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पन्ना, May 28, 2026

पन्ना में बहादुर बेटी ने तीन भालुओं से लड़कर बचाई मां की जान

Panna Bear Attack: जंगल में तेंदुपत्ता तोड़ते समय तीन भालुओं ने किया महिला पर हमला, मां की चीख सुनकर पहुंची बेटी ने भालुओं से किया संघर्ष, मौसी ने मारे पत्थर।

panna

bear attack daughter saves mother from three bears

Brave Girl Saves Mother Bear Attack: मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक बहादुर बेटी ने अपनी जान की बाजी लगाकर मां की जिंदगी बचा ली। मां को बचाने के लिए बेटी ने तीन भालुओं से संघर्ष किया और घायल होने के बाद भी मां को बचाने के लिए लड़ती रही। भालुओं के हमले में मां-बेटी गंभीर रुप से घायल हुई हैं। जिन्हें परिजनों ने अस्पताल पहुंचाया जहां उनका इलाज चल रहा है। घटना पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल के देवेन्द्र नगर रेंज में आने वाले डूंगरा पहाड़ के जंगल की है।

तेंदुपत्ता तोड़ते वक्त भालुओं ने किया हमला

मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटना पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल के देवेंद्रनगर रेंज अंतर्गत डूंगरा पहाड़ के जंगल की है। यहां हाटुपुर गांव की रहने वाली बिंदा राय अपनी 19 वर्षीय बेटी बेटी ईसा राय और अन्य महिलाओं के साथ जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गई थी। इसी दौरान झाड़ियों के बीच छिपे तीन भालुओं ने अचानक हमला बोल दिया। भालुओं ने सबसे पहले बिंदा राय को निशाना बनाया और उन्हें जमीन पर पटककर नोंचने लगे।

मां को बचाने के लिए भालुओं से लड़ी बेटी

बिंदी राय पर भालुओं के हमला करते ही जंगल में चीख-पुकार मच गई और महिलाएं घबरा गईं। मां को भालुओं के चंगुल में फंसा देख बेटी ईसा ने हिम्मत दिखाई और भालुओं से भिड़ गई। उसने अपनी जान की परवाह किए बिना मां को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया। संघर्ष के दौरान भालुओं ने ईसा पर भी हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और लगातार भालुओं को मां से दूर करने की कोशिश करती रही।

मौसी ने मारे पत्थर, मां-बेटी घायल

इसी बीच वहां मौजूद ईसा की मौसी पूर्णिमा भी मदद के लिए आगे आई। उन्होंने पत्थर उठाकर भालुओं पर हमला करना शुरू कर दिया और जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। महिलाओं के इस साहसिक प्रतिरोध से भालू घबरा गए और आखिरकार जंगल की ओर भाग निकले। घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल मां-बेटी को जंगल से बाहर निकाला।

सूचना देने के बाद भी नहीं आई एंबुलेंस- ग्रामीण

ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बाद भी काफी देर तक 108 एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। घायल महिलाएं दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। बाद में परिजनों ने निजी ऑटो की व्यवस्था कर दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग और स्वास्थ्य व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने तथा आपातकालीन सेवाओं को बेहतर करने की मांग की है।

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