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देलवाड़ा मंदिर की तर्ज पर नागौर में तैयार हो रहा चंद्रप्रभ स्वामी जैन मंदिर

नागौर. शहर के रेलवे स्टेशन स्थित ऐतिहासिक श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन मंदिर अब अपनी भव्यता और कलात्मकता के नए आयाम छू रहा है। लगभग 90 वर्ष पुराने इस मंदिर को माउंट आबू के देलवाड़ा जैन मंदिर की तर्ज पर नक्काशी करके सजाया जा रहा है, जहां ओडिशा से आए कुशल कारीगर संगमरमर पर बारीक और […]

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भगवान चंद्रप्रभ स्वामी की प्रतिमा

पहले भगवान चंद्रप्रभ स्वामी की प्रतिमा सिद्ध अवस्था में विराजमान थी, लेकिन परिकर स्थापना के बाद अब अरिहंत अवस्था में सुशोभित हो गई हैं।

नागौर. शहर के रेलवे स्टेशन स्थित ऐतिहासिक श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन मंदिर अब अपनी भव्यता और कलात्मकता के नए आयाम छू रहा है। लगभग 90 वर्ष पुराने इस मंदिर को माउंट आबू के देलवाड़ा जैन मंदिर की तर्ज पर नक्काशी करके सजाया जा रहा है, जहां ओडिशा से आए कुशल कारीगर संगमरमर पर बारीक और आकर्षक नक्काशी का कार्य कर रहे हैं। यह मंदिर सुखलाल, बादरमल एवं कानमल समदङिया परिवार की ओर से 90 वर्ष पूर्व निर्मित करवाया गया था और स्थापना के समय से ही मंदिर की देखरेख और सेवा की जिम्मेदारी समदडिय़ा परिवार ही संभाल रहा है।

मंदिर में प्रतिवर्ष परंपरागत रूप से ध्वजा महोत्सव आयोजित किया जाता है। इस वर्ष जैन आचार्य नित्यानंद सूरीश्वर की प्रेरणा से मंदिर में विशेष परिकर एवं नक्काशी का कार्य करवाया जा रहा है। मंदिर संचालन समिति के अभय कुमार समदङिया ने बताया कि परिकर एवं नक्काशी ओडिशा के कारीगरों की ओर से तैयार किया गया है। पहले भगवान चंद्रप्रभ स्वामी की प्रतिमा सिद्ध अवस्था में विराजमान थी, लेकिन परिकर (जैन प्रतिमाओं के चारों ओर बनी सजावटी आकृति को परिकर कहते हैं, जिसमें यक्ष, यक्षिणी, चंवरधारी इंद्र, धर्मचक्र, नवग्रह आदि होते हैं, जो मूल प्रतिमा की महिमा दर्शाते हैं।) स्थापना के बाद अब अरिहंत अवस्था में सुशोभित हो गई हैं। परिकर में मूर्ति के पीछे की नक्काशी के साथ देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं।

छह महीने से चल रहा काम

देलवाड़ा मंदिर की शैली में पूरे मंदिर परिसर में भव्य नक्काशी का कार्य करवाया जा रहा है। यह कार्य पिछले छह महीनों से लगातार जारी है और आगामी दो से तीन वर्षों तक इसके पूर्ण होने की संभावना है। आगामी 7 फरवरी से आयोजित होने वाले ध्वजा महोत्सव को लेकर मंदिर में सजावट का काम चल रहा है। नक्काशी का शेष कार्य महोत्सव के बाद शुरू किया जाएगा। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि जैन संस्कृति और कला का भी प्रमुख उदाहरण बनता जा रहा है। यहां हर वर्ष अनेक जैन संतों का आगमन होता है, जिससे वातावरण धर्ममय बना रहता है।

देश के साथ विदेशों से आएंगे जैन धर्मावलंबी

जैन आचार्य नित्यानंद सूरीश्वर के सान्निध्य में 7, 8 और 9 फरवरी को तीन दिवसीय भव्य ध्वजा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस दौरान 89वीं ध्वजा फहराई जाएगी। इस बार ध्वजा के लाभार्थी सज्जनचंद, निहालचंद एवं हेमचंद समदङिया परिवार होंगे। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के साथ अमेरिका सहित अन्य देशों में रहने वाले जैन धर्मावलंबी भाग लेने आएंगे।

फूलों से होगी आकर्षक सजावट

ध्वजा महोत्सव के अवसर पर मंदिर को पुष्कर के फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। अहमदाबाद के कलाकारों की ओर से रंगोली सजावट की जाएगी। इसके लिए बड़ी मात्रा में फूल मंगाए जाएंगे।

तीन दिन होंगे धार्मिक आयोजन

महोत्सव में जैन समाज के युवा गायक कलाकार श्रेयांस सिंघवी के निर्देशन में विशेष संगीत कार्यक्रम आयोजित होंगे। कार्यक्रम के तहत 7 फरवरी को दोपहर में 18 अभिषेक के माध्यम से मंदिर शुद्धीकरण किया जाएगा और रात्रि में परमात्मा भक्ति होगी, देशभर के कलाकारों की ओर से प्रस्तुतियां दी जाएंगी। 8 फरवरी को सुबह सामूहिक सामायिक, दोपहर में भक्ताम्बर महापूजन तथा रात्रि में भक्ति संध्या आयोजित की जाएगी। 9 फरवरी को सुबह कांच का मंदिर से चंद्रप्रभ स्वामी मंदिर तक भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊंट और बग्गियां आदि शामिल होंगी। लगभग एक किलोमीटर लंबे इस वरघोड़े में जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे। इसके बाद शुभ मुहूर्त में ध्वजा महोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर निर्माण के बाद यह पहला अवसर होगा जब इतने बड़े स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। विधि-विधान संपन्न कराने के लिए अहमदाबाद से पंडित कल्पेश आएंगे।