
Katni rapta pul
कटनी. खिरहनी स्थित रपटा नाला में अवैध निर्माण कर बाउंड्रीवाल बनाने के मामले में बिल्डर प्रवीण बजाज पप्पू की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कलेक्टर न्यायालय के आदेश के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने तहसीलदार को पत्र जारी कर अवैध निर्माण तोडऩे व शासकीय पानी मद की भूमि निजी भूस्वामी के नाम पर दर्ज होने की जांच करने कहा है।
जानकारी के अनुसार बिल्डर द्वारा खिरहनी में रपटा के समीप नाले पर अवैध निर्माण करते हुए बाउंड्रीवाल बना ली गई है। इस बाउंड्रीवाल की आड़ में रपटा नाला का गला घोंट दिया गया है। प्रकरण की जांच करते हुए तत्कालीन एसडीएम प्रदीप मिश्रा ने अवैध निर्माण को हटाने 16 अगस्त 2024 को आदेश जारी किया गया। आदेश जारी होने के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण तोडऩे की कार्रवाई शुरू की लेकिन नाला में पानी अधिक होने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद बिल्डर द्वारा एसडीएम के आदेश के खिलाफ कलेक्टर न्यायालय में अपील की गई। कलेक्टर न्यायालय द्वारा प्रकरण कीर विवेचना में यह पाया गया कि अपीलार्थी द्वारा समक्ष अनुमति के बिना बाउंड्रीवाल का निर्माण किया गया, जिससे नाले के स्वरूप में परिवर्तन हुआ और बिना सक्षम अनुमति के निर्माण किया जाना अवैधानिक है और न्यायालय ने अपील निरस्त करते हुए एसडीएम के आदेश को स्थिर रखा। एसडीएम को आदेश किया कि अवैध निर्माण को तत्काल हटाया जाए।
कलेक्टर न्यायालय द्वारा यह पाया गया कि हल्का पटवारी प्रतिवेदन में यह लेख किया गया है कि ख.न. 442 रकवा 0.36 एकड़ मिसल अभिलेख 1907-08 के अनुसार पानी मद में दर्ज है तथा कैफियत में नाला दर्ज है। वर्तमान में नाला चौड़ा है। शासकीय मद पानी-नाला से भूस्वामी में परिवर्तन के संबंध में खसरा कैफियत में न्यायालय के प्रकरण क्रमांक या आदेश का उल्लेख नहीं है। अत: शासकीय पानी मद की भूमि निजी भूस्वामी हक में कैसे दर्ज हुई, इस संबंध में एसडीएम विस्तृत जांच कर 15 दिवस में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
बिल्डर द्वारा कलेक्टर व एसडीएम न्यायालय के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्टे मांगा गया था लेकिन हाल ही में न्यायालय ने सुनवाई करते हुए इस संबंध में स्टे नहीं दिया गया है। हालांकि न्यायालय ने इस संबंध में अनावेदकों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं और जवाब मांगा है।
कलेक्टर न्यायालय द्वारा अपील को खारिज करते हुए पूर्व में हुए आदेश को स्थिर रखा गया है। न्यायालय के आदेशानुसार अतिक्रमण हटाने व शासकीय पानी मद की भूमि निजी भूस्वामी हक में कैसे दर्ज हुई, इस संबंध में जांच के लिए तहसीलदार को पत्र लिखा गया है। जल्द ही प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
02 Feb 2026 08:38 am

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