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OP Rajbhar v/s Anil Rajbhar: यूपी की सियासत में खुलकर सामने आई वर्चस्व की लड़ाई, राजभर समाज के दो बड़े नेताओं में तीखा टकराव

Rajbhar Samaj: महाराजा सुहेलदेव जयंती समारोह के दौरान यूपी की सियासत में वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई। कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर और अनिल राजभर के समर्थक आमने-सामने आ गए। मंच से गाली-गलौज और नारेबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 24, 2026

कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर और अनिल राजभर के समर्थकों में भिड़ंत, मंच से गाली-गलौज का वीडियो वायरल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर और अनिल राजभर के समर्थकों में भिड़ंत, मंच से गाली-गलौज का वीडियो वायरल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

OP Rajbhar v/s Anil Rajbhar Social Media Viral Video: उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। राजभर समाज के दो प्रमुख नेताओं प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर और अनिल राजभर के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक खींचतान अब सार्वजनिक मंच पर फूट पड़ी है। महाराजा सुहेलदेव की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए, जिससे कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।

इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मंच से अनिल राजभर द्वारा ओपी राजभर और उनके समर्थकों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए देखा और सुना जा सकता है। इस घटना के बाद यूपी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और राजभर समाज की एकजुटता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

महाराजा सुहेलदेव जयंती पर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद महाराजा सुहेलदेव की जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह के दौरान हुआ। इस कार्यक्रम में अनिल राजभर मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद थे और अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में राजभर समाज के लोग उपस्थित थे और आयोजन को शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा था। इसी दौरान अचानक कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर के समर्थक कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी होते देख माहौल गरमा गया और मंच पर मौजूद अनिल राजभर नाराज नजर आए।

नारेबाजी से भड़के अनिल राजभर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही ओपी राजभर समर्थकों की नारेबाजी तेज हुई, अनिल राजभर का गुस्सा साफ तौर पर मंच से झलकने लगा। उन्होंने अपने संबोधन को बीच में रोकते हुए नारेबाजी कर रहे लोगों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अनिल राजभर ने मंच से अपने समर्थकों से ओपी राजभर समर्थकों को कार्यक्रम स्थल से बाहर भगाने तक की बात कह दी। मंच से अनिल राजभर द्वारा दिए गए बयान और इस्तेमाल की गई भाषा ने पूरे कार्यक्रम को विवादों में ला खड़ा किया।

‘जैसा चोर, उसका नेता भी चोर’-मंच से लगे गंभीर आरोप

वायरल हो रहे वीडियो में अनिल राजभर मंच से कहते नजर आ रहे हैं-“जैसा चोर, वैसा उसका नेता, ये सब चोर हैं…इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ देर के लिए स्थिति बेकाबू होती दिखी। हालांकि बाद में आयोजकों और स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर मामला संभाला, लेकिन तब तक विवाद सार्वजनिक हो चुका था।

वीडियो वायरल, राजनीति गरमाई

अनिल राजभर के मंच से गाली देने और आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई। विपक्षी दलों ने इस घटना को राजभर समाज की राजनीति में बढ़ती गुटबाजी का उदाहरण बताया, वहीं सत्ता पक्ष के भीतर भी इस घटना को लेकर असहजता देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि राजभर समाज में नेतृत्व और वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम है।

ओपी राजभर बनाम अनिल राजभर : पुरानी अदावत

यह पहला मौका नहीं है जब ओपी राजभर और अनिल राजभर के बीच विवाद सामने आया हो। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद चले आ रहे हैं। जहां ओपी राजभर वर्तमान में प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और भाजपा गठबंधन का हिस्सा हैं, वहीं अनिल राजभर खुद को राजभर समाज का स्वतंत्र और सशक्त नेता बताकर मैदान में रखते हैं। दोनों ही नेता राजभर समाज में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं और इसी वर्चस्व की लड़ाई ने इस कार्यक्रम में खुला रूप ले लिया।

राजभर समाज की एकता पर सवाल

महाराजा सुहेलदेव को राजभर समाज का गौरव माना जाता है। ऐसे में उनकी जयंती के अवसर पर इस तरह का विवाद होना समाज के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। समाज के कई वरिष्ठ लोगों और बुद्धिजीवियों ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि व्यक्तिगत राजनीति और सत्ता की लड़ाई ने समाज की एकता को कमजोर किया है। उनका कहना है कि सुहेलदेव जैसे महापुरुषों की जयंती को समाज को जोड़ने का माध्यम बनाना चाहिए, न कि राजनीतिक टकराव का अखाड़ा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर

घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे भाजपा गठबंधन के भीतर अंतर्कलह का उदाहरण बताया है। वहीं कुछ नेताओं ने अनिल राजभर के बयान की निंदा करते हुए सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आने वाले चुनावों से पहले बढ़ा तनाव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए राजभर समाज की अहमियत और बढ़ गई है। ऐसे में इस समाज के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान और तेज हो सकती है। यह घटना आने वाले समय में यूपी की सियासत को और अधिक गर्मा सकती है।