
निगरानी की गिरफ्त में असिस्टेंट डायरेक्टर और रिश्वत की रकम (फोटो- SVU)
Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सीनियर अधिकारी को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। नियोजन भवन में पदस्थापित असिस्टेंट डायरेक्टर परमजय सिंह को विजिलेंस की ट्रैप टीम ने उस वक्त दबोचा, जब वह अपनी कार के अंदर 5 लाख रुपये की रिश्वत ले रहे थे। यह रकम 26 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के लिए जारी 1 करोड़ 70 लाख 30 हजार रुपये की राशि रिलीज कराने के बदले मांगी गई थी।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के मुताबिक, असिस्टेंट डायरेक्टर परमजय सिंह ने कुल 10 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। तय सौदे के अनुसार पहली किस्त के तौर पर 5 लाख रुपये दिए जाने थे। शुक्रवार को नियोजन भवन के नीचे स्थित पार्किंग में खड़ी अपनी कार में वह यह रकम ले रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए निगरानी की ट्रैप टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। मौके से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई।
इस पूरे मामले की शिकायत डिप्टी डायरेक्टर ओमप्रकाश ने विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो में की थी। शिकायत में कहा गया था कि 26 ITI संस्थानों के उपकरण और ऑफिस खर्च के लिए 1.70 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, लेकिन असिस्टेंट डायरेक्टर संबंधित संस्थानों को फंड जारी करने के लिए मोटी रिश्वत मांग रहे थे। शुरुआती जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद, विजिलेंस टीम ने जाल बिछाने की योजना बनाई।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के डीएसपी पवन कुमार ने कहा, “हमें सूचना मिली थी कि नियोजन भवन की पार्किंग में कार के भीतर 5 लाख रुपये की रिश्वत ली जाने वाली है। इसी आधार पर ट्रैप टीम गठित की गई। जैसे ही पैसे का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर कार्रवाई कर सहायक निदेशक परमजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया। मामले की विस्तृत जांच जारी है।”
शिकायतकर्ता ओमप्रकाश का आरोप है कि सहायक निदेशक परमजय सिंह ने उनसे कहा था कि यह रिश्वत निदेशक सुनील कुमार-1 के कहने पर मांगी जा रही है और सभी संस्थानों से 10 लाख रुपये वसूले जाने हैं। ओमप्रकाश ने रिश्वत देने से इनकार किया और पूरे मामले की जानकारी निगरानी विभाग को दी।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को निगरानी ब्यूरो के मुख्यालय ले जाया गया है, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। विजिलेंस टीम संबंधित फाइलों, भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और संभावित अन्य लेन-देन की भी जांच कर रही है। यह भी खंगाला जा रहा है कि क्या इससे पहले भी इसी तरह की अवैध वसूली की गई थी।
गिरफ्तारी के बाद परमजय सिंह ने विभाग पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि नियोजन भवन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 80 करोड़ रुपये के एक टेंडर को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये का कर दिया गया। उनका कहना है कि जून 2025 में जब वे वहां आए तो उन्होंने कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी, इसी वजह से साजिश के तहत उन्हें फंसाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने CMO, PMO और निगरानी विभाग को पहले ही शिकायतें भेजी थीं।
इस कार्रवाई के बाद, विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल, जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि 2025 में भ्रष्टाचार के खिलाफ कुल 122 FIR दर्ज की गईं, जो पिछले 25 सालों में दर्ज 72 मामलों से डेढ़ गुना ज़्यादा है। इस बार, 2026 में, विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की टीम अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ेगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ पीड़ितों द्वारा मिली शिकायतों पर जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी के आधार पर कार्रवाई की गई।
गंगवार ने बताया कि पिछले सालों की तुलना में, जनवरी 2026 में, ट्रैप टीम ने 85,000 रुपये बरामद किए और मिली 11 शिकायतों के आधार पर भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों को गिरफ्तार किया।
Updated on:
06 Feb 2026 04:31 pm
Published on:
06 Feb 2026 04:30 pm
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