
जैसलमेर शहर में होली की हलचल चरम पर है, बाजारों में गुलाल और पिचकारियों की रौनक है, लेकिन विद्यार्थियों की दिनचर्या इन दिनों बिल्कुल अलग नजर आ रही है। परीक्षाओं के कारण कई छात्र मौज-मस्ती से दूरी बनाकर पढ़ाई में जुटे हुए हैं। विस्तृत पाठ्यक्रम और समय की कमी ने उन्हें गंभीर बना दिया है। कई छात्र अपनी तैयारी से संतुष्ट दिखते हैं, जबकि कुछ को अधूरे पाठ्यक्रम की चिंता सता रही है। परीक्षा का दबाव उनके चेहरे पर साफ दिखाई देता है। होली के रंगों से सजी गलियों के बीच छात्रावासों और घरों में देर रात तक पढ़ाई का दौर चल रहा है।
परीक्षा निकट आने के साथ मंदिरों में विद्यार्थियों की आवाजाही भी बढ़ गई है। नगर के प्रमुख लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित अन्य मंदिरों में छात्र अच्छे अंक प्राप्त करने की कामना कर रहे हैं। प्रतियोगिता के इस दौर में बेहतर प्रदर्शन का दबाव भी उन्हें अधिक मेहनत के लिए प्रेरित कर रहा है।
छात्रा रीना कुमारी ने बताया कि इस बार पाठ्यक्रम काफी बड़ा है। होली मनाने का मन है, लेकिन पहले परीक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई कर रही हूं। बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थी महेश कुमार का कहना है कि कुछ टॉपिक कठिन लग रहे हैं, इसलिए दोस्तों के साथ मिलकर तैयारी कर रहे हैं। इसी तरह आठवीं बोर्ड की छात्रा निधि शर्मा का कहना है कि नियमित पढ़ाई करने से आत्मविश्वास बना हुआ है, फिर भी परीक्षा का दबाव स्वाभाविक है। मंदिर जाकर मन को शांति मिलती है। बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थी आरवसिंह ने बताया कि इस बार होली सादगी से मनाएंगे। लक्ष्य अच्छे अंक लाना है ताकि आगे की पढ़ाई के लिए बेहतर अवसर मिल सके।
सरहदी जिले के छात्रों को यह बात समझ में आ चुकी है कि जिम्मेदारी के समय मनोरंजन को पीछे छोडकऱ लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना ही सफलता की कुंजी है। उनके अनुसार होली का उत्साह अपने स्थान पर है, लेकिन विद्यार्थियों के लिए फिलहाल प्राथमिकता परीक्षा है। कोई महत्वपूर्ण प्रश्नों का दोहराव कर रहा है तो कोई नोट्स व्यवस्थित कर रहा है।
Updated on:
01 Mar 2026 08:24 pm
Published on:
01 Mar 2026 08:23 pm
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