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दोस्ती-दुष्कर्म और मर्डर…58 साल के गार्ड ने अपने घर से की शुरुआत, फिर शुरू हुआ रेप-हत्या का सिलसिला

Crime: फरीदाबाद निवासी 58 साल के सिक्योरिटी गार्ड सिंहराज ने 22 साल की युवती से कई बार दुष्कर्म किया, जब युवती ने कहा कि ये सिलसिला बंद करने की बात कही तो उसने उसे धमकाया। युवती ने विरोध किया तो उसे मार डाला।

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Crime The story of psycho killer who raped and murdered girls in Faridabad

Crime: दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद में एक साइको किलर को अदालत ने उम्रकैद और दो लाख 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह साइको किलर कोई आम आदमी नहीं, बल्कि एक पढ़ा-लिखा और उम्रदराज व्यक्ति है, जिसने तीन नाबालिग समेत चार लड़कियों की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी। यह हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई, क्योंकि लड़कियों ने शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही थी। इसके पहले आरोपी ने अपने चाचा और उसके बेटे के मर्डर के बाद से हत्याओं का यह सिलसिला शुरू किया था, जो बाद में दुष्कर्म के बाद हत्या में बदल गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी सिक्योरिटी गार्ड फरीदाबाद के सेक्टर-16 स्थित एक निजी अस्पताल में काम करता था। पूछताछ में आरोपी सिक्योरिटी गार्ड सिंहराज ने कबूला था कि उसने ही गुमशुदा युवती की हत्या की है। उसने युवती के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए थे। इसपर युवती उसे लगातार ब्लैकमेल करने लगी थी। इसी से गुस्से में आकर उसने 31 दिसंबर को युवती को फोन करके सेक्टर-17 के पास बुलाया और वहां पर गला दबाकर हत्या कर दी व शव को आगरा नहर में फेंक दिया था।

कैसे पकड़ा गया साइको किलर?

छात्रा की हत्या के मामले में मोबाइल फोन की ऑडियो रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल की अंतिम लोकेशन जैसे तकनीकी साक्ष्य साइको किलर को उम्रकैद की सजा दिलाने में निर्णायक साबित हुए। आरोपी ने हत्या के बाद खुद छात्रा की नानी को फोन कर अपराध कबूल किया था। यही कॉल रिकॉर्डिंग और मोबाइल लोकेशन अदालत में अभियोजन पक्ष के सबसे मजबूत सबूत बने। इस मामले की पैरवी डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रेखा जांगड़ा ने की। उन्होंने बताया कि सबूत जुटाने के लिए अदालत में छह बार आवेदन करना पड़ा, ताकि आरोपी के खिलाफ कोई भी कमी न रह जाए। अदालत ने आरोपी को हत्या, अपहरण, शव को खुर्द-बुर्द कर सबूत मिटाने और एससी-एसटी अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

नानी ने पड़ोसी की मदद से रिकॉर्ड की थी कॉल

हत्या के बाद आरोपी ने छात्रा की नानी को फोन कर छात्रा की हत्या करने की बात स्वीकार की। नानी ने सूझबूझ दिखाते हुए अपने पड़ोसी की मदद से इस फोन कॉल को रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंप दी गई। पुलिस ने आरोपी और छात्रा, दोनों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और लोकेशन का गहन विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि छात्रा के मोबाइल पर अंतिम कॉल आरोपी का ही था और दोनों मोबाइल की आखिरी लोकेशन सेक्टर-16 की ही पाई गई। अदालत में यह स्पष्ट हुआ कि भले ही इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं था, लेकिन मोबाइल से जुड़े ये तकनीकी साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त थे।

पहले दुष्कर्म किया फिर हत्या कर आगरा नहर में फेंका शव

पुलिस जांच के अनुसार, 31 दिसंबर 2021 को 22 साल की छात्रा अकेले अपनी नानी के घर जा रही थी। आरोपी ने उसे फोन कर सेक्टर-17-18 की डिवाइडिंग रोड पर बुलाया। आरोपी की परिवार से पुरानी पहचान होने के कारण छात्रा उसके बुलाने पर आ गई। इसके बाद आरोपी उसे जबरन अपनी साइकिल से सेक्टर-17 स्थित आगरा नहर के किनारे ले गया, जहां पहले उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस का कहना है कि आरोपी पहले भी छात्रा से कई बार दुष्कर्म कर चुका था। इससे छात्रा मानसिक दबाव में थी और उसने दुष्कर्म का यह सिलसिला बंद करने के लिए कहा था।

जब आरोपी ने उसकी बात नहीं मानी तो छात्रा ने परिजनों को पूरी जानकारी देने की धमकी दे दी। इससे आरोपी घबरा गया और उसकी चुन्नी से उसका गला घोट दिया। इसके बाद शव को नहर में फेंक दिया। हत्या के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने के लिए आगरा नहर को चुना। हालांकि शव झाड़ियों में अटक गया और पानी में बह नहीं पाया। इसी कारण पुलिस ने शव बरामद कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने नहर किनारे से उसके कपड़े और मोबाइल फोन भी बरामद किए।

दस सालों से परिवार के साथ थे अच्छे संबंध

अपराध जांच शाखा (डीएलएफ) की टीम ने सात जनवरी 2022 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने छात्रा की हत्या की बात कबूल की। जांच में सामने आया कि आगरा नहर सेक्टर-16 से मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर है और आसपास जंगल क्षेत्र होने के कारण आरोपी को शव ठिकाने लगाने में आसानी होती थी। आरोपी पिछले 10 सालों से छात्रा के परिवार को जानता था और नाना-नानी के घर उसका आना-जाना था। इसी जान-पहचान का फायदा उठाकर उसने छात्रा को अपने जाल में फंसाया। पुलिस का कहना है कि इस केस में कुल 28 गवाह पेश किए गए, लेकिन कोई भी घटना का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। अभियोजन पक्ष ने फोन कॉल रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल्स और मोबाइल की अंतिम लोकेशन को मुख्य साक्ष्य के रूप में अदालत के सामने रखा। इन्हीं आधारों पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।

अन्य नाबालिगों की हत्याओं का भी खुलासा

जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने इससे पहले तीन अन्य नाबालिग लड़कियों की हत्या की थी। इन मामलों में भी आरोपी मृतकाओं के परिवारों से परिचित था। आरोपी ने यह भी कबूल किया कि साल 1987 में उसने अपने चाचा और चचेरे भाई की हत्या की थी, लेकिन सबूतों के अभाव में वह सजा से बच गया था। दिसंबर 2019 में भी उसने 14 साल की किशोरी की हत्या की थी। आरोपी के खिलाफ साल 2022 में ट्रायल शुरू हुआ था। समय पर चार्जशीट दाखिल की गई और मामला अदालत में विचाराधीन रहा। 19 जनवरी को अदालत ने छात्रा की हत्या के मामले में अस्पताल के पूर्व सिक्योरिटी गार्ड को दोषी करार दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी के चेहरे का रंग उड़ गया था।