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UP Growth Story; महिला श्रम भागीदारी 36% पहुंची, यूपी की अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार और मजबूती

Women Economic Growth: उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में महिला श्रम भागीदारी दर 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक सक्रियता ने प्रदेश की जीएसडीपी को 13 लाख करोड़ से 36 लाख करोड़ रुपये की ओर अग्रसर करने में अहम भूमिका निभाई है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 14, 2026

9 वर्षों में महिला श्रम भागीदारी 13% से 36% तक पहुँची, जीएसडीपी 36 लाख करोड़ की ओर      (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

9 वर्षों में महिला श्रम भागीदारी 13% से 36% तक पहुँची, जीएसडीपी 36 लाख करोड़ की ओर      (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Women Workforce Growth: उत्तर प्रदेश की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के पीछे महिलाओं की बढ़ती भागीदारी एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरकर सामने आई है। बीते नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की महिला श्रम बल भागीदारी दर 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह वृद्धि न केवल सामाजिक परिवर्तन का संकेत है, बल्कि आर्थिक प्रगति की गति को भी कई गुना बढ़ाने वाला कारक साबित हो रही है।

इसी अवधि में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2017 के लगभग 13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 तक 36 लाख करोड़ रुपये के स्तर की ओर अग्रसर है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस उल्लेखनीय वृद्धि में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की निर्णायक भूमिका रही है।

अर्थशास्त्र का सिद्धांत, यूपी में हुआ व्यवहार में साबित

अर्थशास्त्र का एक स्थापित सिद्धांत कहता है कि महिला श्रम बल भागीदारी दर में प्रत्येक 1 प्रतिशत की वृद्धि से सकल घरेलू उत्पाद में 0.5 से 1 प्रतिशत तक अतिरिक्त उछाल आ सकता है। उत्तर प्रदेश में यह सिद्धांत व्यावहारिक रूप से परिलक्षित हो रहा है। महिलाओं की कार्यक्षेत्र में बढ़ती उपस्थिति ने उत्पादन क्षमता, श्रम उत्पादकता और कर आधार (टैक्स बेस) — तीनों में समानांतर विस्तार किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक सक्रियता ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है।

महिलाएं बनीं ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’

प्रदेश में महिलाओं की आय में वृद्धि का सीधा असर घरेलू उपभोग पर पड़ा है। जब परिवार की आय बढ़ती है तो उपभोग बढ़ता है, जिससे स्थानीय बाजार, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र को मजबूती मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिलाएं डेयरी, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। लाखों महिलाएं छोटे उद्यमों के जरिए आत्मनिर्भर बनी हैं। इससे न केवल परिवारों की आय बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

शहरी क्षेत्रों में भी महिलाएं आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, खुदरा व्यापार और सेवा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ी हैं। स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। इस तरह वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ की भूमिका निभा रही हैं।

कौशल विकास और स्वरोजगार योजनाओं का प्रभाव

महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाली कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को आधुनिक कौशल सिखाए जा रहे हैं, जिससे वे नए रोजगार अवसरों का लाभ उठा सकें। सरकारी योजनाओं के माध्यम से बैंक ऋण, स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता और विपणन सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।

सामाजिक बदलाव की नई कहानी

महिला श्रम भागीदारी दर में वृद्धि केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की भी कहानी कहती है। पहले जहां बड़ी संख्या में महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, अब वे रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे आ रही हैं। परिवारों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका बढ़ी है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों के पोषण पर अधिक निवेश देखा जा रहा है। इससे मानव विकास सूचकांकों में भी सुधार की संभावना बढ़ी है।

टैक्स बेस और निवेश में बढ़ोतरी

महिलाओं के कार्यबल में शामिल होने से राज्य का कर आधार विस्तृत हुआ है। अधिक आय का मतलब अधिक कर संग्रह, जिससे सरकार को बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं में निवेश के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलते हैं। इसके अलावा, बढ़ती आर्थिक गतिविधियों ने निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। जब श्रम शक्ति सक्रिय और उत्पादक होती है, तो उद्योग और निवेश को स्थिरता मिलती है।

ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह

उत्तर प्रदेश ने खुद को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय मानी जा रही है। यदि महिला श्रम भागीदारी दर इसी गति से बढ़ती रही, तो प्रदेश की विकास दर को स्थायी आधार मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से आय असमानता में कमी आएगी और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था अधिक संतुलित और टिकाऊ बनेगी।

ग्रामीण से शहरी तक व्यापक असर

ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। लाखों महिलाएं अब बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी हैं। इससे बचत और निवेश की संस्कृति मजबूत हुई है। शहरी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाएं कॉर्पोरेट और पेशेवर क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। सरकारी और निजी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति ने कार्यस्थलों को अधिक समावेशी बनाया है।