
Serious negligence in District Hospital Katni
कटनी. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति सोमवार को उस समय उजागर हो गई, जब इलाज की आस लेकर पहुंचे सैकड़ों मरीज घंटों तक डॉक्टरों का इंतजार करते रह गए। अस्पताल की ओपीडी तो समय पर खुली, लेकिन जिन डॉक्टरों पर इलाज की जिम्मेदारी है, वे नदारद नजर आए। नतीजतन मरीजों की भीड़, अव्यवस्था और नाराजगी ने अस्पताल परिसर को अव्यवस्थित कर दिया। पत्रिका टीम ने सोमवार 11.30 बजे अस्पताल का जायजा लिया तो यहां अधिकांश डॉक्टर ओपीडी से नदारद रहे। अस्पताल में हर रोज करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और गंभीर रोगों से पीडि़त मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कई मरीज जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे, तो कई दीवारों का सहारा लेकर खड़े रहे। लंबे इंतजार के चलते कुछ मरीज बिना इलाज कराए ही लौटने को मजबूर हो गए। जिला अस्पताल की यह स्थिति बताती है कि आमजन के लिए सरकारी अस्पताल अब भरोसे से ज्यादा मजबूरी बनते जा रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के पास निजी अस्पताल का विकल्प नहीं होता, इसलिए उन्हें इसी अव्यवस्था में इलाज की उम्मीद लगाए बैठे रहना पड़ता है। अब सवाल यह है कि जब जिला अस्पताल में रोजाना हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं, तो डॉक्टरों की समयबद्ध उपस्थिति और वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं सुनिश्चित की जाती।
मरीजों का कहना है कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों का समय पर न पहुंचना अब आम बात हो गई है। सुबह से ओपीडी में पर्ची कटवाने के बाद घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार दोपहर तक भी डॉक्टर नहीं आते। इससे न सिर्फ मरीजों को शारीरिक परेशानी होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता है। ओपीडी में मौजूद नर्सिंग और सहायक स्टाफ असहज स्थिति में नजर आया। स्टाफ का कहना था कि डॉक्टर आएंगे, लेकिन कब आएंगे इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उन्हें भी नहीं दी जाती। इससे मरीजों के सवालों का जवाब देना उनके लिए भी मुश्किल हो जाता है।
नाक, कान और गला विभाग की ओपीडी में डॉक्टर की अनुपस्थिति साफ नजर आई। कक्ष के बाहर डॉ. प्रकाश चंद्र ताम्रकार का नाम दर्ज था, लेकिन अंदर केवल नर्सिंग स्टाफ मौजूद था। यहां मरीजों की संख्या कम रही, लेकिन जो पहुंचे, वे बिना परामर्श के लौटते दिखे। इससे साफ है कि विशेषज्ञ सेवाएं भी कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं।
मेडिसिन ओपीडी की स्थिति सबसे चिंताजनक रही। बाहर ड्यूटी डॉक्टर के रूप में डॉ. एसपी सोनी, डॉ. अमित प्यासी और डॉ. परितोष सोनी के नाम दर्ज थे, लेकिन तीनों ही डॉक्टर अपने कक्षों में मौजूद नहीं थे। चैंबर खाली पड़े थे और बाहर मरीजों की लंबी कतार लगी रही। कई मरीज गंभीर बीमारियों से पीडि़त थे, जिन्हें तत्काल चिकित्सकीय सलाह की जरूरत थी।
अस्थि रोग विभाग में तीन डॉक्टरों की जगह केवल एक डॉक्टर मरीजों को देखते नजर आए। बताया गया कि अन्य डॉक्टर ऑपरेशन में व्यस्त हैं, लेकिन इसकी पूर्व सूचना मरीजों को नहीं दी गई। परिणामस्वरूप बुजुर्ग मरीजों की लंबी कतार लग गई और इलाज की गति बेहद धीमी रही।
जिला अस्पताल की इस स्थिति ने प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के मुखिया अपनी बैठकों में न आने वाले अधिकारियों को नोटिस जारी कर देते हैं। सीएम हेल्पलाइन में कार्य न करने पर वेतन काट लिया जाता है लेकिन मरीजों के साथ हो रहे खिलवाड़ पर अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। मरीजों का कहना है कि यदि डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जाती। नामपट्टिकाओं और वास्तविक उपस्थिति में अंतर से आमजन का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से उठता जा रहा है। अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दे। डॉक्टरों की समयबद्ध उपस्थिति, पारदर्शी सूचना व्यवस्था और मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दिए बिना जिला अस्पताल की साख बहाल होना मुश्किल है।
एनकेजे निवासी 65 वर्षीय रामसहाय यादव, जो घुटनों के तेज दर्द से पीडि़त हैं, सुबह 10 बजे अस्पताल पहुंचे थे। वे आर्थो ओपीडी के बाहर बैठकर दोपहर तक डॉक्टर का इंतजार करते रहे। उन्होंने बताया कि खड़ा होना मुश्किल है, बैठने की भी जगह नहीं मिल रही। एक ही डॉक्टर हैं, कब नंबर आएगा पता नहीं। माधवनगर की रहने वाली गर्भवती महिला सीमा को पेट दर्द की शिकायत थी। परिजन उसे मेडिसिन ओपीडी लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टर नहीं मिले। सीमा के पति का कहना था कि पत्नी की हालत ठीक नहीं है, लेकिन डॉक्टर कब आएंगे कोई बताने वाला नहीं। मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल जाने का सोच रहे हैं। मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीडि़त 58 वर्षीय शांति बाई ने बताया कि दवा खत्म हो गई है, डॉक्टर के बिना पर्ची नहीं बन रही। अगर आज दवा नहीं मिली तो तबीयत और बिगड़ सकती है।
ओपीडी की समयावधि में मैं कलेक्ट्रेट में आयोजित समय सीमा की बैठक में था। डॉक्टरों के ओपीडी में मौजूद न रहने की जानकारी मिली है। इस संबंध में डॉक्टरों से जानकारी ली जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
Published on:
10 Feb 2026 09:38 am
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