भारत, Jun 04, 2026
Rajesh Exports Scam: देश के कॉर्पोरेट इतिहास में एक बड़े घोटाले का दावा सामने आया है, जिसमें राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) पर 15.15 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगा है। सेबी (SEBI) की अंतरिम जांच में कंपनी और इसके प्रमोटर पर फर्जी राजस्व दिखाने, बिना सबूत विदेशी निवेश दर्ज करने और फर्जी लेनदेन करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। वहीं, एलआईसी (LIC) की बड़ी हिस्सेदारी और निवेशकों के करीब 12,726 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका ने बाजार में हड़कंप मचा दिया है। कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दस्तावेजी सबूत पेश करने की बात कही है।
यह मामला सोने के कारोबारी राजेश एक्सपोर्ट्स से जुड़ा है। बाजार नियामक सेबी ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए कंपनी और इसके प्रमोटर-चेयरमैन राजेश मेहता पर शेयर बाजार में एंट्री करने पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। कंपनी पर पिछले 5 वित्तीय वर्षों (FY21 से FY25) के दौरान 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व (Revenue) की हेराफेरी और गलत जानकारी देने का आरोप है।
SEBI की जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। कंपनी ने कागजों पर दिखाया था कि उसने अफ्रीका में सोने की खदानों (Gold Mining Assets) में 1,035 करोड़ रुपये का निवेश किया है। लेकिन जब SEBI और फॉरेंसिक ऑडिटर्स ने इसके सबूत मांगे। तो SEBI को इस निवेश से जुड़ा कोई भी पुख्ता सबूत नहीं मिला। अब यह आशंका जताई जा रही है कि बैलेंस शीट को बड़ा दिखाने के लिए यह पूरा खेल रचा गया था।
जांच में एक और बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई। राजेश एक्सपोर्ट्स के बही-खातों में 'एफ्लुएंस शेयर्स एंड स्टॉक्स प्राइवेट लिमिटेड (Affluence Shares and Stocks Private Limited) के साथ 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद दिखाई गई थी। लेकिन जब जांच टीम एफ्लुएंस कंपनी के पास पहुंची, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर बयान दिया कि 'राजेश एक्सपोर्ट्स उनकी कभी क्लाइंट रही ही नहीं और ऐसा कोई एग्रीमेंट कभी हुआ ही नहीं था।'
जांच के दौरान SEBI ने पाया कि कंपनी के फंड को प्रमोटर राजेश मेहता के पर्सनल अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया था। करीब 7.4 करोड़ रुपये राजेश मेहता के निजी खातों में भेजे गए, जिसका इस्तेमाल पर्सनल डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए किया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन लेन-देन के लिए बोर्ड से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी और न ही निवेशकों को इसकी कोई भनक लगने दी गई।
इस घोटाले की आंच अब देश के करोड़ों आम परिवारों तक पहुंच चुकी है। दरअसल, सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) की राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.8% की बड़ी हिस्सेदारी है। LIC में लगा पैसा देश की आम जनता की पॉलिसी का पैसा है। इस गड़बड़ी के कारण निवेशकों के करीब 12,726 करोड़ रुपये डूब चुके हैं।
इस पूरे बवाल और SEBI के कड़े एक्शन के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया कि 'कंपनी द्वारा घोषित राजस्व सही है और राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया गया है' कंपनी ने आगे कहा, 'SEBI और कंपनी के बीच किसी तरह की बातचीत की कमी और भ्रम प्रतीत होता है। कंपनी सभी आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज जमा करके SEBI के समक्ष सभी पहलुओं को स्पष्ट करने की प्रक्रिया में है।
अब इस कंपनी के सामने दोतरफा संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ सेबी है, तो दूसरी तरफ केनरा बैंक (Canara Bank) ने कंपनी को दिए गए कर्ज को स्ट्रेस्ड एसेट घोषित कर दिया है। कंपनी पर बैंक का करीब 509 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे वसूलने के लिए बैंक अब इस एसेट को नीलाम करने की तैयारी कर रहा है।
लेकिन बाजार ने इस खबर के आते ही अपना फैसला सुना दिया। जैसे ही सेबी का आदेश पब्लिक हुआ, राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया। पिछले 3 सालों में इस शेयर ने अपने निवेशकों को कंगाल कर दिया है और इसकी कीमत 80% से ज्यादा गिर चुकी है। हालांकि, यह सेबी का अंतिम फैसला नहीं है, यह एक अंतरिम आदेश है और कंपनी को अपनी बेगुनाही साबित करने का पूरा मौका मिलेगा।
Published on: 04 Jun 2026 06:12 pm


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