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उपकथाओं व सांस्कृतिक माध्यमों से गंगा की कहानी लोगों तक पहुंचाएं

कोलकाता. गंगा और उसके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए दशकों से सक्रिय स्वयंसेवी संगठन गंगा मिशन ने “गंगा जैसी थी, हमें वैसी ही गंगा चाहिए की मांग की है।” इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सेमिनार हॉल में गंगा मिशन के राष्ट्रीय महासचिव प्रह्लाद रॉय गोयनका के नेतृत्व में आयोजित इस सम्मेलन में गंगा और उससे […]

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कोलकाता. गंगा और उसके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए दशकों से सक्रिय स्वयंसेवी संगठन गंगा मिशन ने “गंगा जैसी थी, हमें वैसी ही गंगा चाहिए की मांग की है।” इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सेमिनार हॉल में गंगा मिशन के राष्ट्रीय महासचिव प्रह्लाद रॉय गोयनका के नेतृत्व में आयोजित इस सम्मेलन में गंगा और उससे जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र के वैज्ञानिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही गंगा संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर आमजन में जागरूकता फैलाने और जमीनी स्तर पर सक्रिय अभियान चलाने के निर्णय लिए गए। वैज्ञानिक सत्र में गंगा तथा उससे जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र पर विमर्श हुआ।

गंगा संरक्षण पर राष्ट्रीय मंथन : गंगा मिशन ने उठाई गंगा के मूल स्वरूप बहाली की मांग

इस सत्र में डॉ. भरत झुनझुनवाला, सुप्रतिम करमाकर, दीप नारायण तथा स्विट्जरलैंड से आईं रोजेरियो ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि गंगा संरक्षण के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण और वैज्ञानिक सोच के साथ कार्य करना आवश्यक बताया और गंगा जल के विशिष्ट गुणों का उल्लेख करते हुए इसके औषधीय उपयोगों पर वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उपकथाओं और सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए गंगा की कहानी को आमजन तक पहुंचाया जाना चाहिए। कानूनी सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता पी. सारदा और अंकुर सूद ने गंगा मिशन एवं अन्य संगठनों द्वारा विभिन्न न्यायालयों में दायर जनहित याचिकाओं की जानकारी दी और गंगा एक्ट को प्रभावी रूप से लागू कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि 1917 में गंगामहा सभा और तत्कालीन सरकार के बीच हुए समझौते का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए।

जमीनी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया

तीसरे सत्र में गंगा संरक्षण से जुड़े विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस सत्र में प्रह्लाद राय गोयनका, नरेंद्र प्रसाद पोखरियाल, एस. के. गुप्ता, मधु भारत, निर्मल अग्रवाल आदि वक्ताओं ने कहा कि गंगा से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान की आवश्यकता है और लक्ष्य स्पष्ट है। इस दौरान गंगा के संरक्षण और जागरूकता के लिए जमीनी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। गंगा मिशन ने आगामी दिनों में लखनऊ, वाराणसी और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में गंगा प्रदूषण रोकथाम अभियान चलाने की घोषणा की।