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‘CBI-इंटरपोल जांच का जिक्र, फिर भी क्यों…’ अपनी ही सरकार पर बरसे BJP विधायक

बिहार विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बैकुंठपुर के MLA मिथिलेश तिवारी ने खेल विभाग के अधिकारियों के काम करने के तरीके पर कड़े सवाल उठाए, जिसका जवाब खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने दिया।

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पटना

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Anand Shekhar

Feb 10, 2026

बिहार विधानसभा

खेल मंत्री श्रेयसी सिंह और भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी

बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान मंगलवार को भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने खेल मंत्री और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी श्रेयसी सिंह को घेरते हुए अधिकारियों पर कैबिनेट को गुमराह करने और सरकार की छवि खराब करने के गंभीर आरोप लगाए। मामला बिहार में होने वाले महिला कबड्डी वर्ल्ड कप की मेजबानी और उससे जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बैकुंठपुर विधायक मिथिलेश तिवारी ने खेल विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था और सीबीआई-इंटरपोल जैसी एजेंसियों के जांच के आदेश थे, तब भी अधिकारियों ने आनन-फानन में कैबिनेट से मंजूरी क्यों दिलाई और एमओयू (MoU) साइन क्यों किया?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी MoU क्यों?

मिथिलेश तिवारी ने सदन के पटल पर कोर्ट के आदेशों और कैबिनेट के एजेंडे की कॉपियां लहराते हुए कहा कि कबड्डी फेडरेशन पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं। 31 जनवरी 2025 को मामला रजिस्टर हुआ और 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसमें सीबीआई और इंटरपोल से जांच की सलाह दी थी। तिवारी ने सवाल किया कि जिस दिन (4 फरवरी) सुप्रीम कोर्ट का आदेश आता है, उसी दिन कैबिनेट के एजेंडा नंबर 47 पर इसे स्वीकृत कैसे करा लिया गया?

12 अप्रैल 2025 को एमओयू साइन किया गया और बाद में इसे स्थगित करना पड़ा। विधायक ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से सरकार की इमेज खराब हुई है और उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए। उन्होंने खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से जवाब मांगा कि सरकार ऐसे अधिकारियों के खिलाफ क्या एक्शन लेने का इरादा रखती है।

खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का बचाव

खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने विधायक के सवालों का जवाब देते हुए विभाग का बचाव किया। श्रेयसी सिंह ने कहा, "विधायक खुद बता रहे हैं कि 4 फरवरी को ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया और उसी दिन कैबिनेट की बैठक भी थी। एक ही दिन में आदेश की जानकारी प्राप्त कर कैबिनेट से एजेंडा हटाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।"

मंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसे ही मामला संज्ञान में आया, बिहार सरकार ने मौजूदा एमओयू को रद्द कर दिया। सरकार नहीं चाहती कि ऐसे किसी भी फेडरेशन के साथ नाम जोड़ा जाए जिस पर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित हो। मंत्री ने खुलासा किया कि फेडरेशन पर इतने गंभीर आरोप थे कि भारत के किसी भी अन्य राज्य ने मेजबानी की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद यह प्रतियोगिता दूसरे देश में आयोजित की गई।

अधिकारी कर रहे हैं खिलवाड़

मिथिलेश तिवारी मंत्री के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने बार-बार एक ही बात दोहराई कि क्या अधिकारियों ने विषय की गंभीरता को नहीं समझा? उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों ने कैबिनेट को अंधेरे में रखकर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई, उन पर सरकार क्या कार्रवाई करेगी?

क्या है मामला ?

यह मामला बिहार में प्रस्तावित महिला कबड्डी वर्ल्ड कप की मेजबानी के दौरान हुई प्रशासनिक अनियमितताओं और वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। दरअसल, जिस कबड्डी फेडरेशन को इस आयोजन की जिम्मेदारी दी गई थी, उस पर वित्तीय गबन के गंभीर आरोप थे और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था, जहाँ कोर्ट ने सीबीआई और इंटरपोल तक से जांच की बात कही थी।

भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी का आरोप है कि इस कानूनी विवाद और जांच के आदेशों के बावजूद, खेल विभाग के अधिकारियों ने तथ्यों को छिपाकर 4 फरवरी 2025 को कैबिनेट से इसकी मंजूरी दिला दी और बाद में एमओयू (MoU) भी साइन कर लिया। जब मामला तूल पकड़ा, तो सरकार को यह आयोजन स्थगित करना पड़ा, जिससे राज्य की छवि को धक्का पहुँचा है। अब सत्ता पक्ष के ही विधायक उन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं जिन्होंने कैबिनेट को 'गुमराह' कर दागी फेडरेशन के साथ करार किया।