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Yogi Adityanath: सदन में ‘बिस्मिल्लाह खां को फांसी’ वाले सवाल पर छिड़ी बहस, सीएम योगी के जवाब से गूंजी हंसी

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सरकार के दौर के दो किस्से सुनाकर शिक्षा व्यवस्था और मंत्रियों की कार्यशैली पर तंज कसा। ‘बिस्मिल’ और ‘बिस्मिल्लाह खां’ वाले प्रसंग पर सदन में ठहाके गूंज उठे और माहौल हल्का हो गया।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 14, 2026

UP विधानसभा में CM योगी के मजेदार किस्से: ‘बिस्मिल’ बयान पर छाए ठहाके (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

UP विधानसभा में CM योगी के मजेदार किस्से: ‘बिस्मिल’ बयान पर छाए ठहाके (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

Yogi Adityanath ‘Bismil-Bismillah’ : उत्तर प्रदेश विधानसभा में कार्यवाही के दौरान उस समय माहौल हल्का और खुशनुमा हो गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल से जुड़े दो दिलचस्प प्रसंग सुनाए। मुख्यमंत्री ने इन उदाहरणों के जरिए पिछली सरकार की शिक्षा व्यवस्था और मंत्रियों की कार्यशैली पर तीखा व्यंग्य किया। सदन में जैसे ही मुख्यमंत्री ने पहला किस्सा सुनाना शुरू किया, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से मुस्कुराहटें और ठहाके सुनाई देने लगे। हालांकि, इन हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई बातों के पीछे गंभीर राजनीतिक संदेश भी छिपा था।

‘बिस्मिल’ और ‘बिस्मिल्लाह खां’ वाला प्रसंग

मुख्यमंत्री ने बताया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में तत्कालीन शिक्षा मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।मुख्यमंत्री के अनुसार, जब मंत्री को बताया गया कि यह कार्यक्रम राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर है, तो उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा,बिस्मिल्लाह खां को तो हाल ही में कोई पुरस्कार मिला था, उन्हें फांसी क्यों दे दी गई,

यह सुनकर सदन में ठहाके गूंज उठे। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मंच पर पहुंचने के बाद भी मंत्री जी इस भ्रम में रहे। जब नीचे बैठे लोगों ने उन्हें सुधारने की कोशिश की, तो उन्होंने उन्हें “विपक्षी या भाजपा समर्थक” कहकर चुप करा दिया।मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि जिस प्रदेश का शिक्षा मंत्री ही राम प्रसाद बिस्मिल और प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के बीच अंतर न जानता हो, वहां शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में गंभीरता का अभाव ही नकल माफिया जैसी समस्याओं को जन्म देता है।

शिक्षा व्यवस्था पर निशाना

मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। यदि शिक्षा मंत्री स्वयं तथ्यों से अनभिज्ञ हों या ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बारे में भ्रमित हों, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठे थे। वर्तमान सरकार ने नकल पर सख्ती, डिजिटल निगरानी और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के जरिए सुधार का प्रयास किया है।

‘कौन मंत्री-दूसरा किस्सा

मुख्यमंत्री ने सदन में एक और प्रसंग साझा किया, जो उस समय का है जब वह गोरखपुर से सांसद थे। उन्होंने बताया कि एक बार वह रेलवे स्टेशन पर थे, जहां राज्य सरकार के कुछ अधिकारी मौजूद थे। उसी समय प्रदेश के तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी वहां पहुंचे। मुख्यमंत्री ने पास खड़े एक अधिकारी से पूछा कि क्या वह मंत्री जी के साथ आए हैं। इस पर अधिकारी ने आश्चर्य से पूछा- “कौन मंत्री, मुख्यमंत्री ने बताया कि बाद में स्वयं मंत्री जी ने स्वीकार किया कि वह पिछले छह महीने से सचिवालय नहीं गए थे। यही कारण था कि विभागीय अधिकारी उन्हें पहचान तक नहीं पाए। सदन में यह किस्सा सुनते ही एक बार फिर हंसी की लहर दौड़ गई।

कार्यशैली पर सवाल

मुख्यमंत्री ने इन दोनों उदाहरणों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि शासन में सक्रियता, जिम्मेदारी और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री अपने विभाग में नियमित रूप से उपस्थित न रहें, अधिकारियों से संवाद न रखें और नीतिगत निर्णयों में सक्रिय भूमिका न निभाएं, तो प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार में हर मंत्री और अधिकारी से जवाबदेही तय की गई है। विभागीय समीक्षा बैठकें नियमित रूप से होती हैं और कार्यों की मॉनिटरिंग की जाती है।

राजनीतिक तंज

हालांकि मुख्यमंत्री का अंदाज हल्का-फुल्का था, लेकिन राजनीतिक संदेश स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता सुशासन, पारदर्शिता और विकास है। शिक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री के वक्तव्य पर विपक्षी सदस्यों ने बीच-बीच में आपत्ति भी जताई, लेकिन सदन का माहौल अधिकतर समय हल्का ही बना रहा। कुछ सदस्यों ने इसे राजनीतिक व्यंग्य बताया, तो कुछ ने इसे पुराने मामलों को दोहराने की कोशिश करार दिया। फिर भी, सदन में मुख्यमंत्री के वक्तव्य ने कुछ देर के लिए गंभीर बहस के बीच मुस्कान और ठहाकों का माहौल बना दिया।

सदन में हल्के पलों की अहमियत

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा जैसी गंभीर संस्था में भी कभी-कभी ऐसे प्रसंग माहौल को संतुलित करने का काम करते हैं। हालांकि, इन हल्के पलों के माध्यम से दिए गए संदेश राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का उपहास करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक गंभीरता और शिक्षा व्यवस्था की मजबूती पर जोर देना है।