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उड़ता जंक्शन: कटनी से तेज होगी देश की सप्लाई चेन, एलिवेटेड ट्रैक पर बदल रहा माल परिवहन का स्वरूप

भारतीय रेलवे का सबसे लंबा रेलवे वायडक्ट ले रहा आकार, 15.85 किमी लंबे अप ग्रेड सेपरेटर से रोजाना गुजर रहीं ट्रेनें

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कटनी

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Balmeek Pandey

Feb 02, 2026

Katni Gets a World-Class Railway Grade Separator

Katni Gets a World-Class Railway Grade Separator

शिवप्रताप सिंह @ कटनी. कटनी में जो रेलवे वायडक्ट बन रहा है, वह सिर्फ एक रेलवे प्रोजेक्ट नहीं है, यह उस सप्लाई चेन का हिस्सा है, जिस पर देश के बिजलीघर, फैक्ट्रियां और खनिज उद्योग टिके हैं। भारतीय रेलवे के महत्वाकांक्षी अधोसंरचना प्रोजेक्टों में से एक, कटनी ग्रेड सेपरेटर अब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। यह परियोजना भारतीय रेलवे का सबसे लंबा रेलवे वायडक्ट बनने जा रही है। 33.40 किलोमीटर लंबा कटनी ग्रेड सेपरेटर (रेल फ्लाईओवर) अब जमीन पर असर दिखाने लगा है। अप ट्रैक के चालू होते ही रोजाना करीब 20 मालगाडिय़ां बिना किसी ठहराव के निकल रही हैं और यही बदलाव देश के माल परिवहन ढांचे की दिशा तय कर रहा है। बीना-कटनी रेलखंड लंबे समय से देश के सबसे व्यस्त माल मार्गों में रहा है। कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और अन्य भारी माल इसी रास्ते से गुजरते हैं। पहले कटनी जंक्शन पर ट्रैफिक फंसता था। अब वही मालगाडिय़ां एलिवेटेड ट्रैक से शहर के ऊपर से चुपचाप निकल रही हैं। जमीन पर यार्ड है, ऊपर मालगाडिय़ों का निरंतर आवागमन हो रहा है।

1800 करोड़ का 18 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट

कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना की कुल लंबाई झलवारा कटंगी से मझगवां तक 33.40 किलोमीटर है, जिसकी अनुमानित लागत 1800 करोड़ रुपए है। यह दो भागों में बन रहा है। पहला डाउन ग्रेड सेपरेटर (17.52 किमी) और अप ग्रेड सेपरेटर (15.85 किमी)। अगस्त 2025 से 15.85 किलोमीटर लंबा अप ग्रेड सेपरेटर पूरी तरह ऑपरेशनल है। दूसरी ओर 17.52 किलोमीटर लंबे डाउन ट्रैक पर निर्माण जारी है। इस परियोजना में 18 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट बनाया जा रहा है, जो देश का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट होगा। ब्रिज का निर्माण ठेका कंपनी एलएंडटी द्वारा किया जा रहा है।

होल्डिंग टाइम में आई गिरावट

ग्राउंड पर काम कर रहे रेल स्टाफ बताते हैं कि इस ट्रैक के शुरू होने के बाद ट्रेनों की होल्डिंग टाइम में साफ गिरावट आई है। कंट्रोल रूम से ट्रेनों की लाइनिंग आसान हुई है और मालगाडिय़ों का संचालन अधिक प्रिडिक्टेबल हो गया है जो किसी भी सप्लाई चेन के लिए सबसे अहम है।

देशभर को मिलेगा फायदा

रेलवे अधिकारी बताते हैं कि ग्रेड सेपरटर का असर कटनी तक सीमित नहीं है। कोयला खदानों से लेकर पावर प्लांट तक, सीमेंट फैक्ट्रियों से लेकर स्टील यूनिट्स तक पूरी फ्रेट चेन को इससे लाभ मिलेगा। डाउन ट्रैक के पूरा होते ही इस रूट पर मालगाडिय़ों की संख्या और गति दोनों बढऩे की संभावना है। कटनी ग्रेड सेपरेटर यह दिखाता है कि रेलवे अब सिर्फ ट्रैक नहीं बिछा रहा, बल्कि देश के माल परिवहन ढांचे की कार्यप्रणाली बदल रहा है। यह बदलाव रोज ऊपर से गुजरती उन मालगाडिय़ों से साफ दिखाई दे रहा है, जो बिना रुके देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रही हैं।

689 पियर्स पर खड़ा होगा ब्रिज

कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना की कुल लंबाई 33.40 किमी है, जिसमें डाउन ग्रेड सेपरेटर 17.52 किमी और अप ग्रेड सेपरेटर 15.85 किमी शामिल हैं। इस परियोजना में कुल 689 पियर्स/अब्यूटमेंट्स, 8 रेल ओवर रेल और 6 मेजर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। एलिवेटेड डेक पर पॉइंट्स और क्रॉसिंग का कार्य भी इस परियोजना का हिस्सा है। अप साइड पर 1570 फाउंडेशन और 264 पियर्स का निर्माण किया जा चुका है जबकि डाउन साइड में 2592 फाउंडेशन और 425 पियर्स का निर्माण जारी है। निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले मटेरियल, उन्नत तकनीक और हैवी मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है। परियोजना की कुल लागत लगभग 1800 करोड़ है।

परियोजना के यह फायदे

  • फ्रेट ट्रेन संचालन में वृद्धि: बीना-कटनी रेल खंड में मालगाडिय़ों की संख्या और गति में वृद्धि हुई है।
  • सीधा संपर्क: कटनी से बिलासपुर और सिंगरौली के लिए अतिरिक्त रेल लाइन जुड़ गई है, जिससे न्यू कटनी, कटनी मुड़वारा जैसे व्यस्त क्षेत्रों को बायपास किया जा रहा है।
  • समय की बचत: माल यातायात में वृद्धि के कारण फ्रेट ट्रेनों के संचालन समय में कमी आई और यातायात आसान हुआ।

तकनीकी विवरण

कुल लंबाई 33.40 किमी
डाउन ग्रेड सेपरेटर 17.52 किमी
अप ग्रेड सेपरेटर 15.85 किमी
कुल अनुमानित लागत 1800 करोड़
वायाडक्ट लंबाई 18 किमी
रिटेनिंग वॉल 3 किमी
अर्थवर्क 13 किमी
स्पैन निर्माण (अप) 260 स्पैन
स्पैन निर्माण (डाउन) 411 स्पैन
फाउंडेशन (अप) 1570
पियर्स (अप) 264
फाउंडेशन (डाउन) 2592
पियर्स (डाउन) 425
ओवरहेड इक्विपमेंट स्पैन 264
ट्रॉली रिफ्यूज स्पैन 82
रेल ओवर रेल 8
मेजर ब्रिज 6

इनका कहना है

कटनी में भारतीय रेलवे का सबसे लंबा पुल (वायाडक्ट) कटनी ग्रेड सेपरेटर बनाया जा रहा है। यह परियोजना पश्चिम मध्य रेलवे की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। इस ग्रेड सेपरेटर के पूरा होने पर यह भारतीय रेलवे का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट बन जाएगा। अप ट्रेक का निर्माण पूरा हो चुका है और डाउन ट्रेक पर निर्माण तेजी से चल रहा है।

हर्षित श्रीवास्तव, सीपीआरपो, जबलपुर

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