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सालों से फैसलों के इंतजार में जमीन के कागज़ों में उलझी फंसी दरकती जिंदगी

–दिसंबर 2025 तक राजस्व न्यायालयों में 13,223 प्रकरण लंबित, पांच साल से ज्यादा पुराने मामलों का बोझ सबसे भारी-नामांतरण, बंटवारा और रास्ता विवाद में फंसे लोग, -एक साल से अधिक पुराने मामलों की संख्या चिंताजनक, कई तहसीलों में आधे से ज्यादा केस पुराने नागौर. जिला विभाजन के बाद राजस्व न्यायालयों पर मामलों का दबाव कम […]

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-दिसंबर 2025 तक राजस्व न्यायालयों में 13,223 प्रकरण लंबित, पांच साल से ज्यादा पुराने मामलों का बोझ सबसे भारी
-नामांतरण, बंटवारा और रास्ता विवाद में फंसे लोग,
-एक साल से अधिक पुराने मामलों की संख्या चिंताजनक, कई तहसीलों में आधे से ज्यादा केस पुराने

नागौर. जिला विभाजन के बाद राजस्व न्यायालयों पर मामलों का दबाव कम होने की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी है। नागौर जिले के विभिन्न राजस्व न्यायालयों में 13 हजार 223 राजस्व प्रकरण लंबित हैं। वर्षों से जमीन से जुड़े विवादों में उलझे लोग आज भी फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इनमें प्रकरणों में छह माह की कम अवधि से लेकर 10 वर्ष से भी ज्यादा समय के मामले शामिल हैं। मामलों से जुड़े पीडि़त बरसों से राजस्व न्यायालयों का चक्कर लगाने के लिए विवश हैं।
उपखंड स्तरीय न्यायालयों की स्थिति गंभीर
डीडवाना-कुचामन जिला अलग बना तो लोगों को लगा कि अब राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों में तेजी से कमी आएगी, लेकिन यह मंशा पूरी नहीं हो पाई। हालांकि जिला कलक्टर के न्यायालय में सबसे कम प्रकरण लंबित है। इस न्यायालय के लंबित प्रकरण की संख्या ढाई सौ भी नहीं है, लेकिन शेष राजस्व न्यायालयों की स्थिति बेहद गंभीर है। विशेषकर उपखंड स्तर के न्यायालयों की। इन न्यायालयों में सैंकड़ों प्रकरण तो 10 वर्ष से भी जयादा समय से आज तक चल रहे हैं। स्थिति यह है कि पीडि़त बरसों से इन न्यायालयों के चक्कर लगा रहे हैं, और प्रकरण निस्तारित करने के जिम्मेदार ज्यादातर मामलों में अगली सुनवाई की तारीख दे देते हैं। बरसों से चले आ रहे इस सिलसिले से जिम्मेदारों को केाई दिक्कत नहीं हो रही है, लेकिन पीडि़त अब थक चुके हैं। उपखंड मूण्डवा, उपखंड खींवसर एवं उपखंड मेड़तासिटी के पीडि़त नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं कि अब तो लग रहा है कि आखरी सांस तक यह मामले चलते रहेंगे। इससे पीडि़तों के दर्द की स्थिति का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।
आंकड़े बता रहे पीडि़तों के प्रकरणों की संख्या
आंकड़ों के अनुसार जिला कलक्टर न्यायालय नागौर में 201 और अतिरिक्त जिला कलक्टर न्यायालय में 636 प्रकरण लंबित हैं। सबसे अधिक दबाव उपखंड अधिकारी स्तर की अदालतों पर है। उपखंड अधिकारी नागौर में 1,227, कुचेरा में 2,198, जायल में 1,804, मेड़तासिटी में 2,386, डेगाना में 1,638, रियांबड़ी में 1,697 और मूंडवा में 891 प्रकरण दर्ज हैं। सहायक कलक्टर (मुख्यालय) नागौर न्यायालय में भी 545 मामले अब तक निस्तारित नहीं हो सके हैं।ृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृ
इन मामलों की संख्या ज्यादा
राजस्व विभाग के अनुसार नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, रास्ता विवाद और अतिक्रमण जैसे मामलों में पेंडेंसी सबसे अधिक है। इन मामलों में रिपोर्ट, मौका मुआयना और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के कारण फाइलें लंबी चलती हैं। लंबित प्रकरणों का असर सीधे आमजन पर पड़ रहा है। नामांतरण नहीं होने से किसान बैंक ऋण नहीं ले पा रहे, रिकॉर्ड अपडेट न होने से मुआवजा और सरकारी योजनाएं अटक रही हैं। रास्ता और बंटवारा विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक तनाव और लंबे कानूनी संघर्ष का कारण बन रहे हैं।
नागौर जिले में लंबित राजस्व प्रकरण दिसंबर 2025 तक की स्थिति

जिला कलक्टर न्यायालय 201
अतिरिक्त जिला कलक्टर 636
उपखंड अधिकारी, नागौर 1,227
उपखंड अधिकारी, कुचेरा 2,198
उपखंड अधिकारी, जायल 1,804
उपखंड अधिकारी, मेड़तासिटी 2,386
उपखंड अधिकारी, डेगाना 1,638
उपखंड अधिकारी, रियांबड़ी 1,697
उपखंड अधिकारी, मूंडवा 891
सहायक कलक्टर (मुख्यालय) 545
कुल 13,223 प्रकरणों की संख्या

एक्सपर्ट विजन…
पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों के लिए विशेष निस्तारण अभियान चलाना चाहिए। इसके साथ ही उपखंड अधिकारी स्तर पर अतिरिक्त न्यायालय और सहायक स्टाफ के खाली पदों की भर्ती करनी चाहिए। इसके साथ ही पुराने मामलों की मासिक समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाए।
गोविंद कड़वा, अधिवक्ता, नागौर

मामले निस्तारित करने के प्रयास हो रहे हैं
राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के जल्द से जल्द निस्तारित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। इस संबंध में हुई बैठकों में भी अधीरस्थों को इसके लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
अरुण कुमार पुरोहित, जिला कलक्टर नागौर