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आपकी बात: बच्चों के साथ बुलिंग जैसी घटनाएं न हों, इसके लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत है पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 27, 2026

बुलिंग के खतरे बच्चों को समझाएं
बच्चों के साथ बुलिंग न हो इसके लिए माता-पिता को बच्चों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए। बच्चों को बुलिंग के खतरे के बारे में खुलकर समझाना चाहिए। बच्चों को अकेले इधर-उधर नहीं भेजना चाहिए। यदि जरा भी आशंका लगे तो पुलिस कार्रवाई करनी चाहिए। प्रशासन को भी बुलिंग अपराधियों को सख्त सजा देनी चाहिए। प्रशासन की सख्त कार्रवाई और अभिभावकों की सजगता से बच्चों को बुलिंग से होने वाले हादसों से बचाया जा सकता है। - आजाद पूरण सिंह राजावत, जयपुर

बच्चे के व्यवहार की निगरानी रखें
साइबर बुलिंग से बचाव के लिए स्कूल और घर का माहौल सकारात्मक रहना जरूरी है। बच्चों के साथ माता-पिता संवाद बनाए रखें। बच्चों को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत रहने के लिए प्रेरित करें। यदि उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन दिखे या स्कूल में कोई परेेशानी है, तो इसके बारे में जानकारी रखें। माता-पिता का लगातार निगरानी रखना और बच्चों को इसके बारे में जागरूक करना ही सबसे बड़ा उपाय है। - शिवजी लाल मीना, जयपुर

संवाद को बढ़ावा दें
बुलिंग के कारण बच्चों के व्यवहार में आए बदलाव को पहचानना और उनके साथ नियमित संवाद करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे बच्चे अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकते हैं। माता-पिता को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि यदि कुछ गलत होता है, तो बच्चे आसानी से उनसे बात कर सकते हैं। बच्चों को बुलिंग के खतरों के बारे में जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित रूप से इंटरनेट का उपयोग करना सिखाना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया पर दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना और आक्रामकता से बचना भी आवश्यक है। - डॉ. प्रेमराज मीना, करौली

बुलिंग को मजाक न समझें
बच्चों के साथ बुलिंग की घटनाएं रोकने के लिए परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर प्रयास करने चाहिए। माता-पिता को बच्चों से खुलकर संवाद करना चाहिए ताकि वे बिना डरे अपनी समस्या बता सकें। स्कूलों में सख्त एंटी-बुलिंग नीति, शिक्षकों की सतर्कता और सुरक्षित शिकायत व्यवस्था होनी चाहिए। बच्चों में आत्मविश्वास, सहानुभूति और न कहने का साहस विकसित करना जरूरी है तथा साइबर बुलिंग से बचाव के लिए डिजिटल जागरूकता भी दी जानी चाहिए। जब समाज बुलिंग को मजाक नहीं बल्कि गंभीर मानसिक हिंसा मानेगा और समय पर परामर्श व कानूनी सहायता उपलब्ध होगी, तभी बच्चों को सुरक्षित और सम्मानपूर्ण वातावरण मिल सकेगा।- हंसराज वर्मा, विजयनगर

शिक्षकों को निगरानी रखनी चाहिए
बच्चों से नियमित रूप से बातचीत करें ताकि वे अपनी समस्या खुलकर बता सकें। उनमें आत्मविश्वास विकसित करें और गलत व्यवहार का विरोध करना सिखाएं। स्कूलों में सख्त एंटी-बुलिंग नीति, काउंसलर और शिकायत की व्यवस्था होनी चाहिए। शिक्षकों को कक्षा, खेल मैदान और बस आदि में विशेष निगरानी रखनी चाहिए। बच्चों को एक-दूसरे की मदद करने की आदत डालें। मोबाइल और सोशल मीडिया के उपयोग पर निगरानी रखकर साइबर बुलिंग को रोका जा सकता है। गंभीर मामलों में अभिभावक चाइल्ड हेल्पलाइन से तुरंत सहायता लें। - डॉ. राजीव कुमार, जयपुर

स्कूल में काउंसलिंग व्यवस्था करें
बच्चों के साथ बुलिंग रोकने के लिए घर और स्कूल में खुला संवाद जरूरी है। स्कूलों में सख्त एंटी-बुलिंग नियम, शिक्षकों की सतर्कता और काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। बच्चों को सहानुभूति, नैतिक शिक्षा और साइबर बुलिंग के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। - प्रकाश चौधरी, जोधपुर

गतिविधियों पर निगरानी रखें
बच्चों के साथ बुलिंग आजकल बहुत बड़ी घटनाओं के लिए उत्तरदायी है। बचाव के लिए बच्चों से माता पिता को निरंतर संवाद बनाए रखना, उनकी भावनाओं को समझना बहुत जरूरी है। बच्चे की दैनिक गतिविधियों की निगरानी, उसकी संगति पर निगाह रखते हुए उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना भी जरूरी है। आत्मविश्वास पैदा करने से बच्चे खुल कर प्रत्युत्तर देने में सक्षम होंगे। इसके साथ कॉलेजों में एंटी रैगिंग नियमों की पालना भी प्रशासन को अनिवार्यता से करवानी चाहिए। साइबर बुलिंग के बढ़ते अपराधों को देखते हुए सोशल मीडिया पर अधिक जागरूकता फैलाना जरूरी है। - सुरेंद्र कुमार सारस्वत, हनुमानगढ़

सुरक्षित वातावरण तैयार करे
माता पिता जब बच्चों से एक दोस्त की तरह जुड़े रहते हैं तो बच्चों को बुलिंग से बचाव में बड़ी मदद मिलती है। जब माता-पिता घर पर बच्चों से खुलकर बातें करते हैं, तो बच्चे अपनी हर परेशानी बिना डरे साझा कर पाते हैं। साथ ही, स्कूल में भी ऐसा सुरक्षित माहौल और नियम होने चाहिए जहां बच्चे किसी के भी गलत व्यवहार की शिकायत बिना झिझक कर सकें। अगर हम बचपन से ही बच्चों को दूसरों का सम्मान करना और गलत के खिलाफ बोलना सिखाएंगे, तो वे न तो किसी को परेशान करेंगे और न ही खुद चुपचाप इसे सहेंगे। कुल मिलाकर, हमारी जागरूकता और बच्चों के साथ हमारा मजबूत संवाद ही उन्हें इस समस्या से सुरक्षित रख सकता है। - अमृतलाल मारू, इंदौर