13 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Podcast : शरीर ही ब्रह्माण्ड : ऊर्जा है माया

Gulab Kothari Article Sharir Hi Brahmand: माया ही श्रेय है, माया ही प्रेय है। दोनों ही आत्मा के आवरण बनते हैं। दोनों शरीर के साथ जुड़े हैं। राग-द्वेष भी मन के धातु हैं। क्रोध बुद्धिरूपी अहंकार से जुड़ा है। काम माया का मोहिनी रूप है। शरीर ही ब्रह्माण्ड शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- ऊर्जा है माया

less than 1 minute read
Google source verification

जयपुर

image

Neeru Yadav

Mar 13, 2026

Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: "शरीर स्वयं में ब्रह्माण्ड है। वही ढांचा, वही सब नियम कायदे। जिस प्रकार पंच महाभूतों से, अधिदैव और अध्यात्म से ब्रह्माण्ड बनता है, वही स्वरूप हमारे शरीर का है। भीतर के बड़े आकाश में भिन्न-भिन्न पिण्ड तो हैं ही, अनन्तानन्त कोशिकाएं भी हैं। इन्हीं सूक्ष्म आत्माओं से निर्मित हमारा शरीर है जो बाहर से ठोस दिखाई पड़ता है। भीतर कोशिकाओं का मधुमक्खियों के छत्ते की तरह निर्मित संघटक स्वरूप है। ये कोशिकाएं सभी स्वतंत्र आत्माएं होती हैं।"
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर

शरीर ही ब्रह्माण्ड – पुरुष भीतर अशक्त, स्त्री संकल्पवान

शरीर ही ब्रह्माण्ड : एक ही माता-एक ही पिता

शरीर ही ब्रह्माण्ड : दाम्पत्य और माया

शरीर ही ब्रह्माण्ड – ब्रह्मांश प्रवाह माया के जागरण पर

शरीर ही ब्रह्माण्ड – माया का गहन समुद्र