
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी
कर्पूर चंद्र कुलिश ने आलेख में परिवार संस्था के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की थी। कुलिश जी का मानना था कि आधुनिक शिक्षा और पश्चिमी प्रभाव के कारण भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। पहले परिवार केवल माता-पिता और बच्चोंं तक सीमित नहीं था, बल्कि दादा-दादी, नाना-नानी और अनेक रिश्तों से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक ताना-बाना था। आज यह समष्टि भाव घटकर छोटे परिवारों में सिमटता जा रहा है। परिवार मानव समाज की मूल इकाई है, जो अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ता है। यदि परिवार टूटता है तो समाज का संतुलन भी कमजोर पड़ने लगता है।
Updated on:
13 Mar 2026 02:59 pm
Published on:
13 Mar 2026 02:58 pm
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