
Waqf property (Representational Photo)
वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव और उनके जनहित में उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए वक्फ संशोधन कानून के परिणाम सामने आने लगे हैं। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच सरकार ने अब तक 24,696 वक्फ दावे खारिज (अस्वीकार) कर दिए हैं। यानी इन दावों में शामिल संपत्तियों को फिलहाल वक्फ संपत्ति नहीं माना गया है।
अस्वीकार होने वाले मामलों में सबसे ज़्यादा 4,802 दावे राजस्थान में हैं। तेलंगाना 4,458 खारिज मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने गत जून में 'उम्मीद' पोर्टल शुरू कर देशभर की वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया था। देश में कुल 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियाँ दर्ज हैं, जिनमें से अब तक 5,82,541 संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। सत्यापन के दौरान दस्तावेजी कमियां और स्वामित्व संबंधी अस्पष्टता सामने आने पर हजारों दावों को खारिज किया गया है।
डीड या घोषणा का अभाव - यदि किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध नहीं है या रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।
राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होना - राज्य के भू-राजस्व अभिलेख (खसरा, खतौनी, जमाबंदी आदि) में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज नहीं हो, या निजी/सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हो।
स्वामित्व विवाद - संपत्ति पर निजी व्यक्ति का दावा हो, कोर्ट में मामला लंबित हो या सरकारी भूमि के रूप में दर्ज होने पर।
डुप्लीकेट या ओवरलैप एंट्री - एक ही संपत्ति को दो बार दर्ज कराना या उसका सीमांकन स्पष्ट न होना।
अधूरी या गलत जानकारी - पोर्टल पर दस्तावेज अधूरे, नक्शा या सर्वे विवरण न हो, क्षेत्रफल में विसंगति।
उम्मीद पोर्टल पर खारिज वक्फ संपत्तियों का सत्यापन वक्फ ट्रिब्यूनल और राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से किया जा सकता है। यदि वैध दस्तावेज मौजूद नहीं है तो ऐसी संपत्तियाँ सरकार फे पास भी रह सकती हैं। हालांकि ट्रिब्यूनल के फैसले तक किसी को संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता।
भाजपा समेत राजनीतिक दलों का एक बड़ा वर्ग यह मानता रहा है कि वक्फ संपत्ति के मामले में वक्फ बोर्ड की मनमानी चलती रही है। हर किसी संपत्ति को वक्फ बताने का आरोप तक लगाए गए। ऐसे में नए वक्फ कानून में वक्फ ट्रिब्यूनल में बदलाव, राज्य बोर्डों में महिलाओं और गैर-मुस्लिम सदस्यों की भागीदारी जैसे कई प्रावधान शामिल किए। सुप्रीम कोर्ट में कानून को चुनौती की याचिका लंबित है और अंतरिम आदेश में कुछ प्रावधानों के अमल पर रोक लगाई गई है।
जांच का अधिकार - कलेक्टर द्वारा संपत्ति की जांच के दौरान उसे वक्फ न मानने वाले प्रावधान पर रोक।
वक्फ बनाने की शर्त - वक्फ करने के लिए 5 साल तक इस्लाम का अनुयायी होने के प्रावधान पर रोक।
बेदखली पर रोक - न्यायाधिकरण द्वारा अंतिम निर्णय होने तक किसी को संपत्ति से बेदखली पर रोक।
Updated on:
10 Feb 2026 12:52 pm
Published on:
10 Feb 2026 12:40 pm
