11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लाड़ली बहना योजना के नाम पर कलेक्ट्रेट में फर्जी फार्मों की भरमार, महिलाओं से हो रही अवैध वसूली

अफवाह ने बढ़ाई मुसीबत, लाड़ली बहना योजना के नाम पर अबतक पहुंचे 10 हजार से ज्यादा फर्जी फार्म, महिलाओं की परेशानी बढ़ी, अफसर भी हलाकान

3 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Feb 10, 2026

Rumors about filling up forms for Ladli Behna Yojana

Rumors about filling up forms for Ladli Behna Yojana

कटनी. प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना इन दिनों कलेक्ट्रेट में अफवाहों के कारण बड़ी समस्या का रूप ले चुकी है। योजना का लाभ दिलाने के नाम पर फैली गलत जानकारी ने हजारों महिलाओं को भ्रमित कर दिया है। हालात यह हैं कि पिछले करीब 30 दिनों में कलेक्ट्रेट में 10 हजार से अधिक कथित आवेदन फार्म जमा हो चुके हैं, जबकि शासन की ओर से साफ निर्देश हैं कि फिलहाल लाड़ली बहना योजना के कोई नए फार्म न तो भरे जा रहे हैं और न ही जमा लिए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रतिदिन 100 से अधिक महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंच रही हैं। इनमें अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र, आदिवासी अंचल और दूर-दराज के गांवों से आने वाली महिलाएं हैं। वे हाथों में फार्म लेकर लाइन में खड़ी रहती हैं, लेकिन जब अधिकारियों द्वारा बताया जाता है कि यह फार्म फर्जी हैं, तो महिलाएं हताश और परेशान होकर लौटने को मजबूर हो जाती हैं। लगातार बढ़ रही भीड़ से कलेक्ट्रेट में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी भी परेशान हैं। यह अफवाह प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। एक ओर महिलाओं की भीड़ संभालना मुश्किल हो रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध वसूली और फर्जी फार्म बेचने वालों पर कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस संबंध में सख्त कदम उठाए जाएंगे और आमजन को सही जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

महिलाओं की गंभीर समस्याएं

कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं ने बताया कि योजना का लाभ पाने की उम्मीद में वे अपनी दिहाड़ी छोडकऱ यहां आई हैं। कई महिलाओं ने बताया कि गांव से शहर आने-जाने में 200 से 300 रुपए तक का खर्च हो गया। कन्हवारा से आई रेखा चौधरी ने बताया कि फार्म के नाम पर उनसे 50 से 100 रुपए तक वसूले गए। महिलाओं का कहना है कि हम गरीब हैं, मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। एक दिन की मजदूरी गई, ऊपर से यात्रा और फार्म का खर्च अलग। महिलाओं का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि अगर फार्म नहीं भरा तो लाड़ली बहना योजना का पैसा बंद हो जाएगा या भविष्य में लाभ नहीं मिलेगा। इसी डर के कारण वे सब काम छोडकऱ यहां आईं।

फार्म फर्जी तो बिक्री पर रोक क्यों नहीं

महिलाओं ने सवाल उठाया कि यदि यह फार्म फर्जी हैं, तो फिर कलेक्ट्रेट के आसपास खुलेआम उनकी बिक्री कैसे हो रही है। अगर प्रशासन पहले ही सही जानकारी गांवों तक पहुंचा देता, तो इतनी परेशानी नहीं होती। कई महिलाओं का कहना है कि वे अशिक्षित हैं और अधिकारियों की बात समझना उनके लिए आसान नहीं है, इसलिए वे दूसरों की बातों पर भरोसा कर लेती हैं।

अवैध वसूली का खेल भी शुरू

अफवाह का फायदा उठाकर कुछ दुकानदार और कथित एजेंट सक्रिय हो गए हैं। कलेक्ट्रेट के आसपास लाड़ली बहना योजना के नाम से फार्म बेचे जा रहे हैं। महिलाओं को यह कहकर फार्म थमाया जा रहा है कि यही असली फार्म है और इसे जमा करने से योजना का लाभ मिलेगा। बदले में उनसे 50 से 100 रुपए वसूले जा रहे हैं। यह मामला अब खुलकर सामने आने लगा है।

अफवाह ऐसे फैली

दरअसल, 20 जनवरी को इंडिया गठबंधन द्वारा लाड़ली बहना योजना की राशि 3000 रुपए प्रतिमाह करने और वंचित महिलाओं को योजना में शामिल करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान महिलाओं को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक आवेदन पत्र दिया गया, जिसमें स्वयं को योजना से वंचित बताते हुए जानकारी भरने को कहा गया था। यहीं से यह भ्रम फैल गया कि योजना का लाभ पाने के लिए यही फार्म भरना जरूरी है।

चस्पा करना पड़ा नोटिस

महिला एवं बाल विकास विभाग ने कार्यालय के बाहर सूचना नोटिस चस्पा कर स्पष्ट किया है कि लाड़ली बहना योजना के किसी भी प्रकार के फार्म नहीं लिए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह अफवाह है और लोग किसी के झांसे में न आएं। इसके बावजूद अफवाह थमने का नाम नहीं ले रही है।

इनका कहना

हमने कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया है कि योजना से संबंधित कोई भी फार्म नहीं भरा जा रहा है। अफवाह की वजह से महिलाएं यहां आ रही हैं। फार्म कहां और कौन लोगों द्वारा महिलाओं को भ्रमित कर बेचे जा रही है, इसकी जांच कराई जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई है।

वनश्री कुर्वेती, महिला सशिक्तकरण अधिकारी