
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलपीजी गैस संकट मामले पर उच्च स्तरीय बैठक की। (फोटो: AI)
Gas Supply : भारत में इन दिनों रसोई गैस आपूर्ति (Gas Supply) को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय (हाई-लेवल) बैठक की है। बैठक में मोदी ने मंत्रियों से कहा कि जनता को गैस आपूर्ति में दिक्कत नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, मिडिल ईस्ट संकट का लोगों पर असर न पड़े।मोदी ने कहा, सभी मंत्रालय मिल कर काम करें। बैठक में बताया गया कि घरेलू गैस सिलेंडर आपूर्ति की समय सीमा बढ़ाई गई है। इस अहम बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) और विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) भी खासतौर पर मौजूद रहे। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे भू-राजनीतिक बदलावों का सीधा असर अब हमारी और आपकी रसोई तक पहुंच गया है।
आपको बता दें कि ईरान में अमेरिका और इजराइल के बीच चल रही जंग की वजह से स्थितियां काफी खराब हो गई हैं। ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। इस समुद्री रास्ते के बंद होने से भारत के साथ-साथ कई अन्य एशियाई देशों में कच्चे तेल और गैस की भारी किल्लत हो गई है। आंकड़े बताते हैं कि हमारी 85 फीसदी से ज्यादा तेल की जरूरतें और 62 फीसदी एलपीजी का आयात इसी अहम रास्ते से होता है।
संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। सरकार का मुख्य फोकस इस बात पर है कि आम जनता को घरेलू गैस की किल्लत का सामना बिल्कुल न करना पड़े। इसके लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लागू कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पहली प्राथमिकता घरेलू गैस उपभोक्ताओं को दी जाएगी। भारत में सालाना 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से 87% हिस्सा सिर्फ घरेलू इस्तेमाल के लिए है।
घरेलू मांग को निर्बाध रूप से पूरा करने के लिए सरकार ने औद्योगिक इकाइयों और कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई में बड़ी कटौती कर दी है। इसके चलते होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के सामने बड़ा व्यावसायिक संकट आ गया है।
होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति और नाराजगी जताई है। कारोबारियों का कहना है कि अगर कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रोकी गई या कम की गई, तो उनका पूरा व्यापार ठप हो जाएगा। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि रोजगार पर भी बुरा असर पड़ेगा। वहीं, आम जनता ने सरकार की इस बात के लिए तारीफ की है कि संकट के समय में आम घरेलू रसोई को प्राथमिकता दी जा रही है।
केंद्र सरकार इस पूरी स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए है। पेट्रोलियम मंत्रालय अब सऊदी अरब और ईरान पर अपनी निर्भरता कम करते हुए अन्य देशों से वैकल्पिक गैस सप्लाई चेन तैयार करने के रास्तों पर तेजी से काम कर रहा है। आने वाले कुछ दिन भारत में एलपीजी सप्लाई के नजरिये से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
इस वैश्विक गैस संकट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में जल्द से जल्द आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। सौर ऊर्जा (Solar Cooking), इलेक्ट्रिक कुकिंग और बायोगैस जैसे स्वदेशी विकल्पों को अपनाने की गति अब और तेज करनी होगी। अगर हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहेंगे, तो ऐसे अंतरराष्ट्रीय विवाद हमेशा हमारी अर्थव्यवस्था और रसोई पर सीधा प्रहार करते रहेंगे।
Updated on:
10 Mar 2026 05:09 pm
Published on:
10 Mar 2026 04:50 pm
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