
संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संतुलन
भारत जैसे देश में, जहां परिवार हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं, वहां बुजुर्गों को अकेला छोड़ देना हमारी संस्कृति के खिलाफ है। जिस तरह नवजात बच्चों के लिए 'मैटरनिटी' या 'पेटरनिटी लीव' का प्रावधान है, उसी तरह जीवन के अंतिम पड़ाव पर खड़े माता-पिता की सेवा के लिए भी विशेष अवकाश मिलना चाहिए। इससे युवाओं को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी और वे अपने काम पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। - नरेंद्र रलिया, भोपालगढ़, जोधपुर
भावनात्मक मजबूती बढ़ेगी
कामकाजी युवाओं को पेरेंटल केयर लीव देना एक सराहनीय और आवश्यक कदम है। इससे वे अपने माता-पिता की देखभाल बेहतर ढंग से कर सकेंगे, जिससे पारिवारिक संतुलन और भावनात्मक मजबूती बढ़ेगी। यह नीति सामाजिक जिम्मेदारी, मानवीय संवेदना और संस्कारों को बढ़ावा देती है। साथ ही कर्मचारियों का तनाव कम होकर कार्यक्षमता व निष्ठा में वृद्धि होती है। ऐसी व्यवस्था से स्वस्थ परिवार, संतुलित जीवन और बेहतर कार्य संस्कृति का निर्माण संभव है। - संजय माकोड़े, बैतूल
दायित्व निर्वहन में उपयोगी होगा
कामकाजी युवाओं को पेरेंटल केयर लीव देना समयानुकूल,मानवीय एवं दूरदर्शी उचित निर्णय है। इससे कामकाजी युवा प्रफुल्लित मन से घर के माता-पिता की सेवा के साथ अपने दायित्व का निर्वहन भी कर सकेंगे। पेरेंटल केयर लीव से निश्चित रूप से काम की गुणवत्ता बढ़ेगी। नियुक्त संस्था के प्रति निष्ठा एवं समर्पण का भाव भी विकसित होगा। - सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़
Updated on:
09 Feb 2026 06:20 pm
Published on:
09 Feb 2026 06:17 pm
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