
2014 में पहली बार पीएमओ पहुंचने पर महात्मा गांधी को नमन करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फ़ाइल फोटो सोर्स: पीआईबी)
PMO history in India: पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) वह दफ्तर है जहां से देश चलता है। अब इस दफ्तर का पता बदल रहा है। साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की अगुआई में कैबिनेट की पहली बैठक साउथ ब्लॉक में ही हुई थी। हालांकि तब इसकी पहचान 'पीएमओ' के रूप में नहीं थी। तब यह शब्द ही नहीं आया था। न ही तब इस दफ्तर की इतनी ताकत थी। तब यहां पीएम का एक छोटा सा सचिवालय (PM's secretariat या PMS) हुआ करता था।
जेएनयू में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर हिमांशु रॉय ने अपनी किताब 'PMO: Prime Minister's Office Through The Years' में लिखा है कि नेहरू PMS को ज्यादा ताकतवर बनाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया था। नेहरू चाहते थे कि पीएमएस का इस्तेमाल सत्ता के केंद्र के रूप में किया जाए, जिसकी कमान प्रधानमंत्री, यानि उनके हाथों में रहे। पटेल व अन्य नेता इस पर राजी नहीं हुए ।
1964 में जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने तो पीएमएस में बड़ा बदलाव किया गया और कानून के जरिए उसे ताकतवर बनाया। इसके लिए नियम बनाए गए और इसे प्रशासन का अंग बनाया गया। प्रधानमंत्री के दफ्तर की रूपरेखा में यह पहला बड़ा बदलाव था। इससे पहले नेहरू के जमाने में पीएमएस प्रधानमंत्री को केवल सेक्रेटरी के रूप में मदद करता था, लेकिन इंदिरा गांधी के आते-आते पीएमएस प्रधानमंत्री को हर तरह से मदद करने लगा। यह 'सुपर कैबिनेट' और 'मिनी पीएम' की तरह काम करने लगा।
पीएमएस में एक और बड़ा बदलाव 1977 में तब आया जब इसका नाम ‘पीएमओ’ हो गया। अटल बिहारी वाजपेयी ने पीएमओ में एक बड़ा बदलाव किया और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का नया पद बनाया।
अंग्रेजों के जमाने में जाएं तो 1911 में जब उन्होंने देश की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली लाने का फैसला किया तो दिल्ली को राजधानी के रूप में बसाया गया। इसमें करीब 11 साल लग गए। रायसीना हिल पर साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक 1931 में बन कर तैयार हुए थे। अंग्रेजों ने इसके जरिए ब्रिटिश राज की भव्यता दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी।
| क्र. | प्रधानमंत्री का नाम | कार्यकाल | एक अहम बात |
| 1 | जवाहरलाल नेहरू | 15 अगस्त 1947 - 27 मई 1964 | भारत के पहले और सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम। |
| 2 | गुलजारीलाल नंदा | 27 मई 1964 - 9 जून 1964 | पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री (13 दिन)। |
| 3 | लाल बहादुर शास्त्री | 9 जून 1964 - 11 जनवरी 1966 | जय जवान जय किसान' का नारा दिया। |
| 4 | गुलजारीलाल नंदा | 11 जनवरी 1966 - 24 जनवरी 1966 | दूसरी बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री। |
| 5 | इंदिरा गांधी | 24 जनवरी 1966 - 24 मार्च 1977 | भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री। |
| 6 | मोरारजी देसाई | 24 मार्च 1977 - 28 जुलाई 1979 | पहले गैर-कांग्रेसी पीएम और सबसे वृद्ध (81 वर्ष)। |
| 7 | चौधरी चरण सिंह | 28 जुलाई 1979 - 14 जनवरी 1980 | अकेले पीएम जिन्होंने कभी संसद का सामना नहीं किया। |
| 8 | इंदिरा गांधी | 14 जनवरी 1980 - 31 अक्टूबर 1984 | दूसरी बार प्रधानमंत्री बनीं। |
| 9 | राजीव गांधी | 31 अक्टूबर 1984 - 2 दिसंबर 1989 | भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री (40 वर्ष)। |
| 10 | विश्वनाथ प्रताप सिंह | 2 दिसंबर 1989 - 10 नवंबर 1990 | अविश्वास प्रस्ताव के कारण पद छोड़ने वाले पहले पीएम। |
| 11 | चंद्रशेखर | 10 नवंबर 1990 - 21 जून 1991 | समाजवादी जनता पार्टी से संबंधित। |
| 12 | पी. वी. नरसिम्हा राव | 21 जून 1991 - 16 मई 1996 | दक्षिण भारत से पहले प्रधानमंत्री। |
| 13 | अटल बिहारी वाजपेयी | 16 मई 1996 - 1 जून 1996 | केवल 16 दिनों के लिए (सबसे छोटा कार्यकाल)। |
| 14 | एच. डी. देवेगौड़ा | 1 जून 1996 - 21 अप्रैल 1997 | जनता दल से संबंधित। |
| 15 | इंद्र कुमार गुजराल | 21 अप्रैल 1997 - 19 मार्च 1998 | गुजराल सिद्धांत' के लिए प्रसिद्ध। |
| 16 | अटल बिहारी वाजपेयी | 19 मार्च 1998 - 22 मई 2004 | पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी पीएम। |
| 17 | डॉ. मनमोहन सिंह | 22 मई 2004 - 26 मई 2014 | भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री (लगातार दो कार्यकाल)। |
| 18 | नरेंद्र मोदी | 26 मई 2014 - वर्तमान | लगातार तीसरी बार निर्वाचित होने वाले दूसरे पीएम। |
सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स में प्रधानमंत्री के ऑफिस (पीएमओ) के अलावा कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिवालय भी होगा। यह कॉम्प्लेक्स मोदी सरकार द्वारा नए सिरे से बनवाए गए सेंट्रल विस्टा का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने 13 फरवरी का दिन इसके उदघाटन के लिए शायद इसलिए चुना, क्योंकि 1931 में इसी दिन अंग्रेजों ने दिल्ली को राजधानी बनाकर शासन शुरू किया था। वॉयसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन), संसद भवन (अब पुराना) और नॉर्थ-साउथ ब्लॉक का औपचारिक रूप से इस्तेमाल 13 फरवरी, 1931 से ही शुरू हुआ था।।
Updated on:
13 Feb 2026 11:40 am
Published on:
13 Feb 2026 10:03 am
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