9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Kota building Collapse: हर बार हादसे के बाद जागते हैं जिम्मेदार

कोचिंग सिटी के व्यस्त इलाके इंद्रविहार में तीन मंजिला रेस्टोरेंट गिरने के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदारों ने इमारत को अवैध बताया है।

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Ashish Joshi

image

आशीष जोशी

Feb 09, 2026

Kota building collapsed

कोटा में इमारत ढही (फोटो-पत्रिका)

कोचिंग सिटी के व्यस्त इलाके इंद्रविहार में तीन मंजिला रेस्टोरेंट गिरने के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदारों ने इमारत को अवैध बताया है। सवाल उठता है कि क्या इमारत ढहने से पहले अवैध नहीं थी? दो जनों के मरने के बाद जिम्मेदारों को 10*20 वर्गफीट के छोटे से भूखंड पर तीन मंजिला यह बिल्डिंग अवैध नजर आई है! शहर के कोचिंग इलाकों में ऐसी दर्जनों ‘अवैध’ इमारतें हैं, जो निगम की निर्माण स्वीकृति के बिना धड़ाधड़ खड़ी हो गई।

निगम के जिम्मेदारों ने भले ही कागजी अनुमति नहीं दी हो, लेकिन उनकी ‘सहमति’ के बिना शहर में यह ‘जानलेवा’ इमारतें खड़ी हो ही नहीं सकती। इस मामले में रेस्टोरेंट संचालक और भूखंड मालिक के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है। अवैध निर्माण रोकने की जिन पर जिम्मेदारी थी, उनके खिलाफ मामला दर्ज होना तो दूर, कोई विभागीय कार्रवाई तक नहीं की गई है। ऐसा कतई संभव ही नहीं है कि संबंधित वार्ड के सफाई प्रभारी को उसके क्षेत्र में अवैध निर्माण या अतिक्रमण की जानकारी ना हो। शहर में अवैध निर्माण रोकने के लिए पूरा सिस्टम बना हुआ है। जिम्मेदारों की पूरी चेन है, लेकिन हादसा होने तक वह चैन से बैठी रहती है।

वार्ड का सफाई प्रभारी, जेईएन, मुख्य सफाई निरीक्षक, डीओ शाखा व जोन उपायुक्त तक सभी आंखें मूंदे बैठे रहे और हादसा हो गया। जब कभी हादसा होता है, यह पूरी चेन जागती है। निगम की ‘टोली’ कुछ अवैध निर्माण सीज करती है और कुछ दिन बाद ही पुन: संचालन की ‘मौन स्वीकृति’ भी दे देती है। शनिवार को हुए हादसे के बाद निगम ने आसपास बिना स्वीकृति के बने पांच भवन मालिकों को नोटिस जारी कर दो दिन में गिराने के निर्देश दिए हैं। वहीं दो स्थानों पर भवनों को जेसीबी से तोड़ने व दो अन्य जगह पर पोकलेन मशीन से बेसमेंट खुदाई का काम रुकवा दिया।

हादसे के बाद निगम ने शहर में असुरक्षित और निर्माणाधीन भवनों को चिह्नित करने का काम शुरू किया है। इन भवनों में भूस्वामित्व, आवंटन की श्रेणी, भवन निर्माण स्वीकृति व स्वीकृत नक्शे के अनुरूप निर्माण की जांच की जा रही है। क्षेत्र में मुनादी कर अतिक्रमण हटाने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया जा रहा है। क्या यह काम वर्ष पर्यन्त सतत रूप से नहीं चल सकता?

नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 194 में स्पष्ट प्रावधान है कि निर्माण ही नहीं, भवन तोड़ने के लिए भी स्वीकृति जरूरी है। जबकि, हकीकत में निगम से यह स्वीकृति कोई नहीं लेता। फिर किसकी सहमति या मिलीभगत से इमारतों पर बुलडोजर चल रहा है?

इधर, एफएसएल टीम की प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह दोनों रेस्टोरेंट की इमारतों के सिंगल पिलर पर खड़ी होना सामने आया है। इलाके की कई इमारताें की दीवारें सिंगल परत की हैं और उन पर मजबूती के लिए प्लास्टर तक नहीं किया गया, जिससे वे काफी कमजोर हो चुकी हैं। यह सब देखने की जिम्मेदारी किसकी थी? जब तक ‘असली’ जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, हादसे के बाद यों ही लकीर पीटते रहेंगे। चार दिन सख्ती की औपचारिकता से ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं, नजीर तो पेश करनी होगी।