से एवरेस्ट के शिखर तक की केवल 9 घंटे 55 मिनट में पूरा कर लिया। इस कामयाबी के साथ वह स्थानीय शेरपा गाइडों के अलावा, दुनिया के पहले ऐसे विदेशी जो सबसे काम समय में पहाड़ चढ़ने वाले बन गए हैं। टायलर एंड्रयूज कहानी दुनिया भर के लाखों लोगों को अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर उम्मीद और हिम्मत देने वाली मिसाल है।

23 साल का टूटा रिकॉर्ड

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सबसे तेज चढ़ाई करने का रिकॉर्ड लंबे समय तक नेपाल के पर्वतारोही ल्हाक्पा गेलु शेरपा के नाम दर्ज था। उन्होंने साल 2003 में यह बेहद मुश्किल चढ़ाई मात्र 10 घंटे 56 मिनट में पूरी की थी। करीब 23 सालों तक दुनिया का कोई भी पहाड़ चढ़ने वाले उनके इस समय को चुनौती नहीं दे पाया और यह रिकॉर्ड कायम रहा। लेकिन टायलर एंड्रयूज ने इस पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। टायलर ने ल्हाक्पा गेलु शेरपा के समय के मुकाबले 1 घंटे से भी ज्यादा की बचत करते हुए, एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचने का यह नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

एवरेस्ट पर सबसे तेज चढ़ाई के प्रमुख रिकॉर्ड

पर्वतारोहीवर्षसमय
टायलर एंड्रयूज20269 घंटे 55 मिनट
ल्हाक्पा गेलु शेरपा200310 घंटे 56 मिनट
पेम्बा दोर्जे शेरपा200312 घंटे 45 मिनट
फुंजो झांगमु लामा (महिला)202414 घंटे 31 मिनट
बाबू चिरी शेरपा200016 घंटे 56 मिनट
काजी शेरपा (बिना ऑक्सीजन)199820 घंटे 24 मिनट

6 साल की उम्र में जिंदगी पर मंडराया था खतरा

दुनिया भर में एथलीट टायलर एंड्रयूज की चर्चा हो रही है, उनका बचपन बहुत सी कठिनाइयों से भरा था। टायलर एंड्रयूज का जन्म 4 मई 1990 को अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य के उपनगरीय इलाके में हुआ था। टायलर एंड्रयूज जब 6 साल के थे, तब डॉक्टरों को पता चला कि उन्हें एप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia) नाम की एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में शरीर में जरूरी खून नहीं बन पाता। ठीक होने के लिए उन्हें कई बार कीमोथेरेपी जैसे कठिन इलाज से गुजरना पड़ा। लेकिन अपने परिवार और डॉक्टरों की लगातार कोशिशों से वह धीरे-धीरे ठीक हो गए और एक सामान्य जीवन जीने लगे। बचपन के इसी संघर्ष ने उनके अंदर वह पक्का इरादा और हिम्मत पैदा की, जिसने आगे चलकर उन्हें दुनिया की सबसे ऊंची और कठिन चोटियों को पार करने की ताकत दी।

कैसे पूरी हुई एवरेस्ट की चढ़ाई?

  • चढ़ाई शुरुआत शाम को 7:11 बजे शुरू हुई थी।
  • पूरी रात चढ़ाई करने के बाद, अगली सुबह 5:06 बजे टीम एवरेस्ट के शिखर पर पहुंच ।
  • बेस कैंप से शिखर तक पहुंचने में 9 घंटे 55 मिनट का समय लगा।
  • टायलर एंड्रयूज ने लगभग 14 किलोमीटर की दूरी तय की।
  • इस सफर में नीचे से ऊपर की तरफ करीब 3,500 मीटर की खड़ी चढ़ाई पूरी की गई।

चढ़ाई के दौरान टायलर एंड्रयूज ने कई खतरनाक पड़ाव

  • खुंबू आइसफॉल (Khumbu Icefall)खुम्बू आइसफॉल माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप के ठीक ऊपर स्थित एक बेहद खतरनाक और बर्फीला रास्ता है। यह समुद्र तल से करीब 5,364 से 6,065 मीटर की ऊंचाई पर है और लगभग 3 किलोमीटर लंबा है। इस रास्ते पर बर्फ लगातार खिसकती रहती है । यहां गहरी खाइयां और बर्फ के बड़े-बड़े टावर बन जाते हैं। इसी वजह से एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पर्वतारोहियों के लिए इसे पार करना सबसे मुश्किल और जानलेवा माना जाता है।
  • वेस्टर्न कुम (Western Cwm )वेस्टर्न कुम खुम्बू आइसफॉल को पार करने के बाद आने वाला एक विशाल और बर्फीला मैदान है, जो करीब 4 से 5 किलोमीटर लंबा है। यह क्षेत्र 6,000 मीटर से भी ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित है। चारों तरफ से ऊंची-ऊंची पहाड़ियों और चोटियों से घिरे होने के कारण, यहां सूरज की सीधी धूप पड़ती है जिससे पर्वतारोहियों को बहुत ज्यादा गर्मी का अहसास होता है।
  • ल्होत्से फेस (Lhotse Face)ल्होत्से फेस वेस्टर्न कूम के ठीक बाद शुरू होने वाली बर्फ की एक बहुत खड़ी और सीधी दीवार है। करीब 2 से 3 किलोमीटर लंबे इस रास्ते पर पर्वतारोहियों को 40 से 50 डिग्री की बेहद मुश्किल ढलान पर सीधे ऊपर चढ़ना पड़ता है।इसी वजह से एवरेस्ट की पूरी चढ़ाई के सबसे कठिन और थका देने वाले हिस्सों में से एक माना जाता है।
  • साउथ कोल (South कोल)साउथ कोल एवरेस्ट की चढ़ाई का आखिरी और हाई कैंप है, जो करीब 7,900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पहुंचने के बाद पर्वतारोही एवरेस्ट की मुख्य चोटी पर पहुंचने की अपनी अंतिम तैयारी करते हैं। यहां चलने वाली बहुत तेज हवाएं और ऑक्सीजन की भारी कमी इस जगह को बेहद खतरनाक और चुनौतीपूर्ण बना देती हैं।
  • डेथ जोन (Death Zone)डेथ जोन एवरेस्ट पर 8,000 मीटर से ऊपर के बेहद खतरनाक इलाके को कहा जाता है। यहां हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम हो जाती है सामान्य से सिर्फ एक तिहाई। एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने से पहले पर्वतारोहियों को इसी हिस्से से गुजरना पड़ता है। ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण इंसान का शरीर ज्यादा देर तक सही तरीके से काम नहीं कर पाता और जान का खतरा हमेशा बना रहता है।

पहले भी कई चोटियों पर बना चुके हैं रिकॉर्ड

एवरेस्ट पर नया इतिहास रचने से पहले भी टायलर एंड्रयूज दुनिया की कई प्रतिष्ठित चोटियों पर स्पीड क्लाइम्बिंग के रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। ऊंचे पहाड़ों पर तेज गति से चढ़ाई करने की उनकी क्षमता ने उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन एंड्योरेंस एथलीट्स और पर्वतारोहियों में शामिल किया है।

  • मनास्लु (नेपाल) - दुनिया की आठवीं सबसे ऊंची चोटी पर तेज चढ़ाई का रिकॉर्ड।
  • अमा डबलम (नेपाल) - तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण मानी जाने वाली इस चोटी पर भी रिकॉर्ड समय में आरोहण।
  • किलिमंजारो (तंजानिया) - अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी पर स्पीड क्लाइम्बिंग उपलब्धि।
  • एकोंकागुआ (अर्जेंटीना) - दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी पर रिकॉर्ड प्रदर्शन।
  • ओहोस डेल सालाडो (चिली) - दुनिया के सबसे ऊंचे सक्रिय ज्वालामुखी पर तेज चढ़ाई का रिकॉर्ड।
  • कोटोपैक्सी (इक्वाडोर) - दक्षिण अमेरिका की मशहूर ज्वालामुखी चोटी पर तेज चढ़ाई का रिकॉर्ड।
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