
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Photo-IANS)
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है। इसके बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर कहा कि अलग दलों के साथ गठबंधन करने से जमीनी स्तर पर कांग्रेस का कार्यकर्ता हतोत्साहित हुआ है।
बता दें कि कांग्रेस ने 2021 विधानसभा चुनाव लेफ्ट के साथ मिलकर लड़ा था। लेकिन इस बार अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में वाम दल भी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ सकती है। हालांकि टीएमसी के साथ कांग्रेस के गठबंधन को लेकर खबर सामने आई थी कि ममता ने पार्टी को महज 2 सीटों का ऑफर दिया था, जो कि अस्वीकार्य था।
कांग्रेस और वाम दल (लेफ्ट फ्रंट) के अलग-अलग चुनाव लड़ने से प्रदेश की राजनीति पर सीधा असर पड़ेगा।
बंगाल में कांग्रेस और वाम दलों का परंपरागत वोट बैंक भी काफी हद तक एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। अब इस विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अकेले चुनाव लड़ती हैं, तो वोटों का बंटवारा होगा। जो ममता बनर्जी के खिलाफ वोट बैंक है, वह बंट जाएगा और सीधा फायदा सीएम ममता बनर्जी की पार्टी को होगा।
जहां कांग्रेस-लेफ्ट मजबूत हैं, वहां अलग-अलग लड़ने से BJP को मुकाबले में आने का मौका मिलेगा। इसके अलावा कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला (TMC vs BJP vs Congress/Left) देखने को मिलेगा। कुछ सीटों पर BJP “डिवाइडेड वोट” से जीत सकती है।
दोनों पार्टियों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से कांग्रेस और लेफ्ट कमजोर नजर आएंगे। वहीं राजनीतिक प्रभाव घटेगा। विपक्षी एकता को भी झटका लगेगा। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की बात होती है, लेकिन बंगाल में अलग लड़ना संदेश देगा कि “विपक्ष एकजुट नहीं है”। इससे जनता में भरोसा कमजोर होगा।
प्रदेश में करीब 27 से 30 प्रतिशत मुस्लिम हैं। यदि दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं, तो मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ेगा। दोनों दलों का मुस्लिम वोट बैंक भी एक जैसा है। ऐसे में बिखराव होगा और सीधा फायदा ममता और बीजेपी को होगा। कुल मिलाकर, एकजुट रणनीति न होने पर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीतिक ताकत कमजोर पड़ सकती है।
| चुनाव वर्ष | कुल सीटें | कांग्रेस सीटें | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 2006 | 294 | 21 | कांग्रेस कमजोर प्रदर्शन |
| 2011 | 294 | 42 | गठबंधन के साथ बढ़ा प्रदर्शन |
| 2016 | 294 | 44 | कांग्रेस ने कुछ सुधार किया |
| 2021 | 294 | 0 | भारी गिरावट, कोई सीट नहीं जीती |
प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन 2006 से 2016 तक लगातार बढ़ता गया, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2021 के चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली।
बता दें कि कांग्रेस ही नहीं, वाम दल को भी 2021 के चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली। वहीं, 2016 के विधानसभा चुनाव में 32 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वाम दल का प्रदर्शन भी पिछले चुनाव में जीरो रहा।
Published on:
06 Feb 2026 10:02 am
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