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UP विधानसभा: ओम प्रकाश राजभर ने PDA पर सपा को घेरा, बयान से बढ़ी सियासत

BJP vs SP: उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा के ‘PDA’ फॉर्मूले पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि विपक्ष खुद इसके अर्थ पर स्थिर नहीं है और कभी अलग-अलग व्याख्या करता है। बयान के बाद सदन में हंसी और राजनीतिक बहस तेज हो गई।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 14, 2026

सदन में राजभर का तंज, सपा के PDA फॉर्मूले पर छिड़ी तीखी सियासी बहस (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

सदन में राजभर का तंज, सपा के PDA फॉर्मूले पर छिड़ी तीखी सियासी बहस (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Om Prakash Rajbhar Mocks SP PDA Formula: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘PDA’ को लेकर चल रही बहस ने  विधानसभा के भीतर नया मोड़ ले लिया। योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ फॉर्मूले पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष खुद यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा कि इस संक्षिप्त शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है। सदन में बोलते हुए राजभर ने कहा, “आप लोग PDA का फॉर्मूला ही नहीं बताते। कभी P से पंडित, कभी पिछड़ा; D से कभी दलित, तो कभी डिंपल; A से कभी अगड़ा, तो कभी अल्पसंख्यक बताते हैं। एक पर डटे रहो, तब तो माना जाए कि सही बता रहे हो। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष की ओर से ठहाके गूंजे, जबकि विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति भी दर्ज कराई।

क्या है ‘PDA’ का राजनीतिक संदर्भ

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल के चुनावी अभियानों में ‘PDA’ शब्द का इस्तेमाल ‘पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक’ के राजनीतिक समीकरण के रूप में किया है। इसे सामाजिक न्याय और बहुजन प्रतिनिधित्व के नए फॉर्मूले के तौर पर पेश किया गया। हालांकि, भाजपा और सहयोगी दल लगातार इस फॉर्मूले की व्याख्या और व्यावहारिकता पर सवाल उठाते रहे हैं। ओम प्रकाश राजभर का ताजा बयान इसी क्रम में देखा जा रहा है।

सदन में तंज और ठहाके

राजभर ने अपने भाषण में कहा कि राजनीति में स्पष्टता और स्थिरता जरूरी है। यदि कोई दल सामाजिक समीकरण की बात करता है, तो उसे उसकी परिभाषा और उद्देश्य स्पष्ट करने चाहिए। उन्होंने कहा कि “जनता को भ्रमित करने से कुछ नहीं होगा। PDA का मतलब हर दिन बदलने से विश्वास नहीं बनता।” उनके बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया। विपक्ष की ओर से कुछ सदस्यों ने इसे राजनीतिक कटाक्ष बताया और कहा कि सरकार मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

सामाजिक समीकरण बनाम राजनीतिक रणनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति लंबे समय से सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। मंडल राजनीति के दौर से लेकर आज तक जातीय और सामाजिक आधार पर गठबंधन और फॉर्मूले बनते-बिगड़ते रहे हैं। राजभर, जो खुद पिछड़े वर्ग की राजनीति के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं, ने कहा कि सामाजिक न्याय के नाम पर राजनीति करना अलग बात है, लेकिन उसके लिए ठोस नीतियां और योजनाएं जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर काम कर रही है और किसी विशेष वर्ग के नाम पर भ्रम पैदा करने की राजनीति उचित नहीं है।

विपक्ष का पलटवार

समाजवादी पार्टी के कुछ सदस्यों ने राजभर के बयान को “सस्ती लोकप्रियता” करार दिया। उनका कहना था कि PDA का मतलब स्पष्ट है,पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक और यह सामाजिक न्याय की अवधारणा पर आधारित है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार सामाजिक मुद्दों पर बहस से बचने के लिए शब्दों की व्याख्या में उलझाने की कोशिश कर रही है।

सदन का माहौल

ओम प्रकाश राजभर प्रदेश की राजनीति में स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते हैं। वे पहले भी कई मुद्दों पर मुखर रुख अपना चुके हैं। उनकी पार्टी का आधार पिछड़े वर्गों में माना जाता है, और वे अक्सर सामाजिक न्याय की राजनीति पर खुलकर बोलते हैं। इस बार उन्होंने PDA के बहाने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाकर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। राजभर के बयान के दौरान सदन में कुछ देर के लिए हंसी और शोरगुल का माहौल बना रहा। अध्यक्ष को व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप भी करना पड़ा। हालांकि, बाद में कार्यवाही सामान्य हो गई और अन्य विधायी कार्यों पर चर्चा जारी रही।