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गैस संकट से देश भर में मचा हाहाकार: होटलों, ढाबों,रेस्टोरेंट्स और मैरिज गार्डंस में भारी किल्लत

Shortage: ईरान तनाव के कारण भारत में LPG गैस की भारी किल्लत हो गई है। होटलों, मैरिज गार्डन्स और ढाबों का कामकाज ठप है, वहीं गैस डीलर्स एसोसिएशन ने सप्लाई चेन चरमराने की चेतावनी देते हुए सुरक्षा की मांग की है।

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भारत

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MI Zahir

Mar 10, 2026

LPG Crisis India

Supply Chain: ईरान-इजरायल जंग के चलते'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' बंद होने से शादियों और त्योहारों के सीजन में भारत में एलपीजी (LPG Crisis India) गैस का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है। घरेलू उपभोक्ताओं की रसोई की आग न बुझे, इसके लिए सरकार ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई में भारी कटौती (Gas Shortage) कर दी है। इस सख्त फैसले से पूरे देश के होटल-रेस्टोरेंट उद्योग (Hotel Industry Impact) में हाहाकार मच गया है। कॉमर्शियल गैस की किल्लत के कारण नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने चिंता जताई है कि लाखों लोगों का रोजगार खतरे में है। हाईवे के ढाबों और मैरिज गार्डन्स में खाना पकाने के लिए अब मजबूरी में लकड़ी या कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों का सहारा लिया जा रहा है।

गैस संकट : देश के प्रमुख शहरों की ग्राउंड रिपोर्ट (LPG Crisis India)

दिल्ली (NCR): देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (NCR) क्षेत्रों में भी गैस संकट का भारी असर देखने को मिल रहा है। पुरानी दिल्ली के मशहूर फूड स्टॉल्स से लेकर कनॉट प्लेस के हाई-एंड रेस्टोरेंट्स तक गैस की कमी से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल यहां के स्ट्रीट फूड वेंडर्स और छोटी टिफिन सर्विस चलाने वालों का है। कई जगहों पर कमर्शियल सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग की खबरें भी आ रही हैं, जिससे आम छोटे कारोबारियों के लिए अपना धंधा चालू रखना मुश्किल हो गया है।

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहरा गया है। यहां के विभिन्न सेक्टरों में चलने वाले फूड जॉइंट्स और यूनिवर्सिटी के आस-पास के ढाबों पर गैस की भारी किल्लत है। कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकने से कई नामी रेस्टोरेंट्स ने अपना मेन्यू आधा कर दिया है, जिससे बाहर खाने वालों और पीजी में रहने वाले छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

चेन्नई: दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई में भी गैस किल्लत से हाहाकार मचा हुआ है। यहां के मशहूर टी-स्टॉल्स, छोटे भोजनालयों और लोकप्रिय टिफिन सेंटर्स पर कमर्शियल गैस न मिलने से कामकाज ठप होने की कगार पर है। कई होटलों और रेस्टोरेंट्स ने इडली और डोसा जैसे ज्यादा गैस खपत वाले आइटम्स की जगह सीमित मेन्यू परोसना शुरू कर दिया है, जिससे आम जनता और पर्यटकों को खासी दिक्कत हो रही है।

  • मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में वड़ा पाव के ठेले लगाने वालों से लेकर फाइव स्टार होटलों तक, सभी परेशान हैं। मुंबई के मशहूर डब्बावाला नेटवर्क पर भी असर पड़ रहा है क्योंकि कई घरों और कैंटीनों में पर्याप्त खाना नहीं बन पा रहा है।
  • बेंगलुरु: आईटी हब बेंगलुरु के टेक पार्क्स की कैंटीन और फूड कोर्ट्स में भारी दिक्कत है। शहर की प्रसिद्ध 'दर्शिनी' (स्थानीय फास्ट-फूड चेन) में गैस की कमी से इडली-डोसा जैसे आइटम्स की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
  • जयपुर: राजस्थान में शादियों और पर्यटन का सीजन जोरों पर है। गैस किल्लत के कारण जयपुर के मैरिज गार्डन्स में भारी अफरा-तफरी है। कैटरर्स के पास गैस नहीं है, जिससे शादियों में खाने का मेन्यू आधा कर दिया गया है।
  • भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी में 'चटोरी गली' से लेकर बड़े होटलों तक संकट साफ दिख रहा है। यहां के मैरिज गार्डन्स में हलवाई अब लकड़ी और भट्टी के जुगाड़ में लगे हैं, जिससे आयोजन का बजट और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं।
  • कोलकाता: यहां का मशहूर स्ट्रीट फूड और मिठाई (मिष्टी) उद्योग बुरी तरह प्रभावित है। पार्क स्ट्रीट के कई नामी रेस्टोरेंट्स ने गैस बचाने के लिए अपने मेन्यू से भारी गैस खपत वाली डिशेज हटा दी हैं और 'लिमिटेड मेन्यू' पर काम कर रहे हैं।
  • रांची: झारखंड की राजधानी में सबसे ज्यादा परेशानी हॉस्टल और पीजी में रहने वाले छात्रों को हो रही है। कमर्शियल गैस न मिलने के कारण कई मेस और छोटे ढाबों ने अस्थायी तौर पर ताला लगा दिया है।
  • विशाखापट्टनम (Vizag): इस खूबसूरत तटीय शहर में पर्यटन पर गहरा असर पड़ा है। समुद्र किनारे लगने वाले फूड स्टॉल्स और मशहूर सीफूड रेस्टोरेंट्स गैस की किल्लत के चलते ग्राहकों को समय पर खाना नहीं परोस पा रहे हैं।
  • रायगढ़: छत्तीसगढ़ के इस प्रमुख औद्योगिक शहर में स्टील प्लांट्स और फैक्ट्रियों के बाहर चलने वाली कैंटीन और ढाबों पर श्रमिकों की निर्भरता ज्यादा है, लेकिन गैस न होने से हजारों मजदूरों के भोजन की व्यवस्था लड़खड़ा गई है।

एलपीजी गैस डीलर्स एसोसिएशन ने जताई चिंता (LPG Dealers Association)

देश में पैदा हुए अभूतपूर्व गैस संकट के बीच, अब ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AILDF) और विभिन्न राज्यों के एलपीजी गैस डीलर्स एसोसिएशन ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। डीलरों का कहना है कि जमीनी हालात सरकारी दावों से कहीं ज्यादा खराब हैं और अगर जल्द ही कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो सकती है।

गैस डीलर्स की प्रमुख चिंताएं और ज़मीनी हकीकत (Gas Shortage)

एलपीजी डीलर्स एसोसिएशन ने देश भर के मौजूदा हालात को लेकर कई अहम बिंदु उठाए हैं, जो इस प्रकार हैं:

सप्लाई और डिमांड में भारी अंतर: डीलरों का कहना है कि पीछे (प्लांट्स और रिफाइनरियों) से ही गैस की सप्लाई 40% से 50% तक कम आ रही है। ऐसे में आम जनता की मांग को पूरा करना लगभग असंभव हो गया है।

गोदाम खाली, ग्राहकों का गुस्सा: गैस एजेंसियों के गोदाम खाली पड़े हैं। डिलीवरी बॉयज और एजेंसी कर्मचारियों को ग्राहकों के भारी गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर तो पुलिस सुरक्षा के बीच गैस बांटनी पड़ रही है।

ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी का डर: हालांकि सरकार ने एस्मा (ESMA) लागू कर दिया है, लेकिन डीलर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि भारी किल्लत के कारण स्थानीय स्तर पर गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का खतरा बहुत बढ़ गया है। लोग डर के मारे एडवांस बुकिंग कर रहे हैं, जिससे बैकलॉग और ज्यादा बढ़ गया है।

कॉमर्शियल सिलेंडरों की 'जीरो' सप्लाई: एसोसिएशन के मुताबिक, कई शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई लगभग शून्य कर दी गई है। इससे होटलों और रेस्टोरेंट्स का कामकाज तो ठप हुआ ही है, साथ ही उन डीलरों की कमाई पर भी भारी असर पड़ा है जिनका मुख्य व्यवसाय कामर्शियल गैस बेचना है।

परिवहन और लॉजिस्टिक्स की समस्या: ट्रकों और टैंकरों के मालिकों को भी स्पष्ट निर्देश न होने के कारण लॉजिस्टिक्स की समस्या पैदा हो गई है। कई जगह ट्रक प्लांट पर खड़े हैं, लेकिन उन्हें गैस भरने के लिए कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

सरकार से डीलर्स एसोसिएशन की मांगें

एलपीजी डीलर्स ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं ताकि इस संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। डीलरों को सरकार और तेल कंपनियों (OMCs) की तरफ से स्पष्ट जानकारी दी जाए कि कब तक और कितनी गैस मिलेगी, ताकि वे ग्राहकों को सही स्थिति बता सकें। गैस एजेंसियों और गोदामों पर भीड़ बेकाबू न हो, इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक एक पारदर्शी कोटा सिस्टम लागू किया जाए ताकि हर घर को कम से कम बुनियादी जरूरत के हिसाब से गैस मिल सके और वीआईपी कल्चर हावी न हो। गैस बुकिंग के सॉफ्टवेयर में बदलाव करके 'पैनिक बुकिंग' (तय समय से पहले बार-बार बुकिंग) को रोका जाए।

सरकार ने उठाए ये सख्त कदम

गैस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने युद्ध स्तर पर कदम उठाए हैं:

  1. एस्मा (ESMA) लागू: एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून लागू कर दिया गया है।
  2. घरेलू गैस को प्राथमिकता: तेल कंपनियों को सख्त निर्देश हैं कि सबसे पहले आम घरों की गैस सप्लाई पूरी की जाए।
  3. हाई-लेवल मीटिंग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति की समीक्षा के लिए आपात बैठक की है और अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा है।
  4. वैकल्पिक रास्तों की तलाश: होर्मुज जलडमरूमध्य से आयात बाधित होने के कारण सरकार अन्य खाड़ी देशों से तेल और गैस मंगाने के लिए नए समुद्री मार्गों पर काम कर रही है।

आने वाले कुछ दिन देश के व्यापार और आम जनजीवन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। इधर सरकार ने तेल कंपनियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे दिया है।