
Photo- Patrika
Barmer Politics: राजस्थान के आखिर छोर पर बसा बाड़मेर अब राज्य की राजनीति के केन्द्र में आ रहा है। कांग्रेस रेगिस्तान से राजनीति का गुबार उठा रही है तो भाजपा का ध्यान भी अब यहां केन्द्रित हो गया है।
प्रदेश में बाड़मेर और बालोतरा जिले की सीमाओं का पुनर्गठन होने से राजनीति और गर्मा गई है। हाशिए पर रहने वाला बाड़मेर वर्ष 2014 से लगातार अब राजस्थान की राजनीति के लिए विशेष होने लग गया है।
पश्चिमी राजस्थान में बाड़मेर जिला कांग्रेस का गढ़ रहा है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बाड़मेर-जैसलमेर की 9 सीटों पर पूरा ध्यान रखते रहे। अब इसी गढ़ में सचिन पायलट ने अपनी पूरी टीम तैयार कर ली है।
जिला पुनर्गठन को लेकर उपजे विवाद बाद प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली, सचिन पायलट बाड़मेर के धोरीमन्ना में हुई 'जन आक्रोश रैली' में पहुंचे।
पायलट ने हेमाराम चौधरी को चाचा और खुद को उनका भतीजा बताकर यह संकेत दे दिया कि अब वे इस इलाके से पूरी तरह से जुड़ गए हैं।
इस दौरान गहलोत की अनुपस्थिति ने नई चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कहीं यह आलाकमान की पायलट को आगे करने की रणनीति का हिस्सा तो नहीं है?
कभी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बहुत करीबी रहे हरीश चौधरी भी अब पायलट के साथ खड़े हो गए हैं। ऐसे में अब यह नई टीम बाड़मेर से राजनीति के नए गुबार को तैयार कर रही है। इसमें कांग्रेस की नई टीम भी है।
कांग्रेस में अमीनखां और मेवाराम जैन खुलकर एक गुट में है। इनको अब तक बड़ा समर्थन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का रहा है।
वहीं हरीश चौधरी भी अपना पूरा जोर लगा रहे हैं। बीते दिनों जैसलमेर में फकीर परिवार और पूर्व विधायक रूपाराम धनदे के बीच में हुआ समझौता इसका उदाहरण है।
भाजपा के लिए भी सुदूर बाड़मेर की राजनीति अब अहम हो गई है। राज्यमंत्री के. के. विश्नोई के क्षेत्र को नए जिले बालोतरा में शामिल करने का निर्णय लिया गया है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी की विधानसभा को दो हिस्सों में कर भाजपा ने यहां बड़ी राजनीति खेल दी।
हरीश चौधरी जहां कांग्रेस के नए समीकरण गढ़ने में लगे हैं, सरकार यहां उनको ही निशाने पर लिए हुए है।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जसवंत सिंह जसोल को टिकट नहीं दिया तो बाड़मेर देश की राजनीति में चर्चा में रहा। कर्नल सोनाराम चौधरी कांग्रेस से आकर चुनाव लड़े। यहां मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और जसवंत सिंह की मूंछ की लड़ाई चर्चा में रही
2019 में मानवेन्द्र सिंह कांग्रेस में चले गए और उन्होंने सांसद का चुनाव लड़ा, हरीश चौधरी लोकसभा चुनाव नहीं लड़े। कैलाश चौधरी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर ली। मानवेन्द्र के कांग्रेस से लड़ने से यह चुनाव चर्चा में रहा।
2024 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय रविन्द्र सिंह भाटी ने ताल ठोक दी और उधर रालोपा से कांग्रेस में आए उम्मेदाराम बेनीवाल को कांग्रेस ने उम्मीदवार बना दिया।
केन्द्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी को करारी शिकस्त मिली और कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल ने जीत का परचम लहराया। यह चुनाव देशभर में चर्चा में रहा।
Updated on:
17 Jan 2026 07:34 pm
Published on:
17 Jan 2026 07:22 pm
बड़ी खबरें
View AllPatrika Special News
ट्रेंडिंग
