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लखनऊ, May 23, 2026

पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों को बनाया जाएगा प्रशासक! मांग पूरी करेगी सरकार, ओपी राजभर से लेकर बड़े नेताओं से लगातार बातचीत जारी

Panchayat Chunav Update: पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया जा सकता है। सरकार इस मांग को पूरा कर सकती है।

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जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों का बढ़ सकता है कार्यकाल। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Panchayat Chunav Update: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर ना होने की आशंका के बीच ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने की मांग तेज हो गई है। विधानसभा चुनावों की तैयारियों और संभावित व्यस्तताओं को देखते हुए पंचायत चुनाव आगे खिसकने की चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में ग्राम प्रधान संगठन ने सरकार से मांग की है कि चुनाव होने तक मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि गांवों में विकास कार्य प्रभावित न हों।

इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को सरोजनीनगर क्षेत्र में पंचायत संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के कई जिलों से प्रधान प्रतिनिधि और पंचायत पदाधिकारी शामिल हुए। शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह ने प्रधानों को आश्वासन दिया कि सरकार जल्द ही प्रधानों को प्रशासक बनाने की मांग को पूरा कर देगी।

प्रधानों को जल्द मिल सकता है प्रशासक का अधिकार

कार्यक्रम में पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह ने ग्राम प्रधानों को भरोसा दिलाया कि सरकार जल्द ही उनकी मांग पर सकारात्मक फैसला ले सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानों को प्रशासकबनाने की मांग अब सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे प्रदेश के ग्राम प्रधान इससे जुड़ चुके हैं।

डॉ. अखिलेश सिंह ने कहा कि पंचायतों में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि मौजूदा प्रधानों को प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं। उन्होंने दावा किया कि संगठन लगातार सरकार और जनप्रतिनिधियों के संपर्क में है और जल्द ही इस दिशा में अच्छी खबर मिल सकती है।

काकोरी के गहलवारा में हुआ बड़ा पंचायत संवाद कार्यक्रम

यह कार्यक्रम काकोरी क्षेत्र की गहलवारा ग्राम पंचायत में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में आगरा एक्सप्रेसवे और उसके आसपास की कई ग्राम पंचायतों से प्रधान और प्रतिनिधि पहुंचे। पंचायत प्रतिनिधियों ने चुनाव टलने की स्थिति में गांवों में प्रशासनिक और विकास कार्यों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि अगर समय रहते कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक कामकाज भी बाधित होगा।

विधायक राजेश्वर सिंह के समर्थन का दावा

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सरोजनीनगर से शुरू हुई यह मांग अब प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुकी है। उन्होंने दावा किया कि सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का भी संगठन को पूरा समर्थन और सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार को व्यावहारिक निर्णय लेना होगा, ताकि ग्रामीण विकास की रफ्तार धीमी न पड़े।

सीएम योगी और भाजपा नेतृत्व से लगातार संपर्क

पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने बताया कि संगठन पिछले कई सप्ताह से सरकार और भाजपा नेतृत्व के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि 4 अप्रैल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर से लगातार बातचीत की जा रही है। ललित शर्मा के मुताबिक, संगठन ने सरकार के सामने यह तर्क रखा है कि अन्य राज्यों में भी चुनाव टलने की स्थिति में प्रधानों को प्रशासक बनाकर काम कराया गया है और वहां इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

अन्य राज्यों के उदाहरण भी दिए गए

कार्यक्रम में नीवां के प्रधान प्रतिनिधि ओमकार चौरसिया और ऐन ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि सुनील सिंह ने कहा कि कई राज्यों में ग्राम प्रधानों ने प्रशासक के रूप में बेहतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी इसी मॉडल को लागू किया जाना चाहिए। प्रधान प्रतिनिधियों का कहना था कि गांवों की समस्याओं और स्थानीय जरूरतों को मौजूदा प्रधान बेहतर तरीके से समझते हैं। ऐसे में चुनाव होने तक उन्हें ही प्रशासनिक जिम्मेदारी देना ज्यादा व्यावहारिक और प्रभावी कदम होगा।

पंचायत चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर लगातार राजनीतिक हलचल बढ़ती जा रही है। एक ओर राजनीतिक दल चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर ग्राम प्रधान संगठन अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हो गया है। अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है कि चुनाव टलने की स्थिति में पंचायतों के संचालन के लिए क्या व्यवस्था लागू की जाती है।

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