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Rajasthan : राजस्थान में वित्तीय अधिकारों में दखल पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग व सरकार में टकराव, जानें दोनों ने क्या कहा?

Rajasthan : राजस्थान में वित्तीय अधिकारों में दखल को लेकर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य सरकार के बीच टकराव हो गया है। जानें दोनों ने अपने-अपने पक्ष में क्या कहा?

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Rajasthan State Backward Classes Commission and government conflict financial powers interference

राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा। फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan : राजस्थान में वित्तीय अधिकारों में दखल को लेकर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य सरकार के बीच टकराव हो गया है। आयोग में सदस्य व सदस्य सचिव पूर्ववर्ती सरकार के समय के हैं और राज्य सरकार ने संयुक्त निदेशक को कार्यालयाध्यक्ष बनाकर वित्तीय अधिकार सौंप दिए हैं।

आयोग ने वित्तीय अधिकार संयुक्त निदेशक को सौंपने के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आदेश को स्वायत्तता में दखल बताकर आपत्ति जताई है, वहीं चेताया कि यह आदेश 2017 के राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम की अवहेलना है।

आयोग के सदस्य सचिव ने इस मामले में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी है। आयोग में वर्तमान में अध्यक्ष का पद खाली है, लेकिन सदस्य सचिव एवं सदस्य पूर्ववर्ती सरकार के समय से कार्यरत हैं। उधर, आयोग की संयुक्त निदेशक अंजू पारीक ने हाल ही आदेश जारी कर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को हिदायत दी है कि आयोग की सभी पत्रावलियां उन्हीं के पास भेजी जाएं।

आयोग ने कहा, सरकार को अधिकार नहीं

आयोग ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को पत्र भेजकर याद दिलाया है कि कानून के अंतर्गत आयोग के संबंध में सदस्य सचिव ही आदेश जारी कर सकता है, सरकार नहीं। सदस्य सचिव ने किसी भी अधिकारी को कोई भी आदेश जारी करने के लिए अधिकृत नहीं किया है।

सरकार ने कहा, मनोनीत पदाधिकारियों को वित्तीय अधिकार नहीं

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने आयोग से कहा है कि वित्तीय नियमों के उपयोग के लिए राजपत्रित अधिकारी को ही कार्यालयाध्यक्ष घोषित किया जा सकता है। आयोग के अध्यक्ष, सदस्य, सदस्य सचिव तीन वर्ष के लिए मनोनीत होते हैं, उन्हें राजपत्रित अधिकारी नहीं माना जा सकता।

सवाल, क्या यह आदेश सभी आयोगों के लिए

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आदेश से जहां आयोग की स्वायत्तता में दखल का सवाल खड़ा हो रहा है, वहीं सवाल यह भी है कि क्या यह व्यवस्था उन सभी आयोगों पर लागू होगी जहां सदस्य सचिव मनोनीत होते हैं। इन आयोगों में राज्य वित्त आयोग भी शामिल है।

जब से आयोग बना है, तब से सदस्य सचिव ही आयोग में वित्तीय अधिकार संभालते रहे हैं। अन्य राज्यों में भी आयोग के सदस्य सचिव के पास ही यह अधिकार है। इसके अलावा अन्य आयोगों में भी यह ही व्यवस्था है।
भंवरू खान, पूर्व अध्यक्ष, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग