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यूपी दारोगा भर्ती परीक्षा के सवाल पर बवाल, ‘पंडित’ शब्द पर सियासत तेज, भाजपा विधायक ने CM योगी को लिखा पत्र

UP SI Exam Controversy: यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवाद बढ़ गया है। मुरादाबाद के भाजपा विधायक रितेश गुप्ता ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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यूपी दारोगा भर्ती परीक्षा के सवाल पर बवाल | Image - FB/@MLARiteshKGupta

Pandit Word Row in Police Exam: उत्तर प्रदेश पुलिस की दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। प्रश्नपत्र में दिए गए एक विकल्प में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए मुरादाबाद शहर से भाजपा विधायक रितेश गुप्ता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे समाज की भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मामला बताते हुए इसकी निंदा की है। इस मुद्दे के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

फेसबुक पोस्ट के जरिए जताई कड़ी नाराजगी

भाजपा विधायक रितेश गुप्ता ने इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि दरोगा भर्ती परीक्षा में पूछे गए प्रश्न - “अवसर के अनुसार अपना पक्ष बदलने वाले व्यक्ति के लिए एक शब्द चुनिए” - के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है। विधायक ने कहा कि इस तरह के शब्दों का प्रयोग किसी भी सम्मानित समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।

सम्मानित समाज की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बताया

विधायक ने अपने बयान में कहा कि यह केवल एक शब्द का विवाद नहीं है, बल्कि एक विद्वत और सम्मानित समाज की गरिमा से जुड़ा विषय है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं और ऐसे मंचों पर शब्दों का चयन बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले को गंभीर बताते हुए इसके प्रति जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

ब्राह्मण समाज के योगदान का किया उल्लेख

अपने वक्तव्य में रितेश गुप्ता ने ब्राह्मण समाज के ऐतिहासिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज ने सदियों से ज्ञान, संस्कृति, सनातन परंपराओं और वैदिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय समाज के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आधार को मजबूत बनाए रखने में इस समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। ऐसे में किसी प्रतियोगी परीक्षा में इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना उचित नहीं माना जा सकता।

मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग

भाजपा विधायक ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि प्रश्न चयन समिति की भूमिका की समीक्षा की जाए और यह जांच की जाए कि इस प्रकार का शब्द प्रश्नपत्र में कैसे शामिल हुआ। साथ ही उन्होंने दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।

सामाजिक समरसता बनाए रखने पर दिया जोर

विधायक ने अपने पत्र में यह भी कहा कि प्रदेश में सामाजिक समरसता, आपसी सम्मान और संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था समाज में अनावश्यक असंतुलन पैदा करने की कोशिश करती है तो उसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। उनका मानना है कि ऐसी घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद दोबारा पैदा न हों।

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