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रवि योग में वसंत पंचमी 23 जनवरी को, सरस्वती पूजन होगा, विद्यारंभ के लिए शुभ संयोग

वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 23 जनवरी शुक्रवार को मनाया जाएगा। अबूझ मुहूर्त वाले इस पर्व पर इस बार रवि योग का खास संयोग रहेगा। यह इस पर्व को और खास बनाएगा। इस दिन बिना मुहूर्त देखे विवाह, गृह प्रवेश, नौकरी, व्यापार […]

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वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 23 जनवरी शुक्रवार को मनाया जाएगा। अबूझ मुहूर्त वाले इस पर्व पर इस बार रवि योग का खास संयोग रहेगा। यह इस पर्व को और खास बनाएगा। इस दिन बिना मुहूर्त देखे विवाह, गृह प्रवेश, नौकरी, व्यापार की शुरुआत, भूमि पूजन, वाहन या कोई भी विशेष वस्तुओं की खरीदारी अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जाती है। ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन के मुताबिक माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी की सुबह 02:28 बजे से शुरू होकर 24 जनवरी की सुबह 01:46 बजे समाप्त होगी, इसलिए उदयातिथि के अनुसार इस दिन यह पर्व मनाया जाएगा। वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 09:53 बजे से 11:13 बजे तक और 07:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा, जो विशेष रूप से ज्ञान और कला के लिए लाभकारी है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होने से शहर में तगड़ा सहालग भी रहने वाला है, इसके चलते जमकर शादियां होंगी। इसके साथ ही विवाह सम्मेलन भी होंगे। वहीं स्कूल-कॉलेजों में माता सरस्वती के पूजन के लिए बाजारों में मां सरस्वती की प्रतिमाओं की बिक्री जारी है।

ऋतु परिवर्तन का सूचक
यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का सूचक है जो प्रकृति में नई स्फूर्ति और हरियाली के साथ खुशहाली लाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जो शिक्षा, कला और संगीत की देवी हैं। वसंत पंचमी का त्योहार देश के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी यह पर्व लोगों को एकजुट करता है।

ये करें वसंत पंचमी पर
वसंत पंचमी के दिन नया काम करना बहुत फलदायक होता है। इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, व्यापार प्रारंभ करना और कई मांगलिक कार्य किए जाते हैं। संगीत से जुड़े कलाकारों को अपने वाद्य यंत्रों पर तिलक लगाकर मां सरस्वती की पूजा अवश्य करनी चाहिए। बच्चों का अन्नप्राशन करवाना शुभ माना जाता है। पीले या सफेद वस्त्र पहनने चाहिए।

मान्यताएं : बसंत पर प्रकट हुई थीं मां सरस्वती, इसी दिन लिखे गए भगवान शिव-मां पार्वती के लग्न
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के आरंभ में चारों ओर नीरवता थी। तब भगवान ब्रह्मा के कमंडल से जल छिडक़ने पर मां सरस्वती प्रकट हुई और वीणा के मधुर स्वर से संसार को वाणी और ज्ञान प्राप्त हुआ। इसी कारण वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा का विशेष विधान है। कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना से माता शीघ्र प्रसन्न होकर ज्ञान, विवेक और बुद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की लग्न भी लिखी गई थी।

पूजा की विधि
मां सरस्वती की प्रतिमा को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। रोली, चंदन, हल्दी, केसर, पीले या सफेद रंग के पुष्प, पीली मिठाई और अक्षत अर्पित करें। पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबों को अर्पित करें। मां सरस्वती की वंदना करें। विद्यार्थी चाहें तो इस दिन मां सरस्वती के लिए व्रत भी रख सकते हैं। इस दिन हर घरों में केशरिया चावल बनाए जाते हैं और प्रात: स्नान के पश्चात पीले परिधान पहने जाते हैं, फिर मां सरस्वती का पूजन करना चाहिए।