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मुरादाबाद में मेयर बनाम प्रशासन: महापौर ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल, जानें पूरा मामला

Moradabad News: यूपी के मुरादाबाद में धीमरी गांव की जमीन को लेकर महापौर विनोद अग्रवाल और जिला प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं।

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moradabad mayor boundary wall land dispute

मुरादाबाद में मेयर बनाम प्रशासन | Image - FB/@mayormoradabad

Mayor Boundary Wall Land Dispute: मुरादाबाद के महापौर विनोद अग्रवाल ने धीमरी गांव में अपनी बाउंड्रीवाल गिराए जाने के बाद जिला प्रशासन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सत्ता पक्ष से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। महापौर ने कमिश्नर को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और किसी दूसरे जनपद के उपजिलाधिकारी की टीम से जमीन की पैमाइश कराने की मांग की है।

कमिश्नर को भेजा पत्र, निष्पक्ष जांच की मांग

महापौर विनोद अग्रवाल ने कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह को लिखे पत्र में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस पूरे मामले में निष्पक्षता नहीं बरती गई। उन्होंने विशेष रूप से एसडीएम सदर डा. राम मोहन मीणा और धीमरी गांव के लेखपाल राकेश चौहान को जांच प्रक्रिया से दूर रखने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक किसी अन्य जिले के अधिकारी इस जमीन की पैमाइश नहीं करेंगे, तब तक न्याय मिलना मुश्किल है।

कंपोजिट विद्यालय निर्माण से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद बरेली-मुरादाबाद हाईवे के पास स्थित धीमरी गांव में प्रस्तावित कंपोजिट विद्यालय के लिए भूमि चिन्हांकन के दौरान शुरू हुआ। गुरुवार को सदर तहसील की टीम जमीन की पैमाइश करने पहुंची थी। इसी दौरान प्रशासन ने दावा किया कि महापौर की बाउंड्रीवाल सरकारी जमीन में बनी हुई है और उसे गिरा दिया गया। महापौर ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि जिस जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाई गई है, वह पूरी तरह उनकी निजी संपत्ति है।

14 घंटे तक चली पैमाइश, फिर भी नहीं निकला नतीजा

मामले ने तूल पकड़ा तो शुक्रवार को जिलाधिकारी अनुज सिंह खुद मौके पर पहुंचे। उनके साथ एसडीएम सदर डा. राम मोहन मीणा, एसडीएम बिलारी विनय सिंह और राजस्व व चकबंदी विभाग की टीम भी मौजूद रही। सुबह छह बजे से शुरू हुई जमीन की पैमाइश देर रात करीब आठ बजे तक चलती रही। करीब 14 घंटे की लंबी प्रक्रिया के बावजूद प्रशासन किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका, जिससे विवाद और गहरा गया।

महापौर का दावा

महापौर विनोद अग्रवाल का कहना है कि जिस जमीन को प्रशासन सरकारी बता रहा है, वह गाटा संख्या 1086 में आती है और उसमें उनका नाम विधिवत दर्ज है। उन्होंने बताया कि इस गाटे में वह स्वयं, अंजू रस्तोगी और भाजपा नेता रिषिपाल सिंह चौधरी के छोटे भाई व निर्यातक अमित चौधरी कास्तकार के रूप में दर्ज हैं। महापौर के मुताबिक उन्होंने करीब दस साल पहले यह जमीन चांद बाबू से खरीदी थी और इसका दाखिल-खारिज भी विधिवत हुआ है।

रोवर मशीन से कराई गई डिजिटल पैमाइश

विवाद बढ़ने के बाद शनिवार को प्रशासन ने एक बार फिर जमीन की पैमाइश कराई। इस बार आधुनिक रोवर मशीन का इस्तेमाल किया गया, जो डिजिटल मैपिंग के जरिए अत्यंत सटीक नाप-जोख करती है। सुबह छह बजे से शुरू हुई यह प्रक्रिया करीब 11 बजे तक चली। हालांकि पैमाइश के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया और मामले पर चुप्पी साधे रहे।

लखनऊ तक पहुंचा मामला

महापौर ने कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करता है तो वह इस पूरे प्रकरण को शासन स्तर तक ले जाएंगे। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही लखनऊ जाकर अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद से मिलेंगे और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देंगे। बताया जा रहा है कि यह मामला पहले ही शासन तक पहुंच चुका है और सरकार स्तर से भी इस पर फीडबैक लिया जा रहा है।

लेखपालों पर फर्जीवाड़े का आरोप

महापौर विनोद अग्रवाल ने धीमरी गांव के लेखपाल राकेश चौहान और बस्तौर गांव के लेखपाल तेहर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दोनों ने मिलकर जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की है। उन्होंने सवाल उठाया कि बस्तौर के लेखपाल पर कार्रवाई हो गई, लेकिन धीमरी के लेखपाल को क्यों बचाया जा रहा है। महापौर का दावा है कि इसी गड़बड़ी के कारण जमीन की रजिस्ट्री और फर्द जारी हुई।

भूमाफिया गिरोह का खुलासा होने की चर्चा

इस विवाद के बाद जिले में सरकारी जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि गाटा संख्या 1086 और 1087 के अलावा आसपास के कई गाटा नंबरों में भी फर्जी तरीके से जमीन बेचे जाने के मामले सामने आ सकते हैं। यदि पूरे मामले की गहराई से जांच हुई तो जिले में सक्रिय किसी बड़े भूमाफिया गिरोह का भी पर्दाफाश हो सकता है।

कमिश्नर ने कहा- मांग पर किया जा रहा विचार

इस पूरे विवाद पर कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह का कहना है कि महापौर की ओर से दूसरे जनपद के उपजिलाधिकारी की टीम से पैमाइश कराने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल मुरादाबाद में मेयर और प्रशासन के बीच यह टकराव राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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