भारत डिजिटल आत्मनिर्भरता और एआई नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
डॉ. अमन शर्मा - रिसर्च साइंटिस्ट व बिग डेटा मैनेजमेंट एक्सपर्ट,
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लंबे समय तक अमरीका और चीन का वर्चस्व दिखाई देता रहा है। चैटजीपीटी, जैमिनी और अन्य उन्नत एआइ मॉडलों ने तकनीकी नेतृत्व की दिशा तय की। ऐसे समय में किसी भारतीय एआइ मॉडल का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क पर बेहतर प्रदर्शन केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। देसी एआइ 'सर्वम' का हालिया प्रदर्शन इसी बदलती तस्वीर को सामने लाता है। कंपनी के ओसीआर और वॉइस मॉडल ने उच्च सटीकता दर हासिल कर यह साबित किया है कि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित तकनीक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकती है।
हालांकि उच्च गुणवत्ता वाले बहुभाषी डेटा सेट की उपलब्धता, उन्नत सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग अवसंरचना का अभाव, दीर्घकालिक अनुसंधान निवेश की कमी तथा वैश्विक प्रतिभा को बनाए रखने की चुनौतियां भी सामने हैं। इसके साथ-साथ डेटा गोपनीयता, नैतिक उपयोग और विश्वसनीय नियामकीय ढांचे को मजबूत करना भी आवश्यक होगा, ताकि तकनीक पर जनविश्वास बना रहे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए उद्योग-शिक्षा सहयोग, नवाचार-अनुकूल नीतियां और स्वदेशी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को तेजी से विकसित करना होगा। यदि इन चुनौतियों का संतुलित समाधान किया जाता है, तो भारत न केवल एआइ का बड़ा बाजार रहेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकेगा।
इन चुनौतियों से निपटने में भारत सरकार कई स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उच्च गुणवत्ता वाले बहुभाषी डेटा सेट, उन्नत कंप्यूटिंग अवसंरचना और सेमीकंडक्टर निर्माण में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाना होगा। साथ ही विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग तंत्र विकसित कर नवाचार को प्रोत्साहन दिया जा सकता है। एआइ स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता, कर प्रोत्साहन और सरल नीतिगत ढांचा उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। एआइ तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय निर्माता बनने की रणनीति अपनानी होगी।
वैश्विक एआइ क्षेत्र में यूनाइटेड फ्रंट बनाने के लिए भारत संतुलित, समावेशी और भरोसेमंद नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है। भारत को लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित खुले, सुरक्षित और नैतिक एआइ मानकों को बढ़ावा देते हुए बहुपक्षीय मंचों- जैसे जी-20, संयुक्त राष्ट्र और ब्रिक्स पर साझा नीति-संवाद शुरू करना होगा। यदि भारत पारदर्शिता, विश्वास और साझेदारी पर आधारित पहलें आगे बढ़ाता है, तो वह एआइ शासन में एक संतुलनकारी शक्ति बनकर वैश्विक स्तर पर साझा प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
Published on:
16 Feb 2026 02:48 pm
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