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EU प्रेसिडेंट ने कहा- भारत संग जल्द होगा ऐतिहासिक Mother of all deals, मोदी ने किया ट्रंप का Tariff दांव फेल

India-EU Free Trade Agreement: ईयू प्रेसिडेंट ने कहा कि हम जल्द ही भारत के साथ ऐतिहासिक Mother of all deals करने जा रहे हैं। जानिए, भारत और ईयू को अमेरिका के साथ-साथ चीन की भी चुनौती की सामना क्यों करना पड़ रहा है...

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Ursula von der Leyen

EU अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Photo-IANS)

India-EU Free Trade Agreement: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोपीय संघ (EU) जल्द ही भारत के साथ एक ट्रेड डील साइन करने करने की कगार पर है। इस डील से 27 देशों वाले EU संघ को फर्स्ट मूवर एडवांटेज मिलेगा। लेयेन ने दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फॉरम को संबोधित करते हुए कहा कि इस सम्मेलन में भाग लेने के ठीक बाद में भारत जा रही हूं। अभी भी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट की कगार पर हैं। यह ऐतिहासिक डील होगा। EU प्रेसिडेंट ने भारत संग होने वाले इस डील को मदर ऑफ ऑल डील कहा है।

ग्लोबल GDP का तीन चौथाई

भारत संग होने वाले FTA को लेकर ईयू की प्रेसिडेंट ने कहा कि यह ग्लोबल जीडीपी का तीन चौथाई होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे डायनामिक महाद्वीपों में से एक के साथ यूरोप को फर्स्ट मूवर एडवांटेज प्रदान करेगी।

उन्होंने कहा कि यूरोप इस सदी के "ग्रोथ सेंटर्स" और आर्थिक पावरहाउस के साथ व्यापार करना चाहता है, लैटिन अमेरिका से लेकर इंडो-पैसिफिक तक। उन्होंने कहा कि इस डील के पूरा होने से 200 करोड़ आबादी का बड़ा बाजार भारत और ईयू के लिए उपलब्ध होगा।

मुख्य अतिथि होंगी EU प्रेसिडेंट

यूरोपीय यूनियन प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा दोनों अगले हफ्ते गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। वे 27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान भी भारत और EU के बीच ट्रेड डील होने की संभावना है।

दशकों से जारी FTA पर बातचीत

भारत-EU ट्रेड एग्रीमेंट दशकों से बन रहा है। जुलाई 2022 में बातचीत फिर से शुरू होने के बाद दोनों देश आखिरकार समझौते पर साइन करने के करीब आ गए हैं। हालांकि बातचीत पहली बार 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में बातचीत बंद कर दी गई थी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ नीति अपनाने के बाद भारत और यूरोपीय संघ साथ आए हैं। उन्हें नए व्यापार भागीदार और नए बाजारों की तलाश करनी पड़ रही है।

इसका एक कारण चीन भी

यूरोपीय देश और भारत के करीब आने की वजह अमेरिका के साथ-साथ चीन भी है। EU को महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी में चीन के दबदबे की चिंता है, क्योंकि चीन कई क्षेत्रों में दुनिया भर में मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी स्थान रखता है। इससे ईयू की चुनौतियां बढ़ गई हैं। वहीं, भारतीय उद्योगों को कीमतों को लेकर चीनी कंपनियों से चुनौतियां मिल रही हैं।

भारत जूते, कपड़ा करेगा निर्यात

भारत, यूरोपीय देशों को कपड़ा, जूते, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में बाजार तक पहुंच बनाने का लक्ष्य बना रहा है, जबकि EU को अपने ऑटोमोबाइल और वाइन, व्हिस्की के लिए बाजार तक पहुंच मिलने की उम्मीद है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारत ने EU के साथ अपने व्यापार समझौते की बातचीत में काफी प्रगति की है, दोनों पक्षों ने 24 में से 20 अध्यायों पर हस्ताक्षर किए हैं और इस महीने के आखिर में EU नेताओं की यात्रा से पहले एक समझौते पर पहुंचने का लक्ष्य रखा है।

अमेरिकी की टैरिफ नीति की मार झेल रहे भारत और EU

दिलचस्प बात यह है कि यह डील ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका के साथ भारत की लंबे समय से अटकी ट्रेड डील अनिश्चित बनी हुई है। अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया हुआ है। वहीं, EU के देशों के साथ भी ट्रंप ने रेसिप्रॉकल टैरिफ लगाया हुआ है। वहीं, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड विवाद पर अमेरिका की बात नहीं मानने पर 10 फीसदी अतिर

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